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Patna : बिहार में हालिया बाढ़ से बेहाल लोगों की मदद के लिए शासन और प्रशासन के साथ-साथ विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि भी हाथ बंटाने लगे हैं। इसी कड़ी में बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने मंगलवार को सीएम सम्राट चौधरी से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने संकट की इस घड़ी में मानवीय संवेदना दिखाते हुए अपने एक महीने का मानदेय मुख्यमंत्री बाढ़ राहत कोष में दान कर दिया। उन्होंने राहत कोष के लिए 2 लाख 25 हजार रुपए का चेक मुख्यमंत्री को सौंपा।
संकट की घड़ी में समाज भी बढ़ाए मदद के हाथ
सीएम से मुलाकात के बाद मृत्युंजय कुमार झा ने कहा कि बिहार के कई इलाके, खासकर मिथिला और चंपारण का क्षेत्र भीषण बाढ़ की चपेट में है। हजारों परिवार इस प्राकृतिक आपदा से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। उनका घर-बार छूट गया है और जिंदगी पटरी से उतर गई है। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीति या बयानबाजी का नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने का है। सामाजिक दायित्व निभाते हुए उन्होंने अपनी तरफ से एक महीने की सैलरी समर्पित की है। इसके साथ ही उन्होंने समाज के सक्षम और संपन्न लोगों से भी अपील की कि वे आगे आएं और संकट में फंसे लोगों की हरसंभव मदद करें।
संस्कृत शिक्षा के विस्तार और मध्यमा परीक्षा पर चर्चा
मुलाकात के दौरान सिर्फ राहत कार्य ही नहीं, बल्कि राज्य में संस्कृत शिक्षा की बेहतरी को लेकर भी लंबी बातचीत हुई। बोर्ड अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को बोर्ड के कामकाज और नई योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्कृत विद्यालयों में पढ़ाई का माहौल सुधारने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम चल रहा है। वर्ष 2027 में होने वाली मध्यमा परीक्षा की तैयारियों, नए प्रस्तावित संस्कृत स्कूलों और नई पीढ़ी को इस भाषा से जोड़ने के रोडमैप पर भी विचार-विमर्श हुआ। अध्यक्ष ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में संस्कृत विद्यालयों में छात्रों की संख्या बढ़ेगी और उन्हें बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलेंगी।

मिथिला पाग और मखाना माला से सीएम का सम्मान
मुलाकात के दौरान मृत्युंजय कुमार झा ने मुख्यमंत्री को मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक चिह्नों से सम्मानित किया। उन्होंने सीएम को विश्वप्रसिद्ध मखाना की माला, पारंपरिक मिथिला पाग, मिथिला पेंटिंग और पेंटिंग वाली चादर भेंट की। झा ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार समेत बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। पीड़ितों की सेवा करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है, संस्कृत को आगे बढ़ाना बोर्ड का संकल्प है और पूरे राज्य की तरक्की ही अंतिम लक्ष्य है।



