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Ranchi : सरकारी और कॉरपोरेट दफ्तरों में जनसंपर्क यानी पीआर का मतलब अक्सर प्रेस रिलीज जारी करने, तस्वीरें खिंचवाने और बड़े अफसरों के बयानों को अखबारों तक पहुंचाने तक ही सिमट कर रह जाता है। लेकिन CCL यानी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में इस ढर्रे को तोड़कर काम करने वाले आलोक कुमार गुप्ता को उनकी इसी अलग सोच का बड़ा इनाम मिला है। कोल इंडिया लिमिटेड, कोलकाता ने उन्हें जनरल मैनेजर (जीएम) के पद पर पदोन्नत कर दिया है। जारी सूची में 14 अधिकारियों के नाम शामिल हैं, और आलोक गुप्ता पदोन्नति के बाद भी सीसीएल के कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस विभाग के मुखिया के तौर पर अपनी पारी जारी रखेंगे।
पुराने ढर्रे से हटकर खींची अपनी अलग लकीर
आलोक गुप्ता सिर्फ एक पद संभालने वाले अफसर नहीं हैं, बल्कि वे संचार को जमीन से जोड़ने वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। सीसीएल में आने से पहले वे झारखंड सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। सरकारी तंत्र की बारीकियों से लेकर कॉरपोरेट जगत की प्राथमिकताओं को समझने का उनका यह अनुभव सीसीएल में साफ झलका। उन्होंने सूचनाएं देने के पारंपरिक तरीकों को दरकिनार किया और सीधे लोगों के दिल तक पहुंचने वाले माध्यम चुने। सीसीएल के अपने लोगो की रूपरेखा तैयार करने से लेकर झारखंड की धरती पर पहली बार आयोजित ‘नेशनल पीआर कॉन्क्लेव-2025’ तक, उन्होंने हर काम में अपनी छाप छोड़ी।

दीवारों पर रंग और खनिकों के सम्मान में डाक टिकट
उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि उन्होंने कोयला उद्योग से जुड़े आम मजदूरों और कर्मचारियों को संचार के केंद्र में रखा। भारतीय डाक विभाग के साथ मिलकर कोयला खदानों में पसीना बहाने वाले कर्मियों यानी ‘कोल योद्धाओं’ के सम्मान में विशेष डाक टिकट जारी करवाना ऐसा ही एक भावनात्मक कदम था। इसके अलावा सीसीएल मुख्यालय की बेरंग दीवारों को जीवंत म्यूरल पेंटिंग्स से सजाना, मुख्यालय के भवनों के मुख्य द्वारों पर पट्टिकाएं लगाकर उनका नामकरण करना और सतर्कता जागरूकता को साधारण नारों की जगह रचनात्मक संदेशों में ढालना उनकी सोच का नतीजा था। ‘कबाड़ से कंचन’ और ‘वॉर अगेंस्ट वेस्टेज’ जैसे अभियानों के जरिए उन्होंने यह साबित किया कि संचार का काम केवल संदेश देना नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव लाना भी है।
तकनीक के साथ नए दौर में कदम
बदलते वक्त के साथ उन्होंने कंपनी के संदेशों को सोशल मीडिया और आधुनिक डिजिटल माध्यमों से जोड़ा। खदानों के भीतर की कहानियों और कंपनी के सीएसआर से जुड़े सामाजिक सरोकारों को बेहद सीधी और सहज भाषा में आम जनता तक पहुंचाया। अब जब वे महाप्रबंधक की कुर्सी संभाल चुके हैं, तो सीसीएल के जनसंपर्क विभाग से आने वाले दिनों में और भी नए, अनोखे और जमीन से जुड़े प्रयोगों की उम्मीद की जा रही है।
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