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News Samvad: अल्जाइमर यानी डिमेंशिया दुनिया भर में करोड़ों बुजुर्गों को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारी है। इसमें धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर होने लगती है, सोचने-समझने की क्षमता घटती जाती है और रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम करना भी मुश्किल हो जाता है। फिलहाल इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है। ऐसे में वैज्ञानिक लगातार यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर किन वजहों से इसका खतरा बढ़ता है और इसे कैसे रोका जा सकता है।अब एक नए शोध में ऐसी जानकारी सामने आई है, जिसने डॉक्टरों और शोधकर्ताओं का ध्यान खींचा है। अब तक माना जाता था कि हाई ब्लड प्रेशर अल्जाइमर का बड़ा जोखिम कारक हो सकता है, लेकिन इस अध्ययन में यह भी सामने आया है कि लंबे समय तक लो ब्लड प्रेशर रहने वाले लोगों में भी अल्जाइमर का खतरा अधिक हो सकता है।
करीब आठ लाख लोगों के आंकड़ों का किया गया विश्लेषण
यह शोध मिशिगन टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया। उन्होंने लगभग आठ लाख लोगों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड का अध्ययन किया। इसके लिए ब्रिटेन के यूके बायोबैंक और अमेरिका के ऑल ऑफ अस रिसर्च प्रोग्राम के बड़े डेटाबेस का इस्तेमाल किया गया।शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर और दिल व रक्त वाहिकाओं से जुड़ी 11 अलग-अलग बीमारियों के बीच संबंध तलाशने की कोशिश की। इसके बाद जो नतीजे सामने आए, वे काफी अहम माने जा रहे हैं।
लो ब्लड प्रेशर का सबसे मजबूत संबंध मिला
अध्ययन में पाया गया कि दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी कई बीमारियों का संबंध अल्जाइमर से था। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि लो ब्लड प्रेशर का संबंध सबसे मजबूत और लगातार दोनों समूहों में देखने को मिला।वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक अल्जाइमर के संदर्भ में लो ब्लड प्रेशर पर बहुत कम अध्ययन हुए हैं। इसलिए यह निष्कर्ष भविष्य के शोध के लिए नई दिशा दिखा सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक से भी मिला संबंध
शोध में हाई ब्लड प्रेशर और सेरेब्रल इन्फार्क्शन, जो स्ट्रोक का एक प्रकार है, का भी अल्जाइमर से मजबूत संबंध पाया गया। हालांकि हार्ट अटैक और अल्जाइमर के बीच कोई खास संबंध नहीं मिला।वैज्ञानिकों ने जेनेटिक स्तर पर भी जांच की। इसमें पता चला कि एपीओई और एमएपीटी जैसे कुछ जीन अल्जाइमर और हृदय संबंधी समस्याओं, दोनों से जुड़े हो सकते हैं। ये जीन पहले से ही मस्तिष्क के कामकाज और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं।
लो ब्लड प्रेशर क्यों बन सकता है खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बहुत कम रहता है, तो मस्तिष्क तक पर्याप्त मात्रा में रक्त, ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते। इसका असर धीरे-धीरे मस्तिष्क की कोशिकाओं पर पड़ सकता है और उन्हें नुकसान हो सकता है।कुछ वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि लो ब्लड प्रेशर और अल्जाइमर के पीछे कुछ समान जैविक प्रक्रियाएं काम कर सकती हैं। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में लो ब्लड प्रेशर शुरुआती न्यूरोडीजेनेरेटिव बदलावों का संकेत भी हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने दी यह अहम सलाह
शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि इस अध्ययन को यह साबित करने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए कि लो ब्लड प्रेशर सीधे अल्जाइमर की वजह बनता है। फिलहाल यह सिर्फ दोनों स्थितियों के बीच एक संबंध दिखाता है।विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा हो या बहुत कम, दोनों ही स्थितियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज लेना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना मस्तिष्क और हृदय, दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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