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Home » जेल में बंद नक्सलियों का ‘थिंक टैंक’ खत्म, रिम्स में तोड़ा दम
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जेल में बंद नक्सलियों का ‘थिंक टैंक’ खत्म, रिम्स में तोड़ा दम

April 3, 2026No Comments4 Mins Read
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Ranchi : प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ ‘किशन दा’ का शुक्रवार को रांची के रिम्स अस्पताल में निधन हो गया। वह सरायकेला जेल में बंद था। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए रिम्स में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। प्रशांत बोस की मौत की खबर के बाद झारखंड समेत कई राज्यों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुलिस प्रशासन ने भी जेल और अस्पताल के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है।

सुबह सांस लेने में हुई दिक्कत, फिर रिम्स ले जाया गया

जेल प्रशासन के मुताबिक शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे प्रशांत बोस को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। हालत बिगड़ती देख आनन-फानन में उसे कड़ी सुरक्षा के बीच रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) पहुंचाया गया। रिम्स में डॉक्टरों की विशेष टीम ने इलाज शुरू किया, लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। सुबह करीब 10 बजे डॉक्टरों ने उसकी मौत की पुष्टि कर दी।

मजिस्ट्रेट की नियुक्ति, पोस्टमार्टम की तैयारी

मामले को संवेदनशील मानते हुए जेल और अस्पताल प्रशासन ने मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कर दी है। प्रशासन का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। पोस्टमार्टम के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

माओवादी संगठन में दूसरा सबसे बड़ा चेहरा माना जाता था

प्रशांत बोस को माओवादी संगठन में महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। वह संगठन की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो का अहम सदस्य था। इसके अलावा वह ‘ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो’ का सचिव भी रहा। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, संगठन के रणनीतिक फैसलों में उसकी बड़ी भूमिका होती थी। नक्सली हलकों में उसे ‘किशन दा’ के नाम से जाना जाता था।

पश्चिम बंगाल का रहने वाला था, कई नामों से था मशहूर

मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला प्रशांत बोस नक्सली गलियारों में ‘मनीष’ और ‘बूढ़ा’ नाम से भी जाना जाता था। वह करीब चार दशकों तक नक्सली गतिविधियों में सक्रिय रहा और उसे संगठन का थिंक टैंक माना जाता था।

2021 में पत्नी के साथ गिरफ्तार हुआ था

प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा टोल ब्रिज के पास गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय उसके साथ उसकी पत्नी शीला मरांडी भी मौजूद थी। उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में बंद था।

200 से ज्यादा नक्सली घटनाओं का आरोप

सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि प्रशांत बोस झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में 200 से ज्यादा नक्सली घटनाओं का मास्टरमाइंड रहा। उसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज थे और वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर था।

उम्र और बीमारी ने तोड़ दिया, जेल में ही बिगड़ी हालत

प्रशांत बोस की उम्र 75 वर्ष बताई जा रही है, हालांकि कई रिपोर्टों में उसकी उम्र 80 साल से ज्यादा भी कही गई है। जेल में बंद रहने के दौरान वह उम्र से जुड़ी कई बीमारियों से परेशान था। बताया जा रहा है कि उसकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी और इलाज भी चल रहा था।

मौत के बाद झारखंड में सुरक्षा बढ़ाई गई

प्रशांत बोस की मौत के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। आशंका जताई जा रही है कि संगठन की ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया या गतिविधि हो सकती है। इसी को देखते हुए कई इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। फिलहाल प्रशासन पोस्टमार्टम के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटा हुआ है।

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