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Home » सीएम सम्राट ने 11 लाख नए घरों के संकल्प के साथ 2.35 लाख लोगों में बांटी खुशियां
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सीएम सम्राट ने 11 लाख नए घरों के संकल्प के साथ 2.35 लाख लोगों में बांटी खुशियां

August 20, 2026No Comments6 Mins Read
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Patna : पटना के बापू सभागार के मंच पर जब एक बुजुर्ग महिला के कांपते हाथों में नए मकान की चाबी थमाई गई, तो उनकी आंखों से छलके आंसू उन अनगिनत रातों के सुकून की शुरुआत थी, जो बरसों तक टपकती छत और कच्ची दीवारों के डर में गुजरी थीं। सीएम सम्राट चौधरी ने जब मंच से झुककर उन लाभार्थियों से बात की, तो उनके चेहरे पर एक ऐसा भाव था जो सीधे जनता के दर्द से जुड़ता है। सीएम ने साफ शब्दों में कहा कि एक गरीब के लिए पक्का मकान केवल चार दीवारें नहीं होता, बल्कि यह समाज में सिर उठाकर जीने का स्वाभिमान और आने वाली पीढ़ी के लिए एक सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव है।

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आयोजित इस राज्यस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत राज्य के विकास की एक नई रूपरेखा सामने रखी। उन्होंने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में 2 लाख 35 हजार परिवारों को गृह प्रवेश कराकर उन्हें उनके आशियाने की चाबी सौंपी। इसके साथ ही उन्होंने बिहार के लिए एक ऐतिहासिक लक्ष्य का ऐलान किया, जिसके तहत इस वित्तीय वर्ष में 11 लाख 18 हजार से ज्यादा नए पक्के मकान तैयार किए जाएंगे।

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गरीबों के सम्मान को बनाया अपनी प्राथमिकता

सभागार में मौजूद हजारों लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि आज का दिन पूरे बिहार के लिए गर्व और गौरव का क्षण है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर गहरा जोर दिया कि किसी भी राज्य की तरक्की की असली पहचान बड़ी इमारतों या सड़कों से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि उसके सबसे कमजोर और गरीब परिवार किस हाल में जी रहे हैं।

सीएम सम्राट चौधरी ने आंकड़ों के जरिए अतीत और वर्तमान की तस्वीर को सामने रखा। उन्होंने कहा कि 1986 से लेकर 2014 तक, यानी लगभग तीन दशकों के दौर में तत्कालीन इंदिरा आवास योजना के जरिए बिहार में महज 30 लाख पक्के मकान बन पाए थे। उस समय गरीबों की उम्मीदें टूटती थीं और योजनाओं की फाइलें दफ्तरों में धूल फांकती रहती थीं। लेकिन 2014 से 2026 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के साथ मिलकर बिहार में अकेले 50 लाख पक्के मकानों का आवंटन गरीबों के लिए किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने इस बात को भी रेखांकित किया कि साल 2018 के सर्वे में जो 19 लाख परिवार किसी कारणवश छूट गए थे, उन्हें भी सरकार ने चिन्हित कर पक्की छत का हक दिलाया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस योजना में केंद्र के साथ-साथ बिहार सरकार भी पूरी मजबूती से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है, जहां प्रत्येक आवास के निर्माण में 40 प्रतिशत राशि सीधे राज्य सरकार के खजाने से दी जाती है। 11 लाख से अधिक नए मकानों के लिए केंद्र सरकार की ओर से 13,427 करोड़ रुपये की सहायता राशि का रास्ता साफ होने पर उन्होंने प्रधानमंत्री का दिल से आभार जताया।

लापरवाह अफसरों को सीएम की दो टूक- जनता के काम में देरी बर्दाश्त नहीं

सीएम सम्राट चौधरी ने अपने भाषण में केवल उपलब्धियों की बात नहीं की, बल्कि सरकारी तंत्र को भी सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं कागजों पर चाहे जितनी सुंदर दिखें, उनका असली असर तभी होता है जब वे समय पर आम आदमी तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने ‘सहयोग कार्यक्रम’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह मंच जनता को सीधा न्याय दिलाने और लापरवाह अधिकारियों को सही रास्ते पर लाने का जरिया है।

उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि आम नागरिक के किसी भी आवेदन या शिकायत का समाधान हर हाल में 30 दिनों के भीतर होना चाहिए। जो अधिकारी इसमें लापरवाही करेंगे, उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई तय है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब तक आए 6 लाख 42 हजार से अधिक आवेदनों में से 96 फीसदी का पूरी तरह निपटारा किया जा चुका है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तय समय सीमा का उल्लंघन करने वाले 9,500 अफसरों को पहला नोटिस, 950 को दूसरा और 350 अधिकारियों को तीसरा नोटिस थमाया जा चुका है। मुख्यमंत्री का यह कड़ा रुख यह संदेश देने के लिए काफी था कि गरीबों के हक के बीच कोई भी प्रशासनिक अड़चन बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गांव की महिलाओं की ताकत पर सीएम का भरोसा

मुख्यमंत्री के विजन में गांव की आर्थिक रीढ़ और महिलाओं की आत्मनिर्भरता का मुद्दा सबसे ऊपर नजर आया। उन्होंने राज्य की जीविका दीदियों के अदम्य साहस और मेहनत की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज बिहार में 1 करोड़ 81 लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपने पैरों पर खड़ी हैं और इनमें से 30 लाख से अधिक बहनें ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जिनकी सालाना कमाई एक लाख रुपये से ऊपर है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से सीधे आग्रह किया कि इन जीविका दीदियों के हुनर और उनके बनाए उत्पादों को बड़ा बाजार देने के लिए केंद्र सरकार विशेष अभियान चलाए। उन्होंने मांग रखी कि नालंदा, बक्सर, भागलपुर और मोतिहारी जैसे ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले प्रमुख शहरों में विशेष हाट बाजार बनाए जाएं। इससे जब देश और दुनिया के पर्यटक यहां पहुंचेंगे, तो सीधे तौर पर गांव की महिलाओं के बनाए सामानों को खरीदार मिलेंगे और गांव की आर्थिकी को एक नई उड़ान मिलेगी।

समृद्ध बिहार की बुनियाद हैं मजबूत गांव

सीएम सम्राट चौधरी के पूरे संबोधन का केंद्र बिंदु यही रहा कि बिहार को अगर देश और दुनिया में अग्रणी बनाना है, तो उसकी शुरुआत गांव के हर गरीब के घर से करनी होगी। जब एक झोपड़ी की जगह पक्की छत लेती है, तो उस घर में पलने वाले बच्चों की उम्मीदें बड़ी होती हैं और महिलाओं का जीवन सुरक्षित होता है।

मंच से नीचे उतरते हुए मुख्यमंत्री ने जब लाभार्थियों से हाथ जोड़कर उनका अभिवादन स्वीकार किया, तो यह साफ दिख रहा था कि 11 लाख नए मकानों का यह संकल्प केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि बिहार के ग्रामीण जीवन को पूरी तरह आत्मनिर्भर, सुरक्षित और खुशहाल बनाने की एक ठोस योजना है।

इसे भी पढ़ें : सीएम सम्राट ने कोसी-मेची परियोजना की परखी रफ्तार, दे गये ये हिदायत

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