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Palamu : झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का एनकाउंटर में मारे जाने के चार दिन बाद बुधवार को पलामू जिले के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र स्थित उसके पैतृक गांव पथरा में अंतिम संस्कार कर दिया गया। रविवार रात पुलिस कस्टडी में एनकाउंटर के बाद से ही इलाके में तनाव और सुगबुगाहट का माहौल था। मंगलवार दोपहर जैसे ही जामताड़ा से सुजीत का शव उसके गांव पहुंचा, अंतिम दर्शन के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हुसैनाबाद और आसपास के इलाकों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। बुधवार को परिजनों और ग्रामीणों की मौजूदगी में पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ उसकी अंतिम क्रिया संपन्न हुई।
पलामू कोर्ट से मिली 24 घंटे की राहत, पुलिस सुरक्षा में पहुंची रिया
चाईबासा जेल की सलाखों के पीछे बंद सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा को अपने पति की मुखाग्नि और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था। मंगलवार को पलामू सिविल कोर्ट में रिया के अधिवक्ताओं ने पेरोल की याचिका दाखिल की, जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने मानवीय आधार पर 24 घंटे की सशर्त पेरोल मंजूर की। आदेश की कॉपी तुरंत पलामू सेंट्रल जेल के जरिए चाईबासा जेल भेजी गई। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद पुलिस की कड़ी घेराबंदी में रिया को हुसैनाबाद लाया गया।
मासूम बेटे को गले लगाकर बिलख पड़ी पत्नी, गांव में पसरा सन्नाटा
बुधवार सुबह जैसे ही पुलिस की गाड़ी रिया को लेकर पथरा गांव पहुंची, वहां माहौल गमगीन हो गया। गाड़ी से उतरकर जैसे ही रिया ने पति सुजीत का बेजान शव देखा, वह अपना आपा खो बैठी और चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़ी। मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों और रिश्तेदारों ने किसी तरह उसे संभाला। होश में आते ही रिया अपने 12 साल के मासूम बेटे अक्षत सिन्हा को सीने से लगाकर फूट-फूटकर रोने लगी। पेरोल का समय बुधवार शाम को ही खत्म हो रहा है, जिसके बाद पुलिस उसे वापस चाईबासा जेल ले जाएगी।
साहिबगंज से धनबाद शिफ्टिंग के दौरान हुआ था एनकाउंटर
यहां याद दिला दें कि सुजीत सिन्हा को रविवार रात साहिबगंज जेल से धनबाद जेल शिफ्ट किया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में उसने पुलिस कस्टडी से भागने का प्रयास किया, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में पुलिस की गोलियों का शिकार होकर वह मारा गया। सोमवार को जामताड़ा सदर अस्पताल में मेडिकल बोर्ड की निगरानी में उसके शव का पोस्टमार्टम कराया गया और फिर शव परिजनों के सुपुर्द किया गया। सुजीत पिछले करीब 10 सालों से राज्य की अलग-अलग जेलों में बंद था और वहीं से अपना खौफनाक नेटवर्क चला रहा था।
पति के जेल जाते ही संभाली गैंग की कमान, शूटरों से करवाती थी रंगदारी वसूली
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सुजीत के जेल जाने के बाद उसकी पत्नी रिया सिन्हा केवल नाम की पत्नी नहीं रही, बल्कि उसने सुजीत के पूरे आपराधिक साम्राज्य की कमान अपने हाथों में ले ली थी। वह झारखंड के बिजनेसमैन और ठेकेदारों को डराने-धमकाने के लिए नए लड़कों को गैंग में भर्ती करती थी और उन्हें हथियार और शूटर मुहैया कराती थी। रांची और पलामू पुलिस की जांच में यह बात सामने आई थी कि रंगदारी का सारा पैसा रिया के जरिए ही ठिकाने लगाया जाता था। रांची पुलिस ने ठोस सबूतों के आधार पर उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। रिया पर पलामू, रांची, लातेहार और धनबाद समेत कई जिलों में एक दर्जन से ज्यादा संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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