अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामनवमी के जुलूस अक्सर भक्ति, जोश और परंपरा के रंग में रंगे होते हैं, लेकिन इस बार बरकाकाना में निकला जुलूस कुछ अलग था। यहां सिर्फ ढोल-नगाड़े और जयकारे ही नहीं गूंज रहे थे, बल्कि इंसानियत, भरोसे और साथ चलने का एहसास भी साफ दिख रहा था। दुर्गी इलाके में जो दृश्य सामने आया, उसने इस जुलूस को एक साधारण आयोजन से कहीं आगे पहुंचा दिया।
जब इंतजार में खड़े थे लोग, हाथों में फूल लिए
दुर्गी की सड़क पर जुलूस के आने से पहले ही कुछ लोग खामोशी से खड़े थे। उनके हाथों में फूल थे और चेहरे पर मुस्कान। ये मुस्लिम समुदाय के लोग थे, जो अपने पड़ोसियों का स्वागत करने के लिए पहले से इंतजार कर रहे थे। जैसे ही जुलूस वहां पहुंचा, अचानक फूलों की बारिश शुरू हो गई। उस पल में न कोई दीवार थी, न कोई दूरी। बस एक ही भाव था, अपनापन। “जय श्रीराम” के नारों के बीच यह स्वागत किसी औपचारिकता जैसा नहीं, बल्कि दिल से निकला हुआ लगा।

एक पल जिसने सबको भावुक कर दिया
जुलूस में शामिल कई लोगों के लिए यह अनुभव नया था। कुछ लोग रुककर उस दृश्य को अपने मोबाइल में कैद कर रहे थे, तो कुछ बस चुपचाप मुस्कुरा रहे थे। एक बुजुर्ग श्रद्धालु ने धीरे से कहा, “यही असली त्योहार है, जहां सब साथ हों।” वहीं, स्वागत करने वालों के चेहरे पर भी सुकून था। उनके लिए यह सिर्फ एक जुलूस नहीं, बल्कि अपने इलाके की पहचान को मजबूत करने का मौका था। यह बताने का मौका कि त्योहार सिर्फ किसी एक का नहीं होता, यह सबका होता है।
जुलूस नहीं, जैसे एक चलता-फिरता उत्सव
जुलूस आगे बढ़ता रहा और उसके साथ जुड़ता गया लोगों का कारवां। रास्ते में कहीं शरबत बांटा जा रहा था, कहीं पानी की व्यवस्था थी, तो कहीं प्रसाद। बच्चे रंग-बिरंगे कपड़ों में दौड़ते दिखे, युवा ढोल की थाप पर झूमते नजर आए और बुजुर्ग शांति से इस माहौल को महसूस करते रहे। हर मोड़ पर लोगों की भागीदारी साफ दिख रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा इलाका एक साथ मिलकर इस दिन को खास बना देना चाहता हो।

पुलिस की मौजूदगी, लेकिन माहौल में अपनापन
इस पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय रहा। बरकाकाना ओपी प्रभारी उमा शंकर वर्मा के नेतृत्व में पुलिस लगातार निगरानी कर रही थी। हर संवेदनशील जगह पर नजर थी, ताकि कोई गड़बड़ी न हो। लेकिन खास बात यह रही कि सुरक्षा के बीच भी माहौल में डर नहीं, बल्कि भरोसा था। पुलिस की मौजूदगी व्यवस्था बनाए रखने के लिए थी, लेकिन लोगों के बीच अपनापन ही सबसे बड़ा सहारा बनकर दिखा।

नाम अलग हो सकते हैं, लेकिन कहानी एक है
इस आयोजन में मोहम्मद सफाकत, फरीद अंसारी, मोकीम आलम, एहसान अंसारी, मोहम्मद मोसराफत, निजाम अंसारी, सबा आलम, मोहम्मद तनवीर, मोहम्मद कलाम, मोहम्मद अबरार के साथ-साथ सोहराय महतो, जतरु महतो, रिंकू महतो, जीतेन्द्र मुंडा, राजकुमार महतो और मोगल करमाली जैसे कई लोग शामिल थे। इन नामों में भले ही अलग-अलग पहचान हो, लेकिन आज इन सबकी कहानी एक ही थी, साथ रहने और साथ चलने की।
एक जुलूस, जो याद बन गया
बरकाकाना की यह रामनवमी सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं रही। यह एक ऐसा दिन बन गया, जब फूलों की बारिश ने लोगों के बीच भरोसे को और मजबूत कर दिया। जब यह एहसास हुआ कि अगर नीयत साफ हो, तो त्योहार सच में सबको जोड़ने का काम करते हैं।
इसे भी पढ़ें : रामनवमी से पहले बरकाकाना-पतरातू में पुलिस का शक्ति प्रदर्शन, पूरे इलाके में हाई अलर्ट



