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Ranchi : जब कोई अजनबी पहली बार झारखंड की धरती पर कदम रखता है, तो उसे सिर्फ घने जंगल, कलकल बहते झरने और पहाड़ ही नहीं बुलाते, बल्कि वो मुस्कुराहटें खींचती हैं जो आगे बढ़कर कहती हैं… “जोहार, बताइए आपकी क्या मदद करें?” ये वही चेहरे हैं जिन्हें हम पर्यटक मित्र कहते हैं। धूप हो, बारिश हो या कड़ाके की ठंड, राज्य के किसी भी कोने में सैलानियों का रास्ता आसान करने वाले ये साथी पर्दे के पीछे रहकर काम करते हैं। विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर रविवार को रांची का ऐतिहासिक ऑड्रे हाउस इन्हीं अनसुने साथियों के सम्मान का गवाह बना। मौका था पर्यटन, कला-संस्कृति एवं खेलकूद विभाग द्वारा आयोजित विशेष सम्मान समारोह का, जहां राज्य के पर्यटन को नई जान देने वाले हाथों को मंच पर सराहा गया।
कार्यक्रम की शुरुआत एक भावुक पल के साथ हुई। हाल ही में दिवंगत हुए मंत्री सुदिव्य कुमार को मंच पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए और दो मिनट का मौन रखकर उनकी यादों को नमन किया गया। इसके बाद जब बातचीत का दौर शुरू हुआ, तो केंद्र में रहे वे लोग जो जमीन पर रहकर झारखंड की छवि को संवार रहे हैं।

झारखंड की पहचान हैं ये गाइड, होटलकर्मी और सोशल मीडिया के साथी
समारोह में पर्यटन सचिव मुकेश कुमार ने दिल खोलकर इन जमीनी साथियों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकारी योजना तब तक अधूरी है, जब तक जमीन पर उतरकर काम करने वाले लोग उसे अपना न मान लें। हमारे पर्यटक मित्र सिर्फ रास्ता बताने वाले गाइड नहीं हैं, बल्कि वे झारखंड की संस्कृति और अपनापे के सच्चे प्रतिनिधि हैं। बाहर से आने वाले किसी सैलानी को जब कोई स्थानीय साथी सुरक्षित महसूस कराता है और यहां की लोककथाएं सुनाता है, तो वही अनुभव उस पर्यटक के दिल में हमेशा के लिए बस जाता है।
मुकेश कुमार ने इस बात पर भी जोर दिया कि सिर्फ गाइड ही नहीं, बल्कि छोटे-बड़े होटल संचालक और डिजिटल दुनिया में सक्रिय युवा भी कमाल कर रहे हैं। आज का युवा मोबाइल कैमरे और अपनी कलम के जरिए झारखंड के अनछुए जलप्रपातों और ऐतिहासिक धरोहरों को देश-दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचा रहा है। इस समारोह में इन सभी स्टेकहोल्डर्स को सम्मानित कर यह संदेश दिया गया कि राज्य के पर्यटन विकास में हर एक का पसीना बराबर मायने रखता है।
साझा कोशिशों से ही दुनिया के नक्शे पर चमकेगा अपना झारखंड
मंच से बात रखते हुए पर्यटन निदेशक नमन प्रियेश लकड़ा ने राज्य की असीम संभावनाओं का खाका खींचा। उन्होंने कहा कि झारखंड के पास देने के लिए बहुत कुछ है… प्रकृति की बेमिसाल खूबसूरती, शांत वादियां और समृद्ध आदिवासी परंपराएं। लेकिन इस खजाने को दुनिया के सामने सही तरीके से पेश करना एक साझा जिम्मेदारी है। विभाग का मकसद स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और पर्यटन कारोबारियों को एक साथ जोड़कर ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां आने वाला हर मेहमान यहां की यादें संजोकर लौटे और दूसरों को भी यहां आने के लिए प्रेरित करे।
कार्यक्रम में प्रबंध निदेशक प्रेम रंजन समेत विभाग के कई आला अधिकारी और पर्यटन जगत से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे। हॉल में बैठे हर शख्स की आंखों में एक ही सपना दिखा… झारखंड को सिर्फ खनिजों के लिए नहीं, बल्कि उसकी बेजोड़ मेहमाननवाजी और कुदरती नजारों के लिए पूरी दुनिया में पहचान दिलाना।
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