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Patna : बिहार केसरी विवेकानंद सिंह उर्फ विवेका पहलवान की पहली पुण्यतिथि के मौके पर नदावां गांव में आयोजित होने वाले विराट अंतरराष्ट्रीय कुश्ती महादंगल की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गांव में कई दशक बाद पारंपरिक कुश्ती की दोबारा शुरुआत हो रही है, जिससे पूरे इलाके में खासा उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन स्थल को पूरी तरह सजाया गया है और बाहर से आने वाले पहलवानों व दर्शकों के लिए रहने-खाने की पुख्ता व्यवस्था की गई है।
विधायक अनंत सिंह खुद लेते रहे तैयारियों का जायजा
इस महादंगल को लेकर ‘छोटे सरकार’ यानी मोकामा के विधायक अनंत सिंह लगातार तैयारियों की निगरानी करते रहे। गांव में लगभग दो कट्ठा जमीन में भव्य अखाड़ा तैयार किया गया है। नदावां गांव के प्रवेश द्वार पर ही पार्किंग की सुविधा बनाई गई है, ताकि आने वाले लोगों को कोई परेशानी न हो। गांव के मुख्य गेट से अंदर आते ही कार्यक्रम स्थल को तैयार किया गया है। वहीं, दूर से आने वाले लोगों के लिए अनंत सिंह के घर के पास खाने की खास व्यवस्था की गई है।
तीन देशों के पहलवान दिखाएंगे दम
इस बार का महादंगल सिर्फ बिहार या भारत तक सीमित नहीं है। आयोजकों के अनुसार इसमें भारत समेत तीन देशों के पहलवान हिस्सा लेने आ रहे हैं। ईरान से हामिद, इरफान और जलाल जैसे नामी पहलवान पहुंच रहे हैं। वहीं, जॉर्जिया से टेड्डू पहलवान भी इस अखाड़े में उतरेंगे। इसके अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और महाराष्ट्र के कई चर्चित पहलवान भी अपनी ताकत दिखाने के लिए नदावां पहुंचेंगे। पहलवानों के रहने और खाने की भी पूरी व्यवस्था कर दी गई है।
विवेका पहलवान की दिनचर्या थी लोगों के लिए मिसाल
विवेका पहलवान की जिंदगी और मेहनत आज भी लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है। अरविंद पहलवान ने बताया कि विवेका पहलवान की दिनचर्या बेहद सख्त और अनुशासन वाली थी। उन्होंने बताया कि विवेका पहलवान रात 8 बजे भोजन कर सो जाते थे और सोते वक्त अपने पास 5 से 6 लीटर दूध रखते थे, जिसे वे रातभर में पीते रहते थे। खाने में वे सिर्फ दो रोटी खाते थे, लेकिन आधा से एक किलो सब्जी जरूर लेते थे।
8 हजार दंड-बैठक और 10 किलोमीटर दौड़ थी रोज की आदत
अरविंद पहलवान के मुताबिक विवेका पहलवान की कसरत भी किसी अजूबे से कम नहीं थी। वे एक बार में 8 हजार दंड-बैठक और 2 हजार डिप्स लगाते थे। इसके बाद रात में बादाम का हलवा खाते और फिर रोज 10 किलोमीटर दौड़ लगाते थे। दौड़ पूरी करने के बाद अखाड़े में बादाम का शरबत पीकर कुश्ती लड़ते थे।
पारंपरिक तरीके से तैयार हुआ भव्य अखाड़ा
इस महादंगल के लिए अखाड़ा पूरी तरह पारंपरिक तरीके से तैयार किया गया है। करीब दो कट्ठा जमीन में बने अखाड़े में मिट्टी को खास तरीके से तैयार किया गया है। अरविंद पहलवान ने बताया कि अखाड़े में 4 क्विंटल तेल (25 टीन), 1 क्विंटल हल्दी, गुलाब की पंखुड़ी और नीम के पत्ते मिलाए गए हैं।गुलाब की पत्तियां आसपास के ठाकुरबाड़ी और बाजार से लाई गई हैं, जबकि नीम के पत्ते गांव के बगीचे से लाकर मिट्टी में मिलाए गए हैं।
हाईमास्ट लाइट से रात में भी दिखेगा कुश्ती का रोमांच
अखाड़े के चारों ओर हाईमास्ट लाइट लगाई गई है, ताकि रात में भी दंगल देखने में कोई दिक्कत न हो। इसके साथ ही पूरे अखाड़े को घेरकर गेंदा के फूलों से सजाया गया है। गांव में ऐसा नजारा देखकर लोग काफी खुश हैं और हर कोई इस आयोजन को ऐतिहासिक बता रहा है।
स्टेज और वीवीआईपी व्यवस्था भी खास
अखाड़े के सामने एक बड़ा स्टेज तैयार किया गया है। स्टेज तक जाने के लिए अलग रास्ता बनाया गया है ताकि किसी तरह की भीड़भाड़ न हो। वीवीआईपी व्यवस्था को लेकर अरविंद पहलवान ने साफ कहा कि उनके लिए सबसे बड़े अतिथि विधायक अनंत सिंह ही हैं। उन्होंने कहा, “हमारे लिए हमारे विधायक अनंत सिंह ही सब कुछ हैं।”
लाखों लोगों के लिए भव्य भोजन की तैयारी
आयोजन में आने वाले लोगों के लिए खाने-पीने का इंतजाम भी बड़े पैमाने पर किया गया है। गुरुवार शाम को जो लोग पहुंचे उन्हें खीर खिलाई गई। दंगल के दिन सुबह से ही चावल, दाल, सब्जी और दही का भोज शुरू होगा और दंगल खत्म होने तक चलता रहेगा। लक्ष्मण जी ने बताया कि लाखों लोगों के लिए भोजन तैयार किया गया है। इसके लिए करीब 200 क्विंटल चावल मंगवाया गया है।
दूर-दराज से आने वालों के लिए रहने की भी व्यवस्था
दंगल देखने और कुश्ती लड़ने आने वाले लोगों के लिए गांव में ठहरने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा बाढ़ के होटलों में भी कमरे बुक कराए गए हैं। आयोजकों का कहना है कि जो भी लोग आएंगे, उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। उनके लिए पूरी टीम तैयार है।
गांव में लौट रही है कुश्ती की पुरानी रौनक
नदावां गांव में कई सालों बाद फिर से पारंपरिक कुश्ती की शुरुआत हो रही है। गांव के लोग इसे सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और परंपरा की वापसी मान रहे हैं।
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