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Abu Dhabi : अबू धाबी में पीएम नरेंद्र मोदी का शुक्रवार का दौरा भले ही सिर्फ चार घंटे का रहा, लेकिन इस छोटे दौरे में भारत और यूएई के रिश्तों को नई मजबूती देने वाले कई बड़े फैसले हुए। पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में अहम समझौतों पर सहमति बनी। इस दौरे की सबसे खास बात यह रही कि ऐसे समय में ये समझौते हुए हैं जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और वैश्विक ऊर्जा बाजार अनिश्चितता से गुजर रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई चुनौतियों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई थी। ऐसे में यूएई के साथ हुए ये करार भारत के लिए राहत की खबर माने जा रहे हैं।
रक्षा क्षेत्र में बढ़ी साझेदारी
दौरे का सबसे बड़ा और रणनीतिक समझौता रक्षा साझेदारी को लेकर रहा। भारत और यूएई ने एक नए रक्षा सहयोग फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सिर्फ सैन्य अभ्यासों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देश अब आधुनिक रक्षा तकनीकों के संयुक्त विकास पर भी काम करेंगे। समझौते में रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन, खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंध और मजबूत होंगे।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी राहत
ऊर्जा के मोर्चे पर भी भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। दोनों देशों ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को लेकर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका मतलब यह है कि भविष्य में अगर तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तब भी भारत के पास पर्याप्त भंडार रहेगा। यूएई की सरकारी तेल कंपनी Abu Dhabi National Oil Company पहले से भारत के भूमिगत तेल भंडारों में तेल जमा करती रही है। अब इस सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। इससे भारत को स्थिर आपूर्ति मिलेगी और यूएई को अपने बढ़े हुए तेल उत्पादन के लिए भरोसेमंद बाजार मिलेगा।
إن الصداقة بين الهند والإمارات قوية للغاية! وستواصل بلداننا العمل معاً بهدف بناء مستقبل أفضل لكوكبنا.@MohamedBinZayed pic.twitter.com/2IGiZCeBUY
— Narendra Modi (@narendramodi) May 15, 2026
LPG सप्लाई पर भी लंबा समझौता
भारत की घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एलपीजी आपूर्ति पर भी अहम समझौता हुआ है। Indian Oil Corporation और ADNOC के बीच हुए इस करार के तहत भारत को लंबे समय तक प्राथमिकता के आधार पर एलपीजी सप्लाई मिलती रहेगी। बताया जा रहा है कि यूएई से आने वाली यह सप्लाई भारत की करीब 40 प्रतिशत घरेलू एलपीजी जरूरतों को पूरा करती है। ऐसे में यह समझौता आम लोगों के लिए भी काफी अहम माना जा रहा है।
गुजरात के वडिनार में बनेगा जहाज मरम्मत केंद्र
दोनों देशों ने गुजरात के वडिनार में जहाज मरम्मत केंद्र बनाने पर भी सहमति जताई है। इस परियोजना से भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और देश जहाजों की मरम्मत के लिए एक बड़े क्षेत्रीय केंद्र के रूप में उभर सकता है। सरकार का मानना है कि इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और समुद्री कारोबार को गति मिलेगी।
भारत में लगेंगे 8 AI सुपर कंप्यूटर
तकनीक के क्षेत्र में भी यूएई ने बड़ा ऐलान किया है। यूएई की टेक कंपनी G42 भारत में आठ एक्साफ्लॉप्स क्षमता वाले AI सुपरकंप्यूटर स्थापित करेगी। इस परियोजना में मोहम्मद बिन जायद यूनिवर्सिटी ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भारत के C-DAC की साझेदारी होगी। ये सुपरकंप्यूटर भारत में ही होस्ट किए जाएंगे और भारतीय नियमों के तहत काम करेंगे। इससे बड़े AI मॉडल्स की ट्रेनिंग और रिसर्च में तेजी आएगी। भारतीय रिसर्चर्स और डेवलपर्स देश की जरूरतों के हिसाब से AI तकनीक विकसित कर सकेंगे।
पांच अरब डॉलर के निवेश का ऐलान
यूएई ने भारत में पांच अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा भी की है। यह पैसा भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, बैंकिंग सेक्टर और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में लगाया जाएगा। इस निवेश से भारत में विकास परियोजनाओं को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। साथ ही वित्तीय संस्थानों की क्षमता भी बढ़ेगी। पीएम मोदी का यह छोटा दौरा साफ संकेत देता है कि भारत और यूएई के रिश्ते अब सिर्फ तेल और व्यापार तक सीमित नहीं रह गए हैं। दोनों देश रक्षा, टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्त जैसे अहम क्षेत्रों में भी तेजी से साथ काम कर रहे हैं।
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