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Uttar Pradesh : सावन के पावन महीने में भगवान शिव के प्रति आस्था दिखाने के लिए लोग अलग-अलग तरह से कांवड़ यात्रा करते हैं। कोई नंगे पांव चलता है, कोई कठिन व्रत रखता है तो कोई अनोखे तरीके से अपनी श्रद्धा व्यक्त करता है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के जट्टारी क्षेत्र के गांव छजूपुर निवासी 25 वर्षीय नरेंद्र चौधरी उर्फ टिकना इन दिनों अपनी अनोखी कांवड़ यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। वह दांतों से कार खींचते हुए हरिद्वार से अपने गांव तक की यात्रा कर रहे हैं। उनकी इस अनोखी यात्रा को देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ जुट रही है और सोशल मीडिया पर भी उनके वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
हरिद्वार से शुरू हुई अनोखी यात्रा
नरेंद्र चौधरी ने बताया कि उन्होंने 10 जुलाई को हरिद्वार से अपनी कांवड़ यात्रा शुरू की थी। कार पर भगवान शिव की प्रतिमा के साथ 11 लीटर गंगाजल रखा गया है। कार और प्रतिमा सहित कुल वजन करीब 10 क्विंटल बताया जा रहा है। नरेंद्र का लक्ष्य 10 अगस्त तक अपने गांव पहुंचना है। इसके बाद सावन के दूसरे सोमवार को गांव के प्राचीन अंडारेश्वर महादेव मंदिर में 11 लीटर गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। बृहस्पतिवार शाम तक वह जेवर हवाई अड्डे को पार कर चुके थे और लगातार आगे बढ़ रहे हैं। रास्ते में लोग उनकी हौसला अफजाई कर रहे हैं। कई श्रद्धालु उनके साथ फोटो और वीडियो भी बना रहे हैं।
गांव के साथी भी निभा रहे हैं साथ
इस यात्रा में नरेंद्र अकेले नहीं हैं। उनके साथ गांव के हरिओम शर्मा, मोना बाबा, शंकर दादा, जगत जाट और कालू भी कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। ये सभी अपने कंधों पर 41 लीटर गंगाजल लेकर चल रहे हैं। पूरी टोली एक साथ शिव भक्ति में लीन होकर अपने गांव की ओर बढ़ रही है। रास्ते में जहां भी यह जत्था पहुंचता है, वहां लोग उनका स्वागत कर रहे हैं और उनकी अनोखी यात्रा को देखने के लिए रुक जाते हैं।
आठ महीने की तैयारी के बाद किया बड़ा संकल्प
नरेंद्र ने बताया कि करीब आठ महीने पहले उन्होंने दांतों से वजन खींचने का अभ्यास शुरू किया था। शुरुआत 50 किलो चीनी की बोरी खींचने से की। धीरे-धीरे उन्होंने अपना अभ्यास बढ़ाया और दावा किया कि बाद में ट्रैक्टर, ट्रक और एक साथ छह वाहनों तक को दांतों से खींच चुके हैं। उन्होंने बताया कि मई महीने में भी वह अपने गांव से वृंदावन तक दांतों से कार खींचकर पहुंचे थे, जहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए थे। पिता के निधन के बाद वह अपने परिवार की पैतृक खेती संभाल रहे हैं। नरेंद्र का कहना है कि उनकी इस यात्रा का उद्देश्य भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करना है। साथ ही वह गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने और भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग को भी लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं। उनकी यह अनोखी कांवड़ यात्रा इन दिनों श्रद्धालुओं और राहगीरों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
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