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Patna : कानून और अदालत का नाम सुनते ही दिमाग में लंबी तारीखें, वकीलों की दलीलें और कचहरी के चक्कर काटने की तस्वीरें घूमने लगती हैं। लेकिन सोचिए, अगर किसी मामले की सुनवाई के लिए न तो गवाह को कोर्ट जाना पड़े, न डॉक्टर को रिपोर्ट देने के लिए अपना काम छोड़ना पड़े और न ही कैदी को भारी सुरक्षा के बीच जेल से अदालत तक लाया जाए? बिहार अब इसी हाईटेक और आसान व्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। राज्य में ‘न्यायश्रुति’ प्रणाली यानी डिजिटल पेशी और वर्चुअल कोर्ट व्यवस्था को पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। हाल ही में इसके पायलट ट्रायल को मिली बड़ी सफलता के बाद अब इसे राज्य के कोने-कोने तक पहुंचाने का खाका तैयार हो गया है।
सचिवालय से जमीनी स्तर तक की तैयारी
इस व्यवस्था को पूरे राज्य में लागू करने के लिए गृह विभाग के सचिव कुंदन कुमार की अध्यक्षता में एक हाईलेवल समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में पुलिस, जेल प्रशासन, न्यायपालिका, स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग के बड़े अधिकारी एक साथ बैठे। मकसद सिर्फ एक था कि जब यह डिजिटल व्यवस्था शुरू हो, तो तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर कहीं कोई अड़चन न आए। अदालती कार्यवाही को पूरी तरह ऑनलाइन और सुरक्षित रूप से जोड़ने वाले इस नेटवर्क के लिए सभी विभागों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियां तय की हैं।
हर सेंटर पर होगी खास जगह और मदद के लिए कोऑर्डिनेटर
इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आम लोगों और व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों, दोनों की सहूलियत को ध्यान में रखकर बनाई गई है। राज्य के सभी थानों, सरकारी अस्पतालों, जिलाधिकारी (DM) दफ्तरों और बाल सुधार गृहों (ऑब्जर्वेशन होम) में न्यायश्रुति के लिए एक अलग और शांत स्थान (Designated Place) तय किया जाएगा। इतना ही नहीं, हर केंद्र पर एक कोऑर्डिनेटर की तैनाती भी होगी। इस कोऑर्डिनेटर का काम यह देखना होगा कि जब जज साहब स्क्रीन पर हों, तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सही से चले, आवाज साफ आए और गवाही या दस्तावेज दर्ज कराने में कोई तकनीकी रुकावट न आए।

तकनीकी खामियों को दूर करने का सख्त निर्देश
प्रणाली को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए एनआईसी (NIC), टीसीएस (TCS) और राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (SCRB) की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। गृह सचिव ने निर्देश दिया है कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) से जुड़े जितने भी तकनीकी काम बाकी हैं, उन्हें तुरंत निपटाया जाए। इसके साथ ही पटना हाईकोर्ट के स्तर पर भी जो प्रक्रियाएं बची हैं, उन्हें जल्द पूरा करने का अनुरोध किया गया है ताकि समय-सीमा के भीतर यह पूरी परियोजना जमीन पर उतर सके।
राष्ट्रीय स्तर पर बिहार ने बनाई अपनी पहचान
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने एक खुशखबरी भी साझा की। पायलट ट्रायल की सफलता के बदौलत बिहार अब देश के उन गिने-चुने राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जो न्यायश्रुति सिस्टम का इस्तेमाल कर राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। अब इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य के सभी जिलों में पूरी क्षमता के साथ लागू किया जा रहा है।
अभियोजन निदेशक के हाथ कमान
व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के लिए अभियोजन निदेशक सुधांशु कुमार चौबे को नोडल अधिकारी बनाया गया है। उनके नेतृत्व में एक स्पेशल मॉनिटरिंग टीम काम करेगी, जिसमें पुलिस, जेल और समाज कल्याण विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह टीम हर हफ्ते या महीने परियोजना की प्रगति और आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों का जायजा लेगी।
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