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Patna : मानसून की पहली दस्तक के साथ ही दानापुर दियारा के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो जाती थीं। वजह साफ थी… जैसे ही गंगा का जलस्तर चढ़ता, जून के मध्य में पीपा पुल उखाड़ लिया जाता। इसके बाद अगले छह महीनों तक दियारा की लगभग 66 हजार आबादी के लिए जिंदगी मानो थम सी जाती थी। उफनती लहरों के बीच छोटी-छोटी लकड़ी की नावों पर जान हथेली पर रखकर सफर करना उनकी मजबूरी बन चुका था। लेकिन इस बार का मानसून दियारा के लोगों के लिए एक नई उम्मीद और राहत की बयार लेकर आया है। मंगलवार को जब सीएम सम्राट चौधरी ने दानापुर के नासरीगंज घाट से पानापुर के बीच निःशुल्क स्टीमर फेरी सेवा की शुरुआत की, तो गंगा के दोनों छोर पर बसे लोगों के चेहरों पर बरसों पुरानी तकलीफ के खत्म होने की खुशी साफ झलक रही थी।
लहरों पर सफर और जनता का दर्द… खुद जायजा लेने पहुंचे सीएम सम्राट
केवल फीता काटने और हरी झंडी दिखाने तक बात सीमित नहीं रही। सीएम सम्राट चौधरी खुद स्टीमर में सवार हुए और पानापुर घाट तक का सफर तय किया। बीच गंगा में जब हवाओं के झोंके और लहरों के थपेड़े स्टीमर से टकरा रहे थे, तब वे वहां मौजूद आम मुसाफिरों, बुजुर्गों और महिलाओं के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुन रहे थे।
एक स्थानीय बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे बाबू, मानसून आते ही हमनी के नाव पर चढ़े में कलेजा धक-धक करे लागल हल। अब ई बड़ा स्टीमर आ गइला से कम से कम जान के डर तो खत्म हो गइल।” मुख्यमंत्री ने भी लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार दियारा के हर नागरिक की सुरक्षा और सहूलियत के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
पीपा पुल हटते ही कट जाता था संपर्क, अब नहीं रुकेगी रफ्तार
दानापुर और दियारा को जोड़ने वाला पीपा पुल हर साल केवल नवंबर से 15 जून तक ही काम करता है। बारिश शुरू होते ही सुरक्षा कारणों से इसे हटाना पड़ता था। इसके बाद दियारा की छह प्रमुख पंचायतों—पुरानी पानापुर, मानस, कासिमचक, हेतनपुर, गंगहारा और पतलापुर के लोगों का मुख्य शहर से संपर्क पूरी तरह कट जाता था या फिर खतरे से भर जाता था। इतना ही नहीं, आपातस्थिति में किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाना हो या रात-बिरात दियारा से शहर आना हो, सब कुछ भगवान भरोसे होता था। अब इस बड़ी और सुरक्षित स्टीमर सेवा से लोगों को मानसून के महीनों में भी आवागमन का एक पक्का, नियमित और सबसे बड़ी बात—बिल्कुल मुफ्त जरिया मिल गया है।
खेत से मंडी तक की दूरी हुई आसान: किसानों और कारोबारियों की चमकेगी किस्मत
दियारा क्षेत्र को पटना और आसपास के इलाकों के लिए ‘हरी सब्जियों और दूध की लाइफलाइन’ माना जाता है। यहां के खेतों में लहलहाती सब्जियां और पशुपालकों का दूध जब तक शहर की मंडियों तक न पहुंचे, तब तक उनकी मेहनत का सही मोल नहीं मिलता।
पहले नावों के इंतजार में घंटों सब्जियां घाट पर ही सड़ जाती थीं या वक्त पर मंडी न पहुंचने के कारण किसानों को औने-पौने दाम में बेचना पड़ता था। अब फ्री स्टीमर शुरू होने से तड़के सुबह ही किसान अपनी ताजा उपज और दुग्ध उत्पाद सुरक्षित और बिना किसी किराए के पटना के बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि परिवहन खर्च शून्य होने से उनकी जेब में चार पैसे ज्यादा आएंगे।
58 स्कूल, 553 मास्टर साहब और दियारा का भविष्य
गंगा पार दियारा क्षेत्र में 58 सरकारी स्कूल चलते हैं, जिनमें 553 शिक्षक और कर्मचारी तैनात हैं। इसके अलावा 95 आंगनबाड़ी केंद्र और 3 स्वास्थ्य उपकेंद्र भी हैं। मानसून में नावों की अनिश्चितता के कारण अक्सर शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों को कार्यस्थल तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ती थी, जिससे बच्चों की पढ़ाई और मरीजों का इलाज प्रभावित होता था।
अब नियमित फेरी सेवा चालू होने से मास्टर साहब समय पर क्लास पहुंच सकेंगे और एएनएम बहनें वक्त पर आंगनबाड़ी केंद्रों तक। इससे दियारा के सरकारी तंत्र की सुस्ती भी दूर होगी और विकास का पहिया तेजी से घूमेगा।
जल परिवहन बनेगा दियारा की नई पहचान
कार्यक्रम के दौरान पटना के डीएम कुंदन कुमार ने पूरी योजना का खाका सामने रखा, वहीं सरकार का भी मानना है कि गंगा पर जल परिवहन को मजबूत करना राज्य की भावी प्राथमिकताओं में से एक है।
इस मौके पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, एमएलसी अनामिका सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। घाट पर जुटी ढोल-नगाड़ों की थाप और स्थानीय लोगों की तालियां इस बात की गवाह थीं कि गंगा पार का यह सफर अब सिर्फ आसान नहीं हुआ है, बल्कि दियारा की पूरी आबोहवा बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होने वाला है।
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