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Patna : कभी ट्रेनिंग के लिए बैग बांधकर दूसरे राज्यों का रुख करने वाली बिहार की बेटियों के लिए आज यानी 23 जुलाई का दिन एक नया सवेरा लेकर आया। अब अपनी ही माटी पर हुनर की नई इबारत लिखी जाएगी। बिहटा के सिकंदरपुर में जब ‘राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (महिला)’ के स्थायी परिसर का शिलान्यास हुआ, तो यह सिर्फ एक सरकारी इमारत की नींव नहीं थी, बल्कि राज्य की लाखों बेटियों के आत्मनिर्भर बनने के सपनों की पहली ईंट थी। खराब मौसम की वजह से भले ही सीएम सम्राट चौधरी सीधे आयोजन स्थल पर न पहुंच सके हों, लेकिन ‘संकल्प’ सभागार से जब उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रिमोट का बटन दबाया, तो डिजिटल स्क्रीन के पार बैठी छात्राओं की आंखों में एक नई चमक साफ तैर रही थी।

मुफ्त जमीन पर 100 करोड़ का निवेश, विदेशों में भी चमकेंगी बेटियां
बिहटा के सिकंदरपुर की जिस चार एकड़ जमीन पर कल तक सन्नाटा पसरा रहता था, वहां अब 99.97 करोड़ की लागत से एक शानदार और आधुनिक परिसर आकार लेने जा रहा है। इसके लिए बिहार सरकार ने पूरी जमीन मुफ्त में दी है। लेकिन कहानी सिर्फ एक भवन तक सीमित नहीं है। कार्यक्रम के दौरान जब बिहार सरकार और केंद्र के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के बीच SIIC यानी स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के समझौते पर हस्ताक्षर हुए, तो मानो युवाओं के लिए दुनिया के दरवाजे खुल गए। अब बिहार के बेटियों और युवाओं को ऐसे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर तैयार किया जाएगा कि वे सिर्फ पटना या दिल्ली में ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार भी अपने हुनर का डंका बजा सकेंगे।

नौकरी मांगने वाली नहीं, दूसरों को रोजगार देने वाली बनेंगी बेटियां
सभागार में गूंजती अपनी आवाज में सीएम सम्राट चौधरी ने जब बेटियों के भविष्य का खाका खींचा, तो उसमें एक मजबूत विश्वास झलक रहा था। उन्होंने साफ कहा कि कौशल विकास का असली मतलब सिर्फ हाथों में नौकरी का लिफाफा थमाना नहीं है, बल्कि युवाओं को इतना सक्षम बनाना है कि वे खुद मालिक बनें और दूसरे लोगों को रोजगार दे सकें। मुख्यमंत्री के इन शब्दों ने वहां मौजूद हर चेहरे पर एक नया भरोसा भर दिया कि 2047 के विकसित भारत के सपने की मजबूत इमारत इन्हीं स्किल्ड हाथों के दम पर खड़ी होगी।

महज 10 रुपये में इंजीनियरिंग, 5 रुपये में पॉलिटेक्निक और सीख रहे जापानी-जर्मन
बिहार के इस बदलते मंजर की कहानी आंकड़ों में भी बखूबी दिखती है। राज्य में आज करीब 1,500 कौशल प्रशिक्षण केंद्र रात-दिन युवाओं के भविष्य को तराशने में जुटे हैं। 12 लाख से ज्यादा युवा यहां से ट्रेनिंग लेकर निकल चुके हैं और पौने दो लाख के करीब अभी हुनर सीख रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि आर्थिक तंगी अब पढ़ाई में रोड़ा नहीं बनती। बिहार के 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिर्फ 10 रुपये और 46 पॉलिटेक्निक संस्थानों में महज 5 रुपये की फीस में उच्च स्तर की पढ़ाई मिल रही है। इतना ही नहीं, कॉलेजों की ‘लैंग्वेज लैब’ में बैठकर गांव-देहात से आने वाले बच्चे अब बेझिझक जापानी, जर्मन और फ्रेंच जैसी भाषाएं फर्राटेदार बोल रहे हैं।
उम्मीदों की नई भोर और एक साझा संकल्प
समारोह के दौरान जब केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी का संदेश सुनाया गया और बिहटा में बनने वाले इस परिसर पर एक छोटी सी डॉक्यूमेंट्री फिल्म चली, तो सभागार तालियों से गूंज उठा। राज्य के युवा और रोजगार मंत्री अरुण शंकर प्रसाद, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत समेत केंद्र और राज्य सरकार के दर्जनों आला अधिकारी इस बात के गवाह बने कि कैसे बिहार अपनी पुरानी सोच को पीछे छोड़कर हुनरमंद भविष्य की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है। बिहटा की यह चार एकड़ जमीन जल्द ही एक ऐसी प्रयोगशाला बनेगी, जहां से तैयार होकर निकलने वाली बिहार की बेटियां देश और दुनिया को अपनी काबिलियत से हैरान करेंगी।
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