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Odisha : ओडिशा के केंदुझार जिला से 27 अप्रैल 2026 को सामने आई एक घटना ने लोगों को अंदर तक हिला दिया। यह मामला 2016 के दाना मांझी कांड की याद दिलाता है, जब एक व्यक्ति को एंबुलेंस न मिलने पर अपनी पत्नी का शव कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ा था। इस बार वजह अलग थी, लेकिन बेबसी उतनी ही गहरी।
क्या है पूरा मामला
केंदुझार जिले के पटना थाना क्षेत्र के दियनाली गांव में रहने वाले जीतू मुंडा की बहन कलारा मुंडा की करीब दो महीने पहले मौत हो गई थी। उसके बैंक खाते में 19,300 रुपये जमा थे।
सोमवार को जीतू मुंडा बैंक पहुंचा और अपनी बहन के खाते से पैसे निकालने की कोशिश की। बैंक कर्मचारियों ने उससे मृत्यु प्रमाण पत्र और नॉमिनी से जुड़े दस्तावेज मांगे।
समस्या यह थी कि जीतू मुंडा अनपढ़ है और उसे इन नियमों की जानकारी नहीं थी। जरूरी कागज उसके पास नहीं थे, इसलिए वह निराश होकर वापस लौट गया।
गुस्से में उठाया चौंकाने वाला कदम
बैंक से लौटने के बाद जीतू सीधे श्मशान घाट पहुंचा। वहां उसने अपनी बहन के दफन अवशेषों को जमीन से बाहर निकाला।
इसके बाद वह उन अवशेषों को कंधे पर रखकर फिर से बैंक पहुंच गया।
यह दृश्य देखकर बैंक में मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
बैंक और पुलिस ने संभाला मामला
घटना की जानकारी मिलते ही बैंक अधिकारियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
पटना थाना प्रभारी किरण प्रसाद साहू मौके पर पहुंचे और जीतू मुंडा को समझाया। काफी समझाने के बाद वह वापस घर चला गया।
बैंक अधिकारियों ने भी इस घटना पर दुख जताया और कहा कि वे उसकी बहन के खाते से पैसे दिलाने की प्रक्रिया में मदद करेंगे।
अधिकारियों ने क्या कहा
ओडिशा ग्रामीण बैंक के जिला प्रबंधक सत्यव्रत नंदा ने बताया कि जीतू मुंडा बैंक आया था, लेकिन वह नियमों को समझ नहीं पाया।
उन्होंने कहा कि बाद में वह अपनी बहन के कंकाल के साथ वापस आया, जिससे स्थिति बिगड़ गई। बैंक ने तुरंत पुलिस को बुलाया और अब मामले की जांच की जा रही है।
शाखा प्रबंधक सुशांत कुमार सेठी के अनुसार, बैंक ने सिर्फ जरूरी दस्तावेज मांगे थे, जो नियमों के तहत जरूरी होते हैं।
वहीं प्रखंड विकास अधिकारी मानस दंडपत ने कहा कि वे इस पूरे मामले की जानकारी ले रहे हैं और समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।
सिस्टम और जागरूकता पर सवाल
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मजबूरी नहीं दिखाती, बल्कि सिस्टम की जटिलता और ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी को भी उजागर करती है।
बैंक के नियम जरूरी होते हैं, लेकिन जब आम आदमी उन्हें समझ ही न पाए, तो ऐसी घटनाएं सामने आती हैं।
यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या नियमों के साथ-साथ लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी नहीं है।



