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नई दिल्ली। अक्सर खुद पर चुटकले कहने वाले लोगों और खुद पर हंसने वालों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य का स्तर काफी अच्छा होता है। एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। यह अध्ययन हास्य विनोद के मनोविज्ञान पर पहले आए अध्ययनों का विरोधाभासी है।
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दरअसल, अब तक कई सारे अध्ययनों में यह कहा गया था कि खुद पर चुटकले कहना लोगों के बीच नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभावों से विशेष रूप से संबद्ध है जो हमेशा ही इस शैली का इस्तेमाल करते हैं। स्पेन के ग्रनादा यूनिवर्सिटी के जॉर्ज टोर मरीन ने बताया, ‘खुद पर चुटकले कहने की कहीं अधिक प्रवृत्ति मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य के आयाम जैसे- खुशी और सामाजिकता के अच्छा होने का संकेत है। हमारा मानना है कि इस तरह के हास्य के इस्तेमाल में संभावित सांस्कृतिक अंतरों को लक्षित नये अध्ययन करना जरूरी है।’
मरीन आगे कहते हैं, ‘इस अध्ययन के नतीजे अविरोधी हैं जो बताते हैं कि हमारे देश में खुद पर हंसना पारंपरिक रूप से सकारात्मक संकेत का उत्तरदायी है। हालांकि अध्ययन के नतीजे इस बात की ओर भी इशारे करते हैं कि खुद पर हंसने को लेकर की गई रिसर्च कहां पर हुई है, इसको लेकर भी नतीजे में बदलाव हो सकता है।’

