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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : पंजाब रेजिमेंटल सेंटर में मंगलवार का दिन बाकी दिनों से कुछ अलग था। मैदान में सैनिकों की सधी हुई चाल, चेहरे पर गर्व और माहौल में देशभक्ति का जज्बा साफ दिखाई दे रहा था। मौका था पंजाब रेजिमेंट के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट के पद पर नेतृत्व परिवर्तन का। समारोह में निवर्तमान कर्नल लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने रेजिमेंट की बैटन लेफ्टिनेंट जनरल विजय बी. नायर को सौंप दी। इसके साथ ही पंजाब रेजिमेंट की जिम्मेदारी अब नए कर्नल के हाथों में आ गई। बैटन का यह बदलाव देखने में भले ही कुछ मिनटों की औपचारिक प्रक्रिया हो, लेकिन इसके पीछे रेजिमेंट की लंबी परंपरा, गौरव और जिम्मेदारी जुड़ी होती है। एक सैनिक के लिए रेजिमेंट सिर्फ वर्दी और यूनिट का नाम नहीं होती। यह उसकी पहचान, साथियों का भरोसा और देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना से जुड़ी होती है। ऐसे में कर्नल ऑफ द रेजिमेंट की जिम्मेदारी संभालना भी अपने आप में खास महत्व रखता है।
सेनगुप्ता के कार्यकाल में बढ़ी रेजिमेंट की ताकत
लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता के कार्यकाल में पंजाब रेजिमेंट ने प्रशिक्षण और सैन्य क्षमता के क्षेत्र में कई अहम कदम उठाए। उनके नेतृत्व में भैरव बटालियन का गठन हुआ। इसे भारतीय सेना की मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। इसके साथ ही अग्निवीर योजना के तहत बढ़ती प्रशिक्षण जरूरतों को देखते हुए पंजाब रेजिमेंटल सेंटर के बुनियादी ढांचे का भी विस्तार किया गया। अग्निवीरों की संख्या बढ़ने के साथ सेना के प्रशिक्षण केंद्रों पर जिम्मेदारी भी बढ़ी है। ऐसे में प्रशिक्षण सुविधाओं को आधुनिक बनाना समय की जरूरत है। सेनगुप्ता के कार्यकाल में इस दिशा में किए गए कामों ने सेंटर की क्षमता बढ़ाने में भूमिका निभाई।
मंगलवार को जब उन्होंने बैटन लेफ्टिनेंट जनरल विजय बी. नायर को सौंपी तो यह सिर्फ एक सैन्य पद का हस्तांतरण नहीं था। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जिम्मेदारी और परंपरा सौंपने का पल था। बैटन रेजिमेंट के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाती है और यह भी बताती है कि आने वाले समय में उसी अनुशासन और जज्बे के साथ आगे बढ़ना है।
अब नायर के नेतृत्व में नई राह
लेफ्टिनेंट जनरल विजय बी. नायर के सामने अब पंजाब रेजिमेंट की समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ बदलती सैन्य जरूरतों के मुताबिक उसे और मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी। द इन्फैंट्री स्कूल, महू के कमांडेंट के रूप में उनका अनुभव इस भूमिका में अहम माना जा रहा है। समारोह का माहौल भी इसी बदलाव की कहानी कह रहा था। एक ओर निवर्तमान कर्नल को विदाई और उनके कार्यकाल की उपलब्धियों का सम्मान था, तो दूसरी ओर नए कर्नल के स्वागत के साथ भविष्य की उम्मीदें भी थीं। सैनिकों के लिए यह पल इसलिए भी खास रहा क्योंकि रेजिमेंट की पहचान उसकी पुरानी परंपराओं से बनी है, लेकिन उसकी ताकत हर दौर में नए नेतृत्व और नई चुनौतियों के साथ खुद को ढालने में है। पंजाब रेजिमेंट की जिम्मेदारी अब लेफ्टिनेंट जनरल विजय बी. नायर के हाथों में है और उम्मीद यही है कि रेजिमेंट अपने पुराने गौरव को साथ लेकर नई चुनौतियों के लिए उसी मजबूती से तैयार होती रहेगी।
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