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Sultanganj : बिहार के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल अजगैबीनाथ धाम (सुल्तानगंज) के निकट प्रस्तावित ग्रीन फील्ड हवाई अड्डा परियोजना के लिए भूमि संरक्षण सुनिश्चित करने हेतु DM डॉ. नवल किशोर चौधरी ने सख्त कदम उठाया है। उन्होंने जिला अवर निबंधक को आदेश जारी कर मसदी में 300 एकड़, नोनसर में 225 एकड़, राजगंज में 50 एकड़, कसवा में 205 एकड़, सूजापुर में 40 एकड़ और मंझली में 35 एकड़ भूमि की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही आसपास की अन्य जमीनों के लेन-देन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण किया जा सके।
परियोजना का उद्देश्य और महत्व
DM ने बताया कि यह हवाई अड्डा रैयती खाते की भूमि पर बनाया जाएगा, जिसके लिए भूमि संरक्षण आवश्यक है। इस परियोजना का उद्देश्य न केवल हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ाना है, बल्कि अनावश्यक लेन-देन को रोककर परियोजना की पारदर्शिता और सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित करना भी है। प्रशासन ने इस आदेश का कड़ाई से पालन करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञ टीम का दौरा
वायुयान संगठन निदेशालय के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), नई दिल्ली के अध्यक्ष को पत्र लिखकर भागलपुर में ग्रीन फील्ड हवाई अड्डे के लिए प्री-फिजिबिलिटी स्टडी और तकनीकी जांच का अनुरोध किया है। सुल्तानगंज अंचल में 855 एकड़ भूमि को इस परियोजना के लिए चिह्नित किया गया है, जिसे सक्षम प्राधिकार से अनुमोदन भी प्राप्त हो चुका है। जल्द ही एक विशेषज्ञ टीम सुल्तानगंज पहुंचकर जमीन की तकनीकी जांच करेगी।
हवाई अड्डे की विशेषताएं
प्रस्तावित हवाई अड्डे में 4000 मीटर (उत्तरी छोर) और 3800 मीटर (दक्षिणी छोर) लंबा रनवे होगा, जिसकी चौड़ाई 740 मीटर होगी। टर्मिनल भवन की लंबाई 1000 मीटर और चौड़ाई 500 मीटर होगी। इसके अतिरिक्त, परिसर में चहारदीवारी, वेटिंग लाउंज, प्रशासनिक भवन, पार्किंग क्षेत्र और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी शामिल होंगी। यह हवाई अड्डा भागलपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 30 किमी, सुल्तानगंज मुख्यालय से हवाई दूरी में 2.9 किमी और सड़क मार्ग से 6 किमी की दूरी पर स्थित होगा।
क्षेत्रीय विकास में योगदान
यह हवाई अड्डा पूर्वी बिहार और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों के लिए हवाई कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा। अजगैबीनाथ धाम के निकट होने के कारण यह धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, जिससे स्थानीय व्यापार और पर्यटन उद्योग को बल मिलेगा। इस परियोजना से क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक विकास भी तेज होगा।
आगामी कदम
तकनीकी जांच के बाद भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्यों में तेजी लाने की योजना है। प्रशासन की गंभीरता और त्वरित कदम इस बात का संकेत हैं कि यह परियोजना जल्द ही मूर्त रूप लेगी, जिससे भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए बेहतर वायु यात्रा सुविधा उपलब्ध होगी।
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