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Patna : कभी फैसलों की कड़क आवाज से गूंजने वाला सचिवालय आज कुछ अलग था। गलियारों में वही लोग थे, वही फाइलें थीं, वही कामकाज था, लेकिन माहौल बदला हुआ था। वजह थी नीतीश कुमार की विदाई। करीब दो दशक तक बिहार की सत्ता की धुरी रहे नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने जा रहे हैं। राज्यसभा सांसद बनने के बाद लिया गया यह फैसला सिर्फ एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि एक लंबे सफर का भावुक अंत बन गया है।
आखिरी बैठक, लेकिन यादों से भरी
कैबिनेट की आखिरी बैठक खत्म हुई तो किसी को जल्दी नहीं थी उठने की। मंत्रियों की नजरें बार-बार नीतीश कुमार की तरफ जा रही थीं। अधिकारी भी चुपचाप खड़े थे। जैसे सबको एहसास था कि यह रोज जैसा दिन नहीं है। जब ग्रुप फोटो का वक्त आया तो चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन आंखों में नमी साफ दिख रही थी। यह तस्वीर सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि उन सालों की गवाही थी जो साथ में बीते।

“हम 1995 से साथ हैं…”
बैठक के बाद मंत्री लेसी सिंह की बातों में भी वही भाव झलक रहा था। उन्होंने कहा कि वे 1995 से नीतीश कुमार के साथ हैं। उनके लिए यह पल गर्व का भी है और भावुक करने वाला भी। राजनीति में रिश्ते अक्सर औपचारिक माने जाते हैं, लेकिन आज यह धारणा भी थोड़ी बदलती नजर आई।

सचिवालय और सीएम, जैसे एक ही कहानी के दो किरदार
पटना सचिवालय के लिए नीतीश कुमार सिर्फ एक मुख्यमंत्री नहीं थे। धीरे-धीरे वे इस सिस्टम का हिस्सा बन गए थे। अधिकारी उनसे सिर्फ आदेश लेने वाले नहीं रहे, बल्कि एक भरोसेमंद नेतृत्व के साथ काम करने वाले साथी बन गए थे। आज जब वे सचिवालय से बाहर निकले, तो पोर्टिको में खड़े हर शख्स की नजर उन्हीं पर थी। उन्होंने हाथ जोड़कर अभिवादन किया, और शायद यही वह पल था जब सबको लगा कि अब यह रोज का दृश्य नहीं रहेगा।
अब आगे क्या
नीतीश कुमार आज राज्यपाल सैयद अता हसनैन से मिलकर इस्तीफा सौंपेंगे। इसके बाद बिहार में नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। बीजेपी विधायक दल की बैठक होगी, फिर एनडीए विधायक दल की बैठक में नए नेता के नाम पर मुहर लगेगी। अगले मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि राजनीति में आखिरी वक्त तक कुछ भी बदल सकता है, इसलिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा।
एक दौर की विदाई
नीतीश कुमार का यह फैसला बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ है। उन्होंने लंबे समय तक सत्ता संभाली, कई बार गठबंधन बदले, कई फैसलों से सुर्खियां बटोरीं। आज जब वे जा रहे हैं, तो सवाल भी साथ छोड़ रहे हैं और यादें भी। पटना के उस सचिवालय में, जहां हर दिन फैसले लिखे जाते थे, आज एक कहानी खत्म हुई है और यहीं से एक नई कहानी शुरू होने वाली है।
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