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Ranchi : 10 जून 2022 को रांची में निकले जुलूस के दौरान पुलिस के साथ हुई झड़प और पथराव के मामले में अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। डेली मार्केट थाना कांड संख्या 16/2022 में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी-24 रांची की अदालत ने गुरुवार को मो. उस्मान उर्फ करण, मो. तवारू उर्फ तबरेज कुरैशी, मो. सरफराज आलम, मो. साबिर अंसारी और मो. अफसर को दो-दो साल की साधारण कैद की सजा सुनाई। अदालत ने अलग-अलग धाराओं में प्रत्येक दोषी पर जुर्माना भी लगाया है। फैसला न्यायिक दंडाधिकारी रित्विका सिंह की अदालत ने सुनाया।
अदालत ने पांचों को आईपीसी की धारा 147, 353/149, 504/149 और 120बी के तहत दोषी माना। वहीं धारा 148 और 341/149 के आरोप साबित नहीं होने पर इन धाराओं में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। दोष सिद्ध होने के बाद पांचों के जमानत बांड रद्द कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
बिना अनुमति निकला था जुलूस, पुलिस ने की थी रोकने की कोशिश
कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक 10 जून 2022 को पुलिस को सूचना मिली थी कि करीब 8 से 10 हजार लोगों की भीड़ बिना अनुमति जुलूस के रूप में एकरा मस्जिद से फिरायालाल की ओर बढ़ रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जुलूस को रोकने की कोशिश की। पुलिस का कहना था कि जुलूस की अनुमति नहीं ली गई थी और इससे कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी।
अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिसकर्मियों और अन्य गवाहों ने घटना को लेकर अपने बयान दर्ज कराए। अभियोजन के अनुसार पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए जुलूस में शामिल लोगों से वापस लौटने की अपील की थी, लेकिन भीड़ आगे बढ़ती रही। इसके बाद पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और पथराव की स्थिति बनी।
मामले की सुनवाई के दौरान एक पुलिसकर्मी ने अदालत में बताया कि जुलूस को रोकने की कोशिश के दौरान पुलिस पर पथराव किया गया। उसके बयान के मुताबिक इस घटना में पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। कोर्ट रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि पथराव के दौरान एक पुलिसकर्मी के घायल होने की बात सामने आई थी।
10 गवाहों के बयान के बाद अदालत ने सुनाया फैसला
मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाह पेश किए। इनमें नरेश कुमार, केस के सूचक सुमित कुमार भगत, अवधेश ठाकुर, कृष्ण कुमार मेहता, चित्रंजन गगन, पंकज कुमार महतो, वेंकटेश कुमार और विनय कुमार सिंह शामिल थे। दो गवाहों को अदालत ने होस्टाइल माना। बचाव पक्ष की ओर से कोई गवाह पेश नहीं किया गया।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मामले के जांच अधिकारी की गवाही नहीं हुई है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जुलूस शांतिपूर्ण था और आरोपियों को राजनीतिक दबाव में मामले में फंसाया गया। दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने कहा कि गवाहों के बयान से आरोप साबित होते हैं और आरोपियों की घटना में मौजूदगी भी सामने आई है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद माना कि पांचों आरोपियों के खिलाफ धारा 147, 353/149, 504/149 और 120बी के आरोप साबित होते हैं। अदालत के मुताबिक गवाहों ने आरोपियों की पहचान की थी और उनकी मौजूदगी को लेकर बचाव पक्ष की ओर से ठोस विवाद नहीं किया गया।
हालांकि अदालत ने यह भी माना कि धारा 148 और 341/149 के आरोप पर्याप्त साक्ष्य से साबित नहीं हुए। इसलिए इन दोनों धाराओं में पांचों आरोपियों को बरी कर दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर सका कि भीड़ के पास किस तरह के घातक हथियार थे।
सभी सजाएं एक साथ चलेंगी
अदालत ने पांचों दोषियों को धारा 147 के तहत दो साल की साधारण कैद और 3 हजार रुपए जुर्माना, धारा 353/149 के तहत दो साल की कैद और 3 हजार रुपए जुर्माना तथा धारा 504/149 के तहत भी दो साल की कैद और 3 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा धारा 120बी के तहत छह महीने की साधारण कैद और 1 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया है।
अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त 30 दिन की साधारण कैद भुगतनी होगी। फैसले में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने पहले जितनी अवधि जेल में बिताई है, उसका कानून के अनुसार सजा में समायोजन किया जाएगा।
फैसला सुनाए जाने के बाद पांचों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया। मामले में एफआईआर 10 जून 2022 को दर्ज हुई थी, जबकि चार्जशीट 30 सितंबर 2022 को दाखिल की गई थी। मामले में गवाही की प्रक्रिया मार्च 2023 में शुरू हुई और अभियोजन पक्ष की गवाही जुलाई 2026 में पूरी हुई। अदालत ने 24 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया।
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