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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के बीच तालमेल बनाकर देश के विकास में योगदान देने का संकल्प। शिक्षा को सिर्फ नौकरी पाने का जरिया नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाने पर जोर। यह बात रविवार को रामगढ़ के राधा गोविंद विश्वविद्यालय में आयोजित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, झारखंड प्रांत के एक दिवसीय प्रांतीय कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग में सामने आई।
विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में न्यास से जुड़े प्रांतीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता जुटे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पार्चन और सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद अलग-अलग सत्रों में भारतीय शिक्षा पद्धति, नई शिक्षा नीति, संगठन विस्तार और सामाजिक दायित्वों पर चर्चा की गई।

शिक्षा का मकसद सिर्फ डिग्री और नौकरी नहीं
उद्घाटन सत्र में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की राष्ट्रीय सह-सचिव डॉ. सविता सेंगर, क्षेत्रीय संयोजक डॉ. विजय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. पीयूष रंजन, कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि, कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल और प्रांत संयोजक महेंद्र कुमार सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस दौरान अतिथियों का अंगवस्त्र और पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय प्रसाद सिंह ने किया।
वक्ताओं ने कहा कि भारतीय शिक्षा परंपरा में पढ़ाई का मतलब केवल परीक्षा पास करना या नौकरी हासिल करना नहीं रहा है। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति के भीतर ज्ञान के साथ संस्कार, जिम्मेदारी और समाज के प्रति संवेदनशीलता पैदा करना भी है। आज के दौर में शिक्षा व्यवस्था को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने की जरूरत है।
भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का हो मेल
प्रांत संयोजक महेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए ऐसी शिक्षा जरूरी है, जो बच्चों और युवाओं को आधुनिक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार करने के साथ अपनी संस्कृति और मूल्यों से भी जोड़े।
कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि ने युवाओं से सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों को जीवन में उतारने की अपील की। उन्होंने नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवा अगर सही दिशा में आगे बढ़ें तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
राष्ट्रीय सह-सचिव डॉ. सविता सेंगर ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के पूरे व्यक्तित्व का निर्माण करती है। यह केवल रोजगार पाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने का काम भी करती है। उन्होंने नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

संगठन को गांव और समाज तक पहुंचाने पर जोर
अभ्यास वर्ग के दूसरे सत्र में क्षेत्रीय संयोजक डॉ. विजय कुमार सिंह ने संगठन के विस्तार और कार्यप्रणाली पर कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने संगठन को और मजबूत बनाने, कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने और समाज के अधिक से अधिक लोगों तक भारतीय शिक्षा और संस्कृति से जुड़े विचारों को पहुंचाने की बात कही।
तीसरे सत्र में प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. पीयूष रंजन ने आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा रखी। उन्होंने आने वाले समय में होने वाली गतिविधियों और कार्यक्रमों को लेकर कार्यकर्ताओं की भूमिका पर चर्चा की। चौथे सत्र में संगठन के विभिन्न दायित्वों की घोषणा की गई और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
पंच परिवर्तन से समाज में बदलाव का संदेश
समापन सत्र में राष्ट्रीय सह-संयोजक, तकनीकी शिक्षा, डॉ. रंजीत प्रसाद ने पंच परिवर्तन के संदेश को सामने रखा। उन्होंने कहा कि देश और समाज को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा और संस्कार के साथ सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति पर भी ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव केवल बड़े-बड़े भाषणों से नहीं आएगा। इसके लिए हर व्यक्ति को अपने जीवन और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना होगा। शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी को साथ लेकर ही मजबूत और विकसित समाज बनाया जा सकता है।
राष्ट्रगान और शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में डॉ. राघव माधव झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इसके बाद राष्ट्रगान और शांति मंत्र के साथ अभ्यास वर्ग का समापन हुआ।
इस अवसर पर प्रो. अनिल कुमार केसरी, डॉ. संजय प्रभाकर, डॉ. वसुंधरा देव, सरोज सारंगी, डॉ. तारा शंकर अग्रवाल, डॉ. मनोज कुमार देव, सुनील यादव, बी.एन. प्रसाद, डॉ. संतोष कुमार सिंह, खेमलाल महतो, डॉ. धर्मराज कुमार, डॉ. ललिता राणा, डॉ. ब्रजकिशोर विश्वकर्मा, डॉ. शंकर प्रसाद स्वर्णकार, अमरनाथ सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रांतीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।
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