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Home » एक विमान हादसा, दो अधूरी कहानियां और 25 सालों से SBI की रगों में दौड़ती ‘जिंदगी’
बिहार

एक विमान हादसा, दो अधूरी कहानियां और 25 सालों से SBI की रगों में दौड़ती ‘जिंदगी’

July 18, 2026No Comments4 Mins Read
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Patna : कुछ तारीखें कैलेंडर पर सिर्फ एक नंबर नहीं होतीं, वे इतिहास के पन्नों पर एक गहरा जख्म बनकर दर्ज हो जाती हैं। SBI यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन के लिए 17 जुलाई साल 2000 की वो सुबह कुछ ऐसी ही थी। पटना में हुए एक दर्दनाक विमान हादसे ने एसोसिएशन के दो सबसे मजबूत स्तंभों तत्कालीन महासचिव एचएस राठौर और तत्कालीन अध्यक्ष डॉ केसी मिश्रा को हमेशा के लिए छीन लिया था।

उस दिन दफ्तरों में सन्नाटा था, सहकर्मियों की आंखें नम थीं और हर दिल में एक गहरी टीस थी। लेकिन एसोसिएशन ने तय किया कि वे इस दुख को सिर्फ आंसुओं में बहने नहीं देंगे। उन्होंने अपने नेताओं को श्रद्धांजलि देने का एक ऐसा मानवीय रास्ता चुना, जो आज 26 साल बाद भी दूसरों की रगों में जिंदगी बनकर दौड़ रहा है।

17 जुलाई 2026 को इस परंपरा ने अपने 25 साल पूरे कर लिए। एसोसिएशन की ओर से आयोजित सिल्वर जुबली (25वें) ब्लड डोनेशन कैंप में बैंक अधिकारियों ने मिलकर कुल 211 यूनिट खून दान किया। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन दो दिवंगत पितातुल्य लीडर्स के प्रति बैंक परिवार का वो प्यार है, जो आज भी कम नहीं हुआ है।

सूई चुभने का डर गायब था, चेहरे पर थी मुस्कान

शुक्रवार की सुबह जब पटना के स्थानीय प्रधान कार्यालय की कैंटीन में शिविर शुरू हुआ, तो माहौल बेहद भावुक और ऊर्जा से भरा था। अमूमन सूई के नाम से हिचकने वाले युवा अधिकारी भी वहां मुस्कुराते हुए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। एक सीनियर अधिकारी ने भावुक होते हुए कहा, “हम हर साल इस तारीख का इंतजार करते हैं। राठौर साहब और मिश्रा जी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब हमारा दिया हुआ खून किसी मरते हुए इंसान को जिंदगी देगा, तो उनकी आत्मा को जरूर सुकून मिलेगा।”

यह जज्बा सिर्फ पटना तक सीमित नहीं रहा। देखते ही देखते यह मुहिम बिहार और झारखंड के पांच अलग-अलग शहरों में फैल गई। पटना के साथ-साथ गयाजी, रांची, भागलपुर और पूर्णिया के आंचलिक कार्यालयों में भी बैंक कर्मियों ने बढ़-चढ़कर रक्तदान किया।

यादों के दीये और नम आंखें

इस खास मानवीय मुहिम की शुरुआत CGM यानी मुख्य महाप्रबंधक अनुराग जोशी, पूर्व महासचिव अजीत कुमार मिश्रा, महाप्रबंधक (दक्षिण बिहार) योगेंद्र शेल्के, महाप्रबंधक (उत्तर बिहार) विजय कुमार शामल, एसोसिएशन के महासचिव अमरेश विक्रमादित्य, अध्यक्ष रंजन कुमार सिंह और सेवा के महासचिव लक्ष्मी नारायण पासवान ने मिलकर दीप जलाकर की।

जब वर्तमान महासचिव अमरेश विक्रमादित्य ने माइक संभाला और 26 साल पुराने उस हादसे की यादें साझा कीं, तो हॉल में मौजूद कई पुराने कर्मियों की आंखें डबडबा गईं। उन्होंने बताया कि ‘मां ब्लड सेंटर’ और ‘प्रथमा ब्लड सेंटर’ के सहयोग से शुरू हुआ यह सिलसिला आज बैंक की संस्कृति का हिस्सा बन चुका है।

“आपका एक फैसला, तीन परिवारों का चिराग बचा सकता है”

समारोह में पहुंचे मुख्य महाप्रबंधक अनुराग जोशी भी इस मानवीय प्रयास को देखकर खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा, “दुनिया में सबसे बड़ा दर्द किसी अपने को खोना है, और सबसे बड़ा पुण्य किसी अनजान की जान बचाना है। जब आप एक यूनिट खून देते हैं, तो अस्पताल के बेड पर जिंदगी की जंग लड़ रहे तीन अलग-अलग लोगों को नया जीवन मिलता है। एसोसिएशन का यह प्रयास इस बात का सबूत है कि हम सिर्फ बैंक नहीं, एक परिवार हैं।”

समाज से लेने का नहीं, समाज को देने का रिश्ता

SBI के कर्मचारी सिर्फ पैसों का हिसाब-किताब नहीं रखते, बल्कि सामाजिक सरोकार का खाता भी हमेशा मेंटेन रखते हैं। अभी पिछले महीने 16 जून को ही बैंक प्रबंधन की ओर से भी एक बड़ा ब्लड डोनेशन कैंप लगाया गया था। उसके ठीक एक महीने बाद ऑफिसर्स एसोसिएशन के इस प्रयास ने साबित कर दिया कि जब बात समाज की सेवा की आती है, तो एसबीआई का हर कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए सबसे आगे खड़ा मिलता है। 26 साल पुराना वो विमान हादसा भले ही एक त्रासदी था, लेकिन उससे उपजा यह मानवीय प्रयास आज हजारों चेहरों पर मुस्कान बिखेर रहा है।

इसे भी पढ़ें : सोशल मीडिया पर गुंडई करने वालों की पुलिस ने निकाली हेकड़ी, ADG क्या बोलीं… देखें वीडियो

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