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Latehar : झारखंड के लातेहार जिले में पुलिस को नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान में बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बने भाकपा (माओवादी) के जोनल कमांडर मृत्युंजय भुइया उर्फ फ्रेश भुइया को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ संगठन का सब-जोनल कमांडर बबलू राम भी पकड़ा गया है। करीब दो दशकों से नक्सली संगठन में सक्रिय मृत्युंजय भुइया पर झारखंड पुलिस ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था, जबकि बबलू राम पर दो लाख रुपये का इनाम था। दोनों की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां बड़ी कामयाबी मान रही हैं।
गुप्त सूचना से शुरू हुआ ऑपरेशन
लातेहार पुलिस कप्तान कुमार गौरव को गुप्त सूचना मिली थी कि माओवादी संगठन का जोनल कमांडर मृत्युंजय भुइया अपने दस्ते के साथ छिपादोहर थाना क्षेत्र के हरिणामाड़ गांव के आसपास आने वाला है। सूचना मिलते ही एसपी कुमार गौरव के निर्देश पर एक विशेष टीम बनाई गई। पुलिस टीम ने इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया और गांव के आसपास घेराबंदी कर दी। कुछ देर की तलाश के बाद पुलिस ने दोनों नक्सलियों को धर दबोचा। इस दौरान उनके पास से एक ऑटोमैटिक AK-47 रायफल, 21 जिंदा गोलियां और लगभग 1.60 लाख रुपये नगद बरामद किए गए।
20 साल से नक्सली संगठन में था सक्रिय
गिरफ्तार नक्सली मृत्युंजय भुइया छिपादोहर थाना क्षेत्र के नावाडीह गांव का रहने वाला है। एसपी के मुताबिक वह पिछले करीब 20 सालों से माओवादी संगठन में एक्टिव था और धीरे-धीरे संगठन में ऊंचे पद तक पहुंच गया। मृत्युंजय पर अलग-अलग थाना क्षेत्रों में करीब 104 नक्सली हिंसा के मामले दर्ज हैं। वह कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है और पुलिस के साथ 12 से ज्यादा मुठभेड़ों में भी उसका नाम सामने आया है। कई बार उसने अपने दस्ते के साथ पुलिस बल पर घात लगाकर हमला किया था।
बिहार से आकर बना सब-जोनल कमांडर
मृत्युंजय के साथ पकड़ा गया बबलू राम बिहार के अरवल जिले के निरखपुर गांव का रहने वाला है। वह माओवादी संगठन में सब-जोनल कमांडर के रूप में काम कर रहा था। पुलिस के मुताबिक बबलू राम के खिलाफ भी विभिन्न थाना क्षेत्रों में करीब 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं। संगठन में उसकी भूमिका इलाके में लेवी वसूली, दस्ते की गतिविधियों का संचालन और नए सदस्यों की भर्ती कराने में मानी जाती है।
बरामद हथियार और लेवी के पैसे
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने नक्सलियों के पास से एक स्वचालित AK-47 रायफल, 21 जिंदा कारतूस और करीब 1.60 लाख रुपये नगद बरामद किए हैं। पुलिस का मानना है कि यह रकम इलाके में व्यवसायियों, ठेकेदारों और निर्माण कार्यों से वसूली गई लेवी की हो सकती है। हथियार और नकदी को पुलिस ने जब्त कर लिया है और मामले की आगे जांच की जा रही है।
कई अहम खुलासों की उम्मीद
शनिवार को एसपी कुमार गौरव ने मीडिया को बताया कि पुलिस लंबे समय से इन दोनों नक्सलियों की तलाश कर रही थी। गुप्त सूचना मिलने के बाद योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई कर इन्हें गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब दोनों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इनसे पूछताछ में नक्सली नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई, लेवी वसूली और संगठन की गतिविधियों से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
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