अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Patna : बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। वे पटना की बांकीपुर सीट से विधायक थे और हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। संवैधानिक प्रावधान के तहत उन्हें विधायक पद छोड़ना जरूरी था, जिसके बाद उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा सौंप दिया।
कैसे पूरी हुई इस्तीफे की प्रक्रिया
नितिन नबीन इस समय असम में चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, इसलिए वे खुद पटना नहीं पहुंच सके। उन्होंने अपना इस्तीफा बिहार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को सौंपा। इसके बाद संजय सरावगी ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को इस्तीफे का पत्र सौंपा। विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए कहा कि आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस तरह अब बांकीपुर सीट आधिकारिक तौर पर खाली हो गई है।
#WATCH पटना, बिहार: बिहार विधान सभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा, “भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सराओगी के माध्यम से बिहार विधानसभा के सदस्य नितिन नवीन जी का इस्तीफा प्राप्त हुआ है। हमने इस्तीफे को मंजूर करके आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया है।” pic.twitter.com/AjeCWn9EUW
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 30, 2026
पांच बार विधायक, लंबा रहा राजनीतिक सफर
नितिन नबीन का बांकीपुर से रिश्ता करीब दो दशकों पुराना है। साल 2006 में अपने पिता स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद उन्होंने उपचुनाव से राजनीति में कदम रखा था। पहली जीत के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगातार पांच बार विधायक चुने जाना उनके राजनीतिक सफर की बड़ी उपलब्धि रही है। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सड़कों, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर सक्रिय भूमिका निभाई।
बांकीपुर और बिहार के मेरे सभी परिवारजन एवं कार्यकर्ता साथी,
जनवरी 2006 में पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने मुझे पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का अवसर दिया और दिनांक 27 अप्रैल 2006 को मैं पहली बार पटना पश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित होकर सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत… pic.twitter.com/IHhLpd0aJD
— Nitin Nabin (@NitinNabin) March 30, 2026
जनता को परिवार बताया, भावुक हुए नितिन नबीन
इस्तीफे के साथ नितिन नबीन ने बांकीपुर की जनता के नाम एक लंबा और भावुक संदेश लिखा। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने क्षेत्र को परिवार की तरह माना और उसी भाव से काम किया। उन्होंने लिखा कि जनता ने न सिर्फ उन्हें समस्याएं बताईं, बल्कि समाधान का रास्ता भी दिखाया। कार्यकर्ताओं को उन्होंने भाई, परिवार और अभिभावक जैसा बताया। उनका कहना है कि यह रिश्ता पद से नहीं, विश्वास से बना है और आगे भी बना रहेगा।
सत्ता और विपक्ष दोनों से सीखने की बात
अपने संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में रहते हुए उन्हें सत्ता और विपक्ष दोनों के वरिष्ठ नेताओं से सीखने का मौका मिला। उन्होंने सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह जनता की आवाज उठाने की कोशिश की। उनका कहना है कि कई फैसले उन्होंने कार्यकर्ताओं और आम लोगों के सुझाव से ही लिए, जिससे काम करने में मजबूती मिली।
पीएम मोदी और नीतीश कुमार का जताया आभार
नितिन नबीन ने अपने राजनीतिक सफर में मिले अवसरों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मंत्री रहते हुए उन्हें कई योजनाओं को जमीन पर उतारने का मौका मिला, जो उनके लिए सीखने और काम करने का बड़ा अनुभव रहा।
अब राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ेगा दायरा
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अब नितिन नबीन का राजनीतिक दायरा और बड़ा हो गया है। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएंगे। पार्टी के अंदर संगठनात्मक जिम्मेदारी और संसद में भूमिका, दोनों ही अब उनके सामने होंगी। माना जा रहा है कि आने वाले समय में वे राष्ट्रीय राजनीति में और मजबूत पकड़ बनाएंगे।
नियम क्या कहता है
संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ राज्यसभा और विधानसभा दोनों का सदस्य नहीं रह सकता। अगर कोई विधायक राज्यसभा के लिए चुना जाता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर अपनी विधानसभा सदस्यता छोड़नी होती है। इसी नियम के तहत नितिन नबीन ने समय रहते इस्तीफा देकर प्रक्रिया पूरी की।
आगे की राह और बांकीपुर की राजनीति
नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद अब बांकीपुर सीट पर उपचुनाव की संभावना बनेगी। यह सीट बीजेपी के लिए काफी अहम मानी जाती है, ऐसे में पार्टी यहां मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी करेगी। वहीं, नितिन नबीन ने साफ किया है कि भले ही वे विधानसभा से बाहर हो गए हों, लेकिन उनका जुड़ाव बांकीपुर और बिहार की जनता से बना रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नई भूमिका में भी वे राज्य के विकास के लिए काम करते रहेंगे।
विकसित भारत और बिहार का लक्ष्य
अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत और विकसित बिहार के लक्ष्य को पूरा करना ही उनकी प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जनता का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और उसी के सहारे वे आगे की जिम्मेदारियां निभाएंगे।
इसे भी पढ़ें : बजरंगबली की भक्ति में दो रोज डूबेगा पटना, अक्षरा-अनुपमा बढ़ाएंगी रौनक



