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Pakur (Jaydev Kumar) : सच्ची समाज सेवा कभी अपना ढिंढोरा नहीं पीटती, वह चुपचाप अपना काम करती है और उसका शोर एक दिन पूरी दुनिया सुनती है। पाकुड़ के समाजसेवी लुत्फुल हक की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। सालों से जरूरतमंदों के आंसू पोंछने और इंसानी खिदमत में जुटे हक साहब जब ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में आयोजित ‘जागरण अचीवर्स अवार्ड’ के मंच पर पहुंचे, तो उन्होंने न सिर्फ पाकुड़ बल्कि पूरे झारखंड का मान सात समंदर पार बढ़ा दिया। यह उस निस्वार्थ लगन का जश्न था, जिसने एक छोटे से जिले की मिट्टी की महक को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा दिया। जब उन्हें “Excellence in Social Impact” और “Social Impact Icon” की ट्रॉफी सौंपी गई, तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
यह सफर एक दिन में तय नहीं हुआ। पाकुड़ की गलियों और दूर-दराज के गांवों में सालों से बिना किसी शोर-शराबे के लोगों की मदद में जुटे लुत्फ़ल हक के लिए यह सम्मान उनके उसी निस्वार्थ समर्पण का जवाब है। किसी गरीब की मदद करनी हो, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई हाथ बंटाना हो या मानवीय संवेदना से जुड़ा कोई काम, वे हमेशा आगे खड़े नजर आते हैं। जब सिडनी के अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनके काम की झलक दिखाई गई, तो वहां मौजूद हर शख्स इस बात को मान गया कि सच्चा काम हमेशा अपनी पहचान खुद बना लेता है।
सालों की मेहनत और एक अंतरराष्ट्रीय मुकाम
समारोह की शाम बेहद खास थी, जहां भारत और विदेश के नामचीन उद्योगपति, उद्यमी और दिग्गज हस्तियां एक छत के नीचे मौजूद थीं। न्यू साउथ वेल्स के ग्रुप जनरल मैनेजर फिल हेड्स और भारतीय मूल के सीनियर बिजनेस एनालिस्ट एस जानकी रमन ने मुख्य अतिथि के रूप में लुत्फ़ल हक को यह सम्मान सौंपा। मंच से बोलते हुए अतिथियों ने कहा कि जो लोग अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के लिए कुछ करते हैं, असल मायने में वही दुनिया को बदलने की ताकत रखते हैं।
इस पूरे आयोजन को यादगार बनाने में जागरण ग्रुप के उप्रबंधक शैलेन्द्र नाथ जेटली और बिपोय खटवानी की अहम भूमिका रही। आयोजकों का मानना था कि इस अवॉर्ड का असली उद्देश्य उन दीपकों को दुनिया के सामने लाना है, जो अपनी रोशनी से दूसरों का जीवन रोशन कर रहे हैं।
पाकुड़ में आज हर जुबान पर लुत्फुल हक का नाम है। इस अंतरराष्ट्रीय पहचान ने न केवल पाकुड़ बल्कि पूरे झारखंड का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। यह कहानी सिर्फ एक अवॉर्ड की नहीं है, बल्कि इस बात की गवाही है कि अगर नीयत साफ हो और काम में ईमानदारी हो, तो झारखंड की मिट्टी की महक सात समंदर पार भी अपनी छाप छोड़ सकती है।
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