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Home » “पहले बसाओ फिर उजाड़ो” की गूंज, सौंदा डी में अस्तित्व की लड़ाई तेज
झारखंड

“पहले बसाओ फिर उजाड़ो” की गूंज, सौंदा डी में अस्तित्व की लड़ाई तेज

March 30, 2026No Comments4 Mins Read
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सौंदा डी
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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : भुरकुंडा के सौंदा डी पंचायत में रहने वाले लोग अब अपने अस्तित्व को लेकर खुलकर सड़क पर उतर आए हैं। सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण सौंदा डी परियोजना कार्यालय के सामने इकट्ठा हुए और शांतिपूर्ण तरीके से धरना दिया। माहौल पूरी तरह से जनआंदोलन जैसा दिखा, जहां हर किसी के चेहरे पर चिंता और गुस्सा साफ नजर आ रहा था। धरना स्थल पर बार-बार एक ही नारा गूंजता रहा “पहले बसाओ फिर उजाड़ो”। ग्रामीणों का कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए उन्हें हटाने की कोशिश की जा रही है, जो किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है।

सालों से बसे परिवार, अब उजड़ने का डर

ग्रामीणों ने बताया कि वे यहां आज से नहीं, बल्कि 1965 से पहले से रह रहे हैं। कई परिवार ऐसे हैं, जिनके बुजुर्गों ने कोयला कंपनी के विकास में काम किया और अपनी पूरी जिंदगी इसी इलाके में गुजार दी। आज उन्हीं परिवारों के सामने घर छोड़ने का संकट खड़ा हो गया है। लोगों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन पंचायत का अस्तित्व खत्म करने पर तुला हुआ है और लगातार लोगों को हटाने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।

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बिजली-पानी काटकर बनाया जा रहा दबाव

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रबंधन ने दबाव बनाने के लिए मूलभूत सुविधाएं भी बंद कर दी हैं। सौंदा डी की कॉलोनियों में पिछले 19 दिनों से बिजली पूरी तरह से ठप है। शाम होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। गर्मी के मौसम में लोग परेशान हैं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा दिक्कत झेल रहे हैं। पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है। बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि अंधेरे में पढ़ाई करना संभव नहीं है।

तीन मांगों पर अड़े ग्रामीण

धरना के दौरान ग्रामीणों ने अपनी तीन प्रमुख मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा

  • बिजली की समस्या का तुरंत समाधान किया जाए
  • घर खाली कराने के लिए नोटिस बांटना बंद किया जाए
  • खनन और अन्य कार्यों से पहले पंचायत और ग्रामीणों से बातचीत की जाए

ग्रामीणों का कहना है कि बिना उनकी सहमति के कोई भी निर्णय थोपना गलत है। अगर विकास करना है, तो उसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी है।

“हम विकास के खिलाफ नहीं हैं”

धरना में शामिल लोगों ने बार-बार यह बात दोहराई कि वे विकास विरोधी नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर इलाके में खनन या अन्य परियोजनाएं चलती हैं, तो उससे रोजगार और सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। लेकिन यहां हालात उल्टे हैं, जहां लोगों को उनके ही घर से बेदखल किया जा रहा है। ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि अगर उन्हें हटाया जाएगा, तो उनके पुनर्वास की क्या व्यवस्था है। बिना जवाब दिए उन्हें हटाने की कोशिश अस्वीकार्य है।

विधायक रोशन लाल चौधरी का समर्थन

धरना में बड़कागांव के विधायक रोशन लाल चौधरी भी पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के साथ खड़े होने का भरोसा दिया। विधायक ने कहा कि प्रबंधन को तुरंत संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और ग्रामीणों की मांगों पर सकारात्मक कदम उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं काटना अमानवीय है और इसका वे विरोध करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस लड़ाई में वे हर पल ग्रामीणों के साथ रहेंगे।

प्रबंधन को सौंपा गया मांग पत्र

धरना के दौरान विधायक के नेतृत्व में ग्रामीणों ने तीन सूत्री मांग पत्र सौंदा डी कोलियरी प्रबंधन को सौंपा। इसमें बिजली बहाल करने, नोटिस वितरण बंद करने और पंचायत के साथ समन्वय स्थापित करने की मांग शामिल है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रबंधन इस पर क्या कदम उठाता है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

ग्रामीणों ने साफ कहा है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होती है, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो सीसीएल के खनन और कोयला परिवहन को भी बाधित किया जाएगा। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है। धरना में मुखिया उपेंद्र शर्मा, पंसस कुमकुम देवी, डब्लू पांडेय, राकेश सिन्हा, संजय यादव, सुशील कुमार, दीपक सिंह, घनश्याम बैद्य, रंजीत तुरी, संजय भारती, उमेश सिंह, गुरुदयाल ठाकुर, महेश तिवारी, राजाराम सिंह, जयंत तुरी समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे। सौंदा डी में फिलहाल माहौल पूरी तरह से आंदोलनकारी है और लोग अपने हक के लिए एकजुट नजर आ रहे हैं।

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