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Banka : बिहार के बांका जिले के छत्रपाल पंचायत स्थित एनपीएस गोरबामारण विद्यालय में मध्याह्न भोजन (MDM) में छिपकली निकलने से 14 बच्चे बीमार हो गए। सभी बच्चों को तुरंत बांका सदर अस्पताल के विशेष वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार सभी बच्चों की स्थिति अब खतरे से बाहर है।
घटना के अनुसार मंगलवार को विद्यालय में बच्चों को नियमित रूप से MDM (चावल) परोसा जा रहा था। इस दौरान भोजन में छिपकली पाई गई। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि विद्यालय प्राचार्य ने छिपकली को निकालकर बिना किसी जांच के वही चावल बच्चों को परोस दिया। खाना खाने के कुछ देर बाद बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और चक्कर की शिकायतें शुरू हो गईं। बीमार बच्चों में गुरूदेव कुमार (कक्षा-1), ज्ञानी कुमारी (कक्षा-4), मिनाक्षी कुमारी (कक्षा-1), अंशु कुमारी (कक्षा-4), अभिषेक कुमार (कक्षा-5), सौरभ कुमार (कक्षा-4), गौरव कुमार (कक्षा-2), संदीप कुमार (कक्षा-4), अमृता कुमारी (कक्षा-3), जितेंद्र कुमार (कक्षा-2), निशा कुमारी (कक्षा-4), आरती कुमारी (कक्षा-2), सोनम कुमारी (कक्षा-4) और करिष्मा कुमारी (कक्षा-5) शामिल हैं।
तत्काल कार्रवाई और अस्पताल में भर्ती
घटना की जानकारी मिलते ही प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) चंदन कुमार ने दो बच्चों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जिसके बाद अन्य बच्चों को भी भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया और स्थिति को नियंत्रण में बताया। जिला MDM साधनसेवी उदयकांत झा और प्रखंड साधनसेवी मनोहर कुमार साह ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों से मुलाकात की और मामले की जानकारी ली।
अभिभावकों में आक्रोश, लापरवाही का आरोप
अभिभावकों ने विद्यालय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि छिपकली मिलने के बावजूद प्राचार्य ने वही भोजन परोस दिया, जिससे बच्चों की तबीयत बिगड़ी। स्थानीय महिला अभिभावक शांति देवी, जिनके एक बेटे की पहले सांप काटने से मृत्यु हो चुकी है, ने बीडीओ पर असंवेदनशील टिप्पणी का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि बीडीओ ने उनकी शिकायत पर कहा, “अगर बच्चों को पढ़ाने में दिक्कत है तो नाम कटवा लीजिए।” हालांकि, बीडीओ चंदन कुमार ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने बच्चों को अस्पताल पहुंचाने में तत्परता दिखाई और मामले की जांच जारी है।
जिला प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
बांका के जिलाधिकारी ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। MDM की गुणवत्ता, खानपान की निगरानी और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। डीएम ने कहा कि दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिवक्ता और धर्मरक्षक मनीष कुमार ने भी अस्पताल पहुंचकर बच्चों और परिजनों से मुलाकात की और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की।
MDM योजना पर उठे सवाल
मध्याह्न भोजन योजना बच्चों के पोषण और स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने के लिए चलाई जाती है, लेकिन इस घटना ने योजना की निगरानी में बड़ी चूक को उजागर किया है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई न हुई होती तो यह घटना और गंभीर रूप ले सकती थी। यह मामला स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी और बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है।
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