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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : गांव की गलियों में अक्सर बिजली का खंभा या ट्रांसफॉर्मर खराब होता है, तो पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। लोग घंटों बिजली मिस्त्री का इंतजार करते हैं। लेकिन अब पतरातू और आसपास के गाँवों की तस्वीर बदलने वाली है। इन्हीं गांवों के 20 साधारण से लड़के अब पेचकस और प्लास थामकर ट्रांसफॉर्मर की हर गड़बड़ी ठीक करने में माहिर हो चुके हैं।
PVUNL यानी पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और जमशेदपुर स्थित JNTVTI के साझा प्रयास से इन युवाओं को 4 महीने की खास आवासीय ट्रेनिंग दी गई। ‘ट्रांसफॉर्मर रिपेयर एवं मेंटेनेंस’ के इस कोर्स को पूरा कर शनिवार को जब ये युवा बाहर निकले, तो उनके चेहरे पर सिर्फ एक सर्टिफिकेट पाने की खुशी नहीं थी, बल्कि अपने दम पर कुछ कर दिखाने का पक्का यकीन भी था।
जेब से नहीं लगा एक भी पैसा, उल्टे हर महीने मिले 9 हजार रुपये
अक्सर देखा जाता है कि गांव के युवा किसी अच्छे टेक्निकल कोर्स में सिर्फ इसलिए दाखिला नहीं ले पाते क्योंकि उनके पास फीस के पैसे नहीं होते। लेकिन इस पहल ने युवाओं की इस सबसे बड़ी चिंता को दूर कर दिया। PVUNL ने न सिर्फ इन 20 युवाओं की 4 महीने की पढ़ाई, रहने और खाने का पूरा खर्च उठाया, बल्कि उनकी जेब खर्च के लिए हर महीने 9000 का स्टाइपेंड भी दिया। 4 महीने तक चले इस ट्रेनिंग सेशन में युवाओं को किताबों से ज्यादा मशीनों के साथ पसीना बहाना सिखाया गया। ट्रांसफॉर्मर की कमियों को पहचानना, उसकी ऑयलिंग, वायरिंग और मेंटेनेंस की बारीकियों को उन्होंने इतने करीब से सीखा कि अब वे किसी भी चुनौती से निपटने को तैयार हैं।
“हुनर सीखा है, तो ईमानदारी से काम करो”… सीईओ ने बढ़ाया हौसला
ट्रेनिंग के समापन पर एक सादगी भरा लेकिन बेहद खास कार्यक्रम आयोजित हुआ। PVUNL के सीईओ अशोक कुमार सहगल ने खुद सभी युवाओं को ट्रेनिंग पूरी होने के सर्टिफिकेट सौंपे। युवाओं के चेहरे पर नई उम्मीदें देखते हुए सीईओ सहगल ने कहा, “आज आपने जो हुनर सीखा है, वह सिर्फ एक कागजी पढ़ाई नहीं है। इसे अपनी जिंदगी में ईमानदारी, अनुशासन और लगन के साथ उतारिए। यह ट्रेनिंग आपके लिए नौकरी और खुद के काम के रास्ते तो खोलेगी ही, साथ ही झारखंड के बिजली ढांचे को भी एक नई मजबूती देगी।”

झारखंड के बिजली तंत्र को मिलेगा स्थानीय हुनरमंदों का साथ
गांव-देहात में अक्सर बिजली सप्लाई में रुकावट की बड़ी वजह यह होती है कि समय पर कुशल कारीगर नहीं मिलते। PVUNL का यह ‘कम्युनिटी डेवलपमेंट’ (CD) कार्यक्रम झारखंड सरकार के इसी गैप को भरने के विजन का हिस्सा है। सोच यह है कि जब स्थानीय स्तर पर ही युवाओं को हुनरमंद बना दिया जाएगा, तो बिजली सप्लाई की छोटी-मोटी समस्याओं को ठीक करने में हफ्तों का वक्त नहीं लगेगा। इससे गाँव के लड़कों को घर के पास ही काम मिल जाएगा और राज्य के बिजली तंत्र को मजबूत कारीगर।
दिग्गजों ने थपथपाई युवाओं की पीठ, आगे भी जारी रहेगा सिलसिला
इस भावुक और प्रेरणादायक मौके पर कॉर्पोरेट जगत के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। टाटा स्टील की चीफ लर्निंग एंड डेवलपमेंट जया सिंह पांडा, PVUNL के एचआर हेड ज़ियाउर रहमान, कोठामासु सुरेश, अमर दयाल सिंह और संतोष कुमार सिंह जैसे अधिकारियों ने युवाओं से हाथ मिलाकर उनका हौसला बढ़ाया। PVUNL प्रबंधन ने साफ किया है कि यह तो बस शुरुआत है। गांव-देहात के और भी युवाओं के सपनों को उड़ान देने के लिए आने वाले दिनों में ऐसे कई और रोजगारपरक ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे। फिलहाल, पतरातू के ये 20 ‘ट्रांसफॉर्मर एक्सपर्ट’ अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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