Close Menu
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Facebook X (Twitter) Instagram
Saturday, 30 May, 2026 • 10:31 pm
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • AdSense Policy
  • Terms and Conditions
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo
News SamvadNews Samvad
  • HOME
  • INDIA
  • WORLD
  • JHARKHAND
    • RANCHI
  • BIHAR
  • UP
  • SPORTS
  • HOROSCOPE
  • CAREER
  • HEALTH
  • MORE…
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Home » जहां रोज होती है भूख से जंग, वहां उम्मीद की थाली लेकर पहुंचे लुत्फुल हक
झारखंड

जहां रोज होती है भूख से जंग, वहां उम्मीद की थाली लेकर पहुंचे लुत्फुल हक

May 30, 2026No Comments4 Mins Read
Share Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Follow Us
Google News Flipboard Facebook X (Twitter)
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Telegram WhatsApp Email
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now

अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

Pakur (Jaydev Kumar) : ईद का दिन था। शहर में लोग नए कपड़े पहनकर एक-दूसरे को गले लगा रहे थे, घरों में तरह-तरह के पकवान बन रहे थे और खुशियों का माहौल था। लेकिन इसी उत्सव के बीच पाकुड़ रेलवे स्टेशन परिसर में कुछ ऐसे लोग भी थे, जिनके लिए त्योहार और आम दिनों में शायद ही कोई फर्क पड़ता हो। किसी के पास अपना घर नहीं था, कोई मजदूरी की तलाश में भटक रहा था, तो कोई दिनभर की थकान के बाद स्टेशन के किसी कोने में रात गुजारने की तैयारी कर रहा था। शुक्रवार की शाम अचानक इन लोगों के बीच भी ईद की खुशियां पहुंच गईं। पाकुड़ के समाजसेवी लुत्फुल हक स्टेशन परिसर पहुंचे और अपने हाथों से सैकड़ों जरूरतमंद लोगों को भोजन परोसना शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्टेशन का माहौल बदल गया। जहां कुछ देर पहले उदासी और थकान नजर आ रही थी, वहीं अब लोगों के चेहरों पर मुस्कान और संतोष दिखाई दे रहा था।

किसी के लिए खाना, किसी के लिए सम्मान

भोजन की कतार में खड़े कई लोगों के लिए यह सिर्फ खाना नहीं था, बल्कि सम्मान और अपनापन भी था। जब कोई व्यक्ति खुद आपके सामने आकर खाना परोसे और हालचाल पूछे, तो वह एहसास पेट भरने से कहीं ज्यादा बड़ा हो जाता है। स्टेशन परिसर में मौजूद कई जरूरतमंद लोगों ने भोजन ग्रहण करने के बाद खुशी जाहिर की। कुछ लोग चुपचाप खाना खाते रहे, लेकिन उनके चेहरे यह बता रहे थे कि ईद की खुशी आखिरकार उनके हिस्से भी आई है।

तीन साल से जल रही सेवा की यह लौ

लुत्फुल हक का यह प्रयास कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं है। पिछले तीन साल से भी अधिक समय से पाकुड़ रेलवे स्टेशन परिसर में प्रतिदिन रात के समय करीब 300 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। यह सेवा बिना किसी शोर-शराबे और प्रचार के लगातार जारी है। हर रात स्टेशन परिसर में गरीब, बेसहारा, मजदूर और जरूरतमंद लोग भोजन के लिए पहुंचते हैं और पेट भरकर लौटते हैं। समाजसेवा के इस अभियान ने धीरे-धीरे कई लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका है। कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें यह भरोसा रहता है कि रात में उन्हें भूखा नहीं सोना पड़ेगा।

ईद पर खास इंतजाम, खास खुशी

ईद के अवसर पर भोजन में विशेष व्यंजन भी शामिल किए गए थे। लजीज खाने की खुशबू और त्योहार का माहौल लोगों को अलग ही अनुभव दे रहा था। कई बच्चे भी अपने परिजनों के साथ भोजन ग्रहण करने पहुंचे। उनके चेहरे पर दिख रही खुशी शायद इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता थी। किसी ने अतिरिक्त भोजन मांगा, तो किसी ने मुस्कुराकर धन्यवाद कहा। हर तरफ अपनापन और भाईचारे का माहौल दिखाई दे रहा था।

‘गरीबों के बीच आकर दिल को सुकून मिलता है’

लुत्फुल हक कहते हैं कि त्योहारों का असली मतलब खुशियां बांटना है। यदि समाज का कोई वर्ग इन खुशियों से वंचित रह जाए तो त्योहार अधूरा लगता है। उन्होंने कहा कि जब वह जरूरतमंद लोगों के बीच आते हैं और उनके चेहरे पर मुस्कान देखते हैं तो उन्हें आत्मिक शांति मिलती है। यही वजह है कि वह हर बड़े पर्व और त्योहार पर यहां पहुंचने का प्रयास करते हैं। उनके अनुसार, समाज के सक्षम लोगों को आगे आकर जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति भूखा या उपेक्षित महसूस न करे।

‘गरीबों के मसीहा हैं लुत्फल हक’

रेलवे पैसेंजर संगठन से जुड़े युवा सामाजिक कार्यकर्ता राणा ओझा ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब लोग अपनी व्यस्त जिंदगी में उलझे रहते हैं, तब किसी का रोजाना सैकड़ों लोगों के भोजन की जिम्मेदारी उठाना बड़ी बात है। राणा ओझा के अनुसार, स्टेशन परिसर में रोजाना आने वाले कई लोग ऐसे हैं, जिनके पास भोजन की व्यवस्था नहीं होती। ऐसे लोगों के लिए यह सेवा किसी सहारे से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि लुत्फुल हक ने साबित किया है कि समाजसेवा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि लगातार किए जाने वाले कामों से होती है।

इसे भी पढ़ें : 6 उचक्कों के धराते ही एक साथ सॉल्व हो गये कई केस

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Previous Article6 उचक्कों के धराते ही एक साथ सॉल्व हो गये कई केस
Next Article पहले जाम छलकाया, फिर फरसा से काट डाला…

Related Posts

Headlines

झारखंड से निकला आतंक नेटवर्क का तार, ISI और डॉन दाऊद के 8 आतंकी गिरफ्तार

May 30, 2026
Headlines

पहले जाम छलकाया, फिर फरसा से काट डाला…

May 30, 2026
Headlines

6 उचक्कों के धराते ही एक साथ सॉल्व हो गये कई केस

May 30, 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Telegram
  • WhatsApp

Latest Post

झारखंड से निकला आतंक नेटवर्क का तार, ISI और डॉन दाऊद के 8 आतंकी गिरफ्तार

May 30, 2026

पहले जाम छलकाया, फिर फरसा से काट डाला…

May 30, 2026

जहां रोज होती है भूख से जंग, वहां उम्मीद की थाली लेकर पहुंचे लुत्फुल हक

May 30, 2026

6 उचक्कों के धराते ही एक साथ सॉल्व हो गये कई केस

May 30, 2026

गिद्दी सी और रेलिगढ़ा में CBI की दबिश, इन लोगों के ठिकानों पर घंटों चली जांच

May 30, 2026
© 2026 News Samvad. Designed by Forever Infotech.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.