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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : पतरातू इलाके में एक परिवार के लिए शुक्रवार की सुबह जिंदगीभर का गम छोड़ गई। रोज की तरह घर से ड्यूटी के लिए निकले एक कर्मी को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि यह सफर उनका आखिरी सफर साबित होगा। PVUNL अस्पताल के पास तेज रफ्तार कोयला लदी हाइवा ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर ही उनकी मौत हो गई। हादसे की खबर फैलते ही इलाके में मातम पसर गया, जबकि गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई।
मृतक की पहचान गया छूरा के रूप में हुई है। वह ओडिशा के टिकालागढ़ा का रहने वाला था और पतरातू स्थित आईसीएच में कार्यरत था। शुक्रवार सुबह वह पैदल पीवीयूएनएल की ओर ड्यूटी पर जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तभी कोयला लदी एक हाइवा तेज रफ्तार में वहां से गुजरी और गया छूरा को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भयावह था कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही उनकी मौके पर मौत हो चुकी थी। सड़क पर चीख-पुकार मच गई और कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जुट गए।
लोगों का फूटा गुस्सा, सड़क पर बैठ गए ग्रामीण
घटना के बाद स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने सड़क जाम कर दिया और भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार पर सवाल उठाए। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि इस सड़क से हर दिन सैकड़ों कोयला लदी हाइवा गुजरती हैं। कई बार हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। ग्रामीणों ने मांग की कि दोषी चालक को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। साथ ही इस मार्ग पर स्पीड लिमिट का सख्ती से पालन कराया जाए, नियमित जांच हो और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी ट्रैफिक व्यवस्था लागू की जाए।
पुलिस पहुंची, काफी मशक्कत के बाद खुला जाम
हादसे की सूचना मिलते ही पतरातू थानेदार शिवलाल कुमार गुप्ता पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने लोगों से बातचीत की और काफी देर तक समझाने के बाद सड़क जाम खत्म कराया। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रामगढ़ सदर अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। हाइवा और उसके चालक के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हर हादसे के बाद उठते हैं सवाल, लेकिन…
पीवीयूएनएल और आसपास का इलाका कोयला परिवहन का बड़ा मार्ग माना जाता है। यहां दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना और ट्रैफिक व्यवस्था की कमी के कारण इस सड़क पर हादसे आम हो गए हैं। लोगों का कहना है कि हर बड़े हादसे के बाद कुछ दिनों तक कार्रवाई की बात होती है, लेकिन हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। इस बार भी ग्रामीणों ने साफ कहा कि अगर प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो ऐसे हादसे आगे भी लोगों की जान लेते रहेंगे।
एक परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
गया छूरा की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार और परिचितों में मातम छा गया। जो व्यक्ति सुबह अपने काम पर निकला था, वह कभी घर वापस नहीं लौट सका। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सड़क पर दौड़ रहे भारी वाहनों की रफ्तार पर लगाम कब लगेगी और कब लोगों का सफर सुरक्षित हो सकेगा।
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