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Home » सत्तू ने बदला चोला… अब कॉरपोरेट हलक को तर करेगा बिहार का देसी ‘एनर्जी ड्रिंक’
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सत्तू ने बदला चोला… अब कॉरपोरेट हलक को तर करेगा बिहार का देसी ‘एनर्जी ड्रिंक’

September 24, 2026No Comments4 Mins Read
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सत्तू
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Pawan Thakur

दफ्तर की भागदौड़ के बीच अमूमन हम सब वेंडिंग मशीन के पास खड़े होकर चाय या कॉफी का इंतजार करते दिख जाते हैं। डिस्पोजल कप में गिरती गर्म चाय की धार शहरी जिंदगी की आदत बन चुकी है। जरा सोचिए, उसी मशीन का एक बटन दबाते ही अगर भुने चने की सौंधी खुशबू के साथ गाढ़ा, ठंडा और नमकीन सत्तू का घोल आपके हाथ में आ जाए, तो कैसा लगेगा? बिहार की पुरानी रसोई और खेतों की पगडंडियों से निकलकर हमारा देसी सत्तू अब कांच के बड़े दफ्तरों और स्टेशनों की ऑटोमैटिक मशीन तक पहुंच गया है। पटना में देश की पहली ‘सत्तू वेंडिंग मशीन’ की शुरुआत हुई है, जो बताती है कि अगर अपनी परंपरा को सही तकनीक का साथ मिल जाए, तो वह सबसे नया और असरदार नुस्खा बन जाती है।

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खेत-खलिहान से निकलकर हाईटेक दौर में पहुंचा सफर

बिहार में सत्तू सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं रहा है, यह यहां के मिजाज और दिनचर्या का हिस्सा है। सुबह-सुबह एक गिलास सत्तू घोलकर पी लिया, तो दोपहर तक न भूख की चिंता और न ही तपती धूप में शरीर के थकने का डर। किसान से लेकर दफ्तर जाने वाले बाबू तक, पीढ़ियों से हम सबने इसे एक भरोसेमंद साथी की तरह देखा है। ऑरिक मिल्स ने इसी भरोसे को पहचानते हुए इस मशीन को डिजाइन किया और इसकी शुरुआत के लिए पटना की जमीन को चुना। मशीन का अनावरण करते हुए राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भी इस बात पर जोर दिया कि सत्तू दुनिया भर में अपनी सेहत को लेकर फिक्रमंद लोगों के लिए बिहार की तरफ से एक नायाब तोहफा है। कभी पोटली में बंधकर चलने वाला यह देसी पाउडर आज ब्रिक्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की आधिकारिक किट का हिस्सा बनकर दुनिया भर के प्रतिनिधियों की मेज तक पहुंच चुका है।

चटपटा, तीखा और मीठा… हर किसी की पसंद का ख्याल

सत्तू के साथ सबसे बड़ी दिक्कत अक्सर इसे तुरंत घोलने और मिलाने की होती थी। कहीं गांठ न पड़ जाए, नमक कम न रह जाए या प्याज-मिर्च का स्वाद सही न आए। इस नई मशीन ने यह झंझट पूरी तरह खत्म कर दिया है। कंपनी के डायरेक्टर विशाल आनंद का कहना है कि वे इस पारंपरिक आहार को वह आधुनिक ढांचा देना चाहते थे, जिसका यह हमेशा से हकदार रहा है। यह मशीन पूरी तरह ऑटोमैटिक है और इसमें बादाम के पोषण के साथ तैयार किए गए तीन अलग-अलग तरह के प्री-मिक्स फ्लेवर जोड़े गए हैं। किसी को दोपहर के वक्त जीरा और नमक वाला चटपटा स्वाद चाहिए, किसी को हरी मिर्च का तीखापन पसंद है, तो किसी को हल्की मिठास के साथ सुकून चाहिए। मशीन में बस अपना पसंदीदा विकल्प चुनना है और चंद पलों में साफ-सुथरे तरीके से घुला हुआ प्रोटीन से लबरेज सत्तू तैयार होकर बाहर आ जाता है।

अब पूरे हिंदुस्तान के हलक को तर करेगा यह देसी स्वाद

पटना से शुरू हुआ यह सफर यहीं रुकने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में मेट्रो स्टेशनों, अस्पतालों, कॉलेजों और भीड़भाड़ वाले चौराहों पर इस मशीन को लगाने की योजना है। बोतल बंद कोल्ड ड्रिंक्स और केमिकल वाले एनर्जी ड्रिंक के दौर में यह मशीन लोगों को एक ऐसा विकल्प देती है, जो न सिर्फ जेब पर भारी नहीं पड़ता बल्कि शरीर को भी नुकसान नहीं पहुंचाता। जब पूरी दुनिया सुपरफूड के नाम पर नए-नए डिब्बाबंद पाउडर तलाश रही है, तब बिहार की यह पहल साबित करती है कि सबसे बेहतरीन ताकत तो हमेशा से हमारी अपनी मिट्टी और पुरानी आदतों में ही मौजूद थी, बस उसे पेश करने का सलीका नया चाहिए था।

इसे भी पढ़ें : सीएम सम्राट बोले- कोसी पर बनेगा नया बैराज, प्रोजेक्ट्स लटकाए तो नपेंगे अफसर

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