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Home » गांवों की अंधेरी गलियों में पहुंची BFCL की रौशनी, बदली रात की तस्वीर
झारखंड

गांवों की अंधेरी गलियों में पहुंची BFCL की रौशनी, बदली रात की तस्वीर

May 25, 2026No Comments4 Mins Read
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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : पहले शाम ढलते ही गांवों की गलियां सुनसान हो जाती थीं। अंधेरे की वजह से लोग जरूरी काम होने पर भी घरों से निकलने से बचते थे। महिलाएं और बुजुर्ग रात में अकेले बाहर जाने से घबराते थे। बच्चों को ट्यूशन या पढ़ाई से लौटने में डर लगता था। लेकिन अब कई गांवों की तस्वीर धीरे-धीरे बदलने लगी है। गांव की उन्हीं गलियों में अब रात के समय सोलर स्ट्रीट लाइट की रोशनी दिखाई दे रही है। यह बदलाव बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड यानी BFCL की पहल से संभव हुआ है। कंपनी ने अपने कॉर्पोरेट पर्यावरणीय दायित्व के तहत आसपास के ग्रामीण इलाकों में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने का काम शुरू किया है। इसका मकसद सिर्फ रोशनी देना नहीं, बल्कि गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन को थोड़ा आसान और सुरक्षित बनाना भी है।

अंधेरे से जूझते गांवों को मिली राहत

ग्रामीण इलाकों में आज भी कई जगहों पर रात के समय पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होती। बरसात या गर्मी के दिनों में यह परेशानी और बढ़ जाती है। बिजली कटने के बाद पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। ऐसे में लोगों को सांप-बिच्छू, गड्ढों और दुर्घटनाओं का डर बना रहता है। इसी परेशानी को समझते हुए BFCL ने मरार, दिगवार, पोचरा, हथीमारा, फूलसराय और मनुवा गांव में सोलर स्ट्रीट लाइट लगवाई हैं। इन गांवों में अब रात होते ही सड़कें और गलियां रोशनी से जगमगाने लगी हैं। मरार गांव में तीन, दिगवार में पांच, पोचरा में तीन, हथीमारा में तीन, फूलसराय में तीन और मनुवा गांव में भी तीन सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहल गांव के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है।

महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा फायदा

गांवों में रहने वाली महिलाओं को इस पहल से सबसे ज्यादा राहत मिली है। पहले अंधेरे की वजह से महिलाएं शाम के बाद बाहर निकलने से कतराती थीं। अब गांव की मुख्य गलियों में रोशनी रहने से उन्हें काफी सुरक्षित महसूस हो रहा है। स्कूल और ट्यूशन जाने वाले बच्चों को भी अब आने-जाने में सुविधा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले बच्चे जल्दी घर लौटने की कोशिश करते थे, लेकिन अब रात में भी रास्ता साफ दिखाई देता है। बुजुर्गों को भी इसका लाभ मिल रहा है। गांवों में अक्सर लोग रात के समय मंदिर, दुकान या किसी रिश्तेदार के घर जाने में दिक्कत महसूस करते थे। अब सोलर लाइट की वजह से रास्ते आसान हो गए हैं।

गांव में दिख रहा बदलाव

सोलर स्ट्रीट लाइट लगने के बाद गांवों का माहौल भी बदला-बदला नजर आने लगा है। जहां पहले शाम होते ही अंधेरा छा जाता था, वहां अब देर रात तक हलचल दिखाई देती है। कई ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय अब लोग आराम से गांव की चौपाल तक पहुंच रहे हैं और छोटे दुकानदारों को भी फायदा मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सोलर लाइट से सिर्फ रोशनी ही नहीं मिली, बल्कि सुरक्षा की भावना भी मजबूत हुई है। खासकर बच्चों और महिलाओं के परिवार वाले अब पहले से ज्यादा निश्चिंत महसूस कर रहे हैं।

हरित ऊर्जा की ओर बढ़ता कदम

बीएफसीएल की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। सौर ऊर्जा से चलने वाली ये लाइटें बिजली की खपत कम करेंगी और प्रदूषण भी नहीं फैलाएंगी। गांवों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए यह एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में ग्रामीण इलाकों में सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं का विस्तार जरूरी है, ताकि गांव आत्मनिर्भर बन सकें और लोगों को कम खर्च में बेहतर सुविधाएं मिलें।

सिर्फ उद्योग नहीं, समाज के विकास पर भी जोर

BFCL प्रबंधन का कहना है कि कंपनी केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी लगातार आसपास के गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, पेयजल, स्वच्छता और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्य कर रही है। प्रबंधन के मुताबिक, कंपनी का मकसद है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के तहत गांवों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस तरह की और योजनाएं गांवों तक पहुंचेंगी और ग्रामीण जीवन पहले से ज्यादा बेहतर और सुविधाजनक बनेगा।

इसे भी पढ़ें : Instagram पर इश्क, रात का मिलन, मंदिर में शादी और फिर दूल्हा गायब

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