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Patna : भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को पटना में आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम में कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज जो लोग संविधान बचाने की बात करते हैं, उन्हें पहले अपने इतिहास को देखना चाहिए। नड्डा ने कहा कि इंदिरा गांधी के पोते और पोती संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, लेकिन उन्हें संविधान के प्रावधानों की सही जानकारी तक नहीं है।उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को संविधान की किताब हाथ में लेने से पहले अपनी दादी इंदिरा गांधी द्वारा किए गए संविधान विरोधी कार्यों के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
आपातकाल को बताया लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला
जेपी नड्डा ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उनके अनुसार उस समय नागरिक अधिकारों को कुचल दिया गया था और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर चोट पहुंचाई गई थी।उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 42वां संविधान संशोधन लाकर जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल पांच साल से बढ़ाकर छह साल कर दिया था। साथ ही कई संवैधानिक पदों को न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर रखने की कोशिश भी की गई थी।
इंदिरा गांधी के पोते और पोती संविधान की पुस्तक लेकर घूमते फिरते हैं, उन्हें संविधान का एक प्रावधान भी नहीं पता है।
संविधान की पुस्तक उठाने से पहले राहुल गांधी को अपनी दादी के संविधान विरोधी कृत्यों पर देश की जनता से माफ़ी माँगनी चाहिए।#SamvidhanHatyaDiwas pic.twitter.com/HKRdwfwt8I
— Jagat Prakash Nadda (@JPNadda) June 25, 2026
बिहार की धरती से शुरू हुई लोकतंत्र बचाने की लड़ाई
नड्डा ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जो बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ, उसकी मजबूत पृष्ठभूमि बिहार में बनी थी। इसलिए ‘संविधान हत्या दिवस’ के मौके पर पटना में कार्यक्रम आयोजित करने का विशेष महत्व है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ उठी आवाज ने पूरे देश को झकझोर दिया था और बिहार इस संघर्ष का केंद्र बना था।
गांधी मैदान और संपूर्ण क्रांति आंदोलन को किया याद
अपने संबोधन में नड्डा ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण को याद करते हुए कहा कि पटना का गांधी मैदान देश के लोकतांत्रिक इतिहास का महत्वपूर्ण गवाह है। इसी मैदान में 5 जून 1974 को जयप्रकाश नारायण ने ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया था।उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में वह स्वयं इस आंदोलन का हिस्सा रहे थे और उस दौर की कई घटनाओं के प्रत्यक्ष गवाह हैं। उनके अनुसार 18 मार्च 1974 और 5 जून 1974 की घटनाओं ने उस जनआंदोलन को मजबूत आधार दिया, जिसने बाद में आपातकाल के खिलाफ देशव्यापी संघर्ष का रूप लिया।
कुछ दिनों के लिए पटना आए थे जयप्रकाश नारायण जी, मैं पटना कॉलेज और रवि शंकर प्रसाद जी पटना यूनिवर्सिटी के छात्र थे। जब जयप्रकाश नारायण जी दरभंगा हाउस के काली मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आए, तो हमने छात्रों को एकत्रित कर नारे लगाए “लोकनायक जयप्रकाश आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं।”… pic.twitter.com/LQtCufCT8l
— Jagat Prakash Nadda (@JPNadda) June 25, 2026
नसबंदी, गिरफ्तारी और प्रेस पर प्रतिबंध का किया जिक्र
जेपी नड्डा ने दावा किया कि आपातकाल के दौरान करीब 1.31 लाख लोगों को बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के जेल भेज दिया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय बड़े पैमाने पर नसबंदी अभियान चलाया गया और लगभग 1.10 करोड़ लोगों की नसबंदी कराई गई। इनमें से करीब 80 लाख मामले 1975-76 के दौरान हुए थे।उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में लगभग डेढ़ लाख मकानों को तोड़ा गया, जिससे करीब सात लाख लोग बेघर हो गए। इसके अलावा 300 से अधिक पत्रकारों को जेल में बंद किया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी रोक लगा दी गई थी।
आपातकाल के दौरान 42 वाँ संवैधानिक संशोधन लेकर आए और चुने हुए प्रतिनिधि का कार्यकाल 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष किया गया। सत्ता में रहे तो ये क़ानून बनाया कि कोर्ट इनपर कार्रवाई नहीं कर सकता था। कांग्रेस ने सरेआम प्रजातंत्र का गला घोंटने का काम किया।#SamvidhanHatyaDiwas pic.twitter.com/R6aMYAZMlN
— Jagat Prakash Nadda (@JPNadda) June 25, 2026
नई पीढ़ी को इतिहास जानना जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन ने लोकतंत्र पर हुए इस हमले का मजबूती से जवाब दिया था। उन्होंने जेपी आंदोलन के सभी सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाने का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को उस दौर की सच्चाई से परिचित कराना है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा तभी संभव है, जब लोग अपने इतिहास को याद रखें और संविधान तथा नागरिक अधिकारों के प्रति सजग रहें।


