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Patna : बिहार के सरकारी अस्पतालों में दिल के मरीजों को अब ईसीजी कराने के लिए निजी जांच केंद्रों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की पहल पर राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में शुरू की गई मुफ्त ईसीजी सेवा का दायरा लगातार बढ़ रहा है। बीते डेढ़ साल के भीतर राज्य में 11 लाख 43 हजार से ज्यादा मरीजों की ईसीजी जांच पूरी हो चुकी है। सबसे खास बात यह है कि जांच कराने के महज 10 मिनट के अंदर मरीज को पूरी तकनीकी रिपोर्ट थमा दी जा रही है, जिससे समय रहते इलाज शुरू करने में मदद मिल रही है।
जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक पहुंची सुविधा
राज्य सरकार ने इस जांच को केवल बड़े मेडिकल कॉलेजों तक सीमित न रखकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाया है। वर्तमान में राज्य के 606 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त दी जा रही है। इनमें जिला अस्पतालों और अनुमंडलीय अस्पतालों के अलावा प्रखंड स्तर पर मौजूद रेफरल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर जांच की व्यवस्था होने से मरीजों को शहर भागने की परेशानी और जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त किराए-भाड़े के बोझ से राहत मिली है।
हर तिमाही में तेजी से बढ़ रहा जांच का आंकड़ा
विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से 26 सितंबर 2026 के बीच जांच कराने वालों की तादाद में लगातार बड़ा उछाल आया है। शुरुआत में अप्रैल से जून 2025 के बीच जहां महज 15 हजार 86 जांचें हुई थीं, वहीं जुलाई से सितंबर 2025 में यह आंकड़ा 57 हजार 440 पहुंच गया। इसके बाद अक्टूबर से दिसंबर 2025 में 1 लाख 43 हजार से अधिक और जनवरी से मार्च 2026 में 2 लाख 57 हजार से अधिक जांच दर्ज की गईं। चालू वित्तीय वर्ष में यह ग्राफ और तेज हुआ है, जहां अप्रैल से जून 2026 के दौरान 3 लाख 11 हजार से ज्यादा और जुलाई से 26 सितंबर 2026 तक 3 लाख 57 हजार से अधिक जांचें की जा चुकी हैं।
समय पर पहचान से बच रही मरीजों की जान
स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने बताया कि विभाग का मुख्य मकसद दिल से जुड़ी किसी भी गंभीर बीमारी की समय रहते पहचान करना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में यह सुविधा घर के पास मिलने से गरीब से गरीब मरीज भी बिना किसी देरी के जांच करा पा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य के हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचाना है और तेजी से बढ़ता यह आंकड़ा साफ बताता है कि आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है। आने वाले दिनों में इन सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
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