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News Samvad : गर्मियों की शुरुआत होते ही तेज धूप, पसीना और उमस लोगों को परेशान करने लगती है, लेकिन यह मौसम डायबिटीज मरीजों के लिए और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है। जब तापमान 35°C के पार जाता है, तो शरीर पर इसका सीधा असर पड़ता है और ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव शुरू हो जाता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि गर्मी सिर्फ बाहर से ही नहीं, बल्कि शरीर के अंदर भी कई बदलाव करती है, जो डायबिटीज कंट्रोल को मुश्किल बना देते हैं।
डिहाइड्रेशन बनता है सबसे बड़ा कारण
डॉक्टर्स के मुताबिक, गर्मियों में पसीना ज्यादा निकलने से शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होना बहुत आम है।
जब शरीर में पानी कम हो जाता है:
- खून गाढ़ा होने लगता है
- ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है
- शुगर लेवल हाई दिखने लगता है
इतना ही नहीं, किडनी को भी शरीर से अतिरिक्त शुगर बाहर निकालने में परेशानी होती है, जिससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
गर्मी और हार्मोन का खेल
तेज गर्मी और उमस शरीर के तापमान को बढ़ा देती है। इसे कंट्रोल करने के लिए शरीर ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है।
इस दौरान:
- स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं
- ये हार्मोन सीधे ब्लड शुगर को प्रभावित करते हैं
कुछ मामलों में उल्टा असर भी देखने को मिलता है—
ब्लड वेसल्स फैलने से इंसुलिन तेजी से काम करता है
और शुगर लेवल अचानक गिर सकता है (हाइपोग्लाइसीमिया)
यह स्थिति भी उतनी ही खतरनाक होती है।
खानपान की छोटी गलतियां बनती हैं बड़ी समस्या
गर्मी से राहत पाने के लिए लोग अक्सर:
- कोल्ड ड्रिंक्स
- पैकेज्ड जूस
- आइसक्रीम
- ज्यादा मीठी शिकंजी
का सेवन करने लगते हैं।
इनमें हाई शुगर और कैलोरी होती है, जो तुरंत ब्लड शुगर बढ़ा देती हैं।
इसके अलावा:
- कम शारीरिक गतिविधि
- पूरी नींद न लेना
भी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देते हैं, जिससे शुगर कंट्रोल बिगड़ जाता है।
गर्मियों में डायबिटीज कैसे रखें कंट्रोल?
डॉक्टरों के अनुसार, थोड़ी सावधानी रखकर गर्मियों में भी शुगर लेवल कंट्रोल में रखा जा सकता है।
जरूरी टिप्स:
- दिनभर पर्याप्त पानी पिएं
- नींबू पानी, छाछ जैसे हेल्दी ड्रिंक्स लें
- मीठे और पैकेज्ड ड्रिंक्स से बचें
- इंसुलिन और दवाओं को ठंडी जगह पर रखें
- हल्के और सूती कपड़े पहनें
- धूप में निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें
- सबसे जरूरी: शुगर लेवल की जांच पहले से ज्यादा बार करें
सबसे जरूरी बात
गर्मियों में डायबिटीज मैनेजमेंट लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करता। छोटे-छोटे बदलाव—जैसे पानी कम पीना या मीठा ज्यादा लेना—भी बड़ा असर डाल सकते हैं।
इसलिए सतर्क रहें, शरीर के संकेत समझें और जरूरत पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

