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Patna : सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को अब सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक और कंप्यूटर शिक्षा से पूरी तरह जोड़ा जाएगा। सीएम सम्राट चौधरी ने शनिवार को दानापुर के राजकीय मध्य विद्यालय रामजीचक, बाटागंज में आयोजित अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (पीटीएम-2026) में भाग लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सीधे विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों से बातचीत की। उन्होंने विद्यालय में मिलने वाली सुविधाओं, पढ़ाई के माहौल, बच्चों की उपस्थिति और हालिया परीक्षा परिणामों का जायजा लिया। सीएम ने साफ कहा कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को निजी विद्यालयों से भी बेहतर बनाना है ताकि हर तबके के बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

सातवीं-आठवीं से ही बनती है करियर की मजबूत नींव
छात्र-छात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सभी बच्चे मन लगाकर पढ़ाई करें और स्कूल में नियमित उपस्थिति दर्ज कराएं। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे पढ़ाई में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने का बड़ा लक्ष्य तय करें और उसके लिए लगातार मेहनत करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सातवीं और आठवीं कक्षा का समय विद्यार्थियों के जीवन का बेहद अहम पड़ाव होता है। यहीं से उनके आने वाले करियर की मजबूत नींव तैयार होती है। इन वर्षों में की गई कड़ी मेहनत और अनुशासन ही आगे चलकर भविष्य को संवारने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अगर नींव मजबूत होगी तो आगे किसी भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल करना आसान हो जाएगा।

मोबाइल के फिजूल इस्तेमाल से बचें, कोचिंग पर निर्भरता घटाएं
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को तकनीक के सही इस्तेमाल की सीख दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मोबाइल फोन का अनावश्यक और ज्यादा उपयोग बच्चों का ध्यान भटकाता है। विद्यार्थी केवल अपनी पढ़ाई और जरूरी जानकारी हासिल करने के लिए ही इसका सदुपयोग करें। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को रोज स्कूल का होमवर्क पूरा करने और पाठ्यक्रम का निरंतर अभ्यास करने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक जो भी पढ़ाते हैं, उसे क्लास के भीतर ही अच्छी तरह समझें। अगर विद्यार्थी स्कूल में पूरा ध्यान लगाएंगे तो उन्हें अलग से कोचिंग जाने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कोचिंग का सहारा केवल बहुत विशेष परिस्थितियों में ही लिया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूल में आयोजित राज्यव्यापी प्रतियोगिता ‘मेरे सपनों का भारत-सेवा चित्र’ के तहत बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स और प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग प्रदर्शनी का बारीकी से अवलोकन किया। छात्र-छात्राओं ने ‘विकसित भारत-2047’, सोलर एनर्जी, मेट्रो ट्रेन और रोबोट जैसे विषयों पर सुंदर मॉडल और चित्र तैयार किए थे। मुख्यमंत्री ने बच्चों से एक-एक कर बात की और उनकी सोच की जमकर तारीफ की। इसके बाद उन्होंने कक्षा 7वीं की परीक्षा में उत्कृष्ट अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। साथ ही बच्चों की पढ़ाई में पूरा सहयोग देने वाले अभिभावकों को ‘पेरेंट्स ऑफ द मंथ’ के सम्मान से नवाजा।

अगले साल से सभी सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर क्लास अनिवार्य होगी
राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय की मांग को देखते हुए अगले वर्ष से बिहार के सभी सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य रूप से लागू की जाए। इसके लिए विभाग एक ठोस कार्ययोजना तैयार करे। उन्होंने सुझाव दिया कि दो से तीन स्कूलों के बीच एक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर की नियुक्ति की व्यवस्था बनाई जाए, जिससे हर विद्यालय के विद्यार्थियों को नियमित कंप्यूटर सीखने का मौका मिल सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य भर में लगभग 700 मॉडल स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षकों और लाइव क्लास की व्यवस्था पहले ही शुरू की जा चुकी है, जिसका लाभ बच्चों को मिल रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्कूलों में ऐसा शैक्षणिक माहौल तैयार किया जाए जिससे सरकारी विद्यालय अपनी अलग पहचान बना सकें। मुख्यमंत्री ने उपस्थित अभिभावकों से भी अपील की कि यदि वे स्कूल की व्यवस्था, सुविधाओं या सिलेबस में कोई बदलाव चाहते हैं, तो अपने सुझाव निसंकोच साझा करें।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रोशन, विशेष सचिव धर्मेंद्र कुमार, जिलाधिकारी कुंदन कुमार, एसएसपी कार्तिकेय के. शर्मा सहित कई आला अधिकारी, शिक्षक और अभिभावक उपस्थित रहे।
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