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Ranchi : कभी जंगलों में हथियार लेकर घूमने वाले, पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले करने वाले, सालों तक दहशत का चेहरा बने रहे हार्डकोर नक्सली अब धीरे-धीरे हथियार छोड़ रहे हैं। गुरुवार को झारखंड ने ऐसा दृश्य देखा, जिसने राज्य में नक्सलवाद के कमजोर पड़ते असर की बड़ी तस्वीर सामने रख दी। राज्य गठन के बाद पहली बार 27 हार्डकोर नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर दिया। डीजीपी तदाशा मिश्रा और सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह के समक्ष सभी 27 नक्सली हथियार डाल नतमस्तक हो गए। इनमें 25 भाकपा माओवादी संगठन और 2 जेजेएमपी संगठन के सदस्य शामिल हैं। कई नक्सली ऐसे हैं, जिन पर लाखों रुपये का इनाम था और जिनके नाम से कोल्हान, सारंडा, चाईबासा, सरायकेला, खूंटी और गुमला के इलाकों में खौफ का माहौल रहता था।
जंगलों में बढ़ता दबाव, टूटने लगा नेटवर्क
पिछले कुछ महीनों से सारंडा और कोल्हान के जंगलों में लगातार अभियान चलाया जा रहा था। सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन, झारखंड पुलिस और खुफिया एजेंसियां लगातार नक्सलियों की घेराबंदी कर रही थीं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक जंगलों में अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही। नक्सलियों की सप्लाई लाइन कमजोर हुई है। हथियार और राशन पहुंचाना मुश्किल हो गया है। ऊपर से लगातार ऑपरेशन के कारण संगठन के भीतर भी दबाव बढ़ा। इसी दबाव के बीच कई नक्सली जंगल छोड़कर बाहर निकलना चाहते थे। पिछले एक महीने से सुरक्षा एजेंसियां इनसे संपर्क में थीं। आखिरकार गुरुवार को सभी ने एक साथ हथियार डाल दिए।
जिनके नाम से कांपते थे गांव
सरेंडर करने वालों में कई ऐसे चेहरे शामिल हैं, जिन पर पुलिस ने बड़े इनाम घोषित कर रखे थे। इनमें गादी मुंडा उर्फ गुलशन, नागेंद्र मुंडा उर्फ प्रभात मुंडा, रेखा मुंडा उर्फ जयंती, सागेन आंगारिया और सुलेमान हांसदा जैसे नाम शामिल हैं। सागेन आंगारिया पर अकेले 123 मामले दर्ज हैं। वहीं कई नक्सलियों पर 5-5 लाख रुपये तक का इनाम घोषित था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इन सभी पर मिलाकर 426 मामले दर्ज हैं। इनमें पुलिस पार्टी पर हमला, हत्या, लेवी वसूली, आगजनी और हथियार लूट जैसी घटनाएं शामिल हैं।
महिला नक्सलियों ने भी छोड़ी बंदूक
इस सामूहिक सरेंडर में बड़ी संख्या में महिला नक्सली भी शामिल रहीं। कई महिलाएं कम उम्र में संगठन से जुड़ी थीं। जंगलों में रहकर हथियार चलाने से लेकर संदेश पहुंचाने तक की जिम्मेदारी निभाती थीं। वंदना उर्फ शांति, सुनिता सरदार, बसंती देवगम, अनिशा कोड़ा, सपना कालुंडिया और निति हेंब्रम समेत कई महिला कैडरों ने भी आत्मसमर्पण किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिला कैडरों का सरेंडर संगठन के भीतर टूटते भरोसे का बड़ा संकेत है।
हथियारों का बड़ा जखीरा भी हुआ जमा
सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपा। बरामद सामान में 1 इंसास एलएमजी, 5 इंसास राइफल, 9 एसएलआर राइफल, 1 बोल्ट एक्शन राइफल, 1 पिस्टल, 31 मैगजीन, करीब 3000 जिंदा गोलियां और कई वॉकी टॉकी सेट शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि यह हथियार लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे थे।

सरकार की पुनर्वास नीति बनी वजह
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ ऑपरेशन ही नहीं, बल्कि सरकार की पुनर्वास नीति भी सरेंडर की बड़ी वजह बनी। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की योजना है। अधिकारियों के मुताबिक कई नक्सली अब सामान्य जिंदगी जीना चाहते हैं। वे लगातार जंगलों में भागते रहने और मुठभेड़ के डर से बाहर निकलना चाहते थे।
आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख नक्सलियों की सूची
| क्रम | नाम | संगठन/रैंक | इनाम | दर्ज मामले |
|---|---|---|---|---|
| 1 | गादी मुंडा उर्फ गुलशन | SZC | 5 लाख | 48 |
| 2 | नागेंद्र मुंडा उर्फ प्रभात मुंडा | SZC | 5 लाख | 38 |
| 3 | रेखा मुंडा उर्फ जयंती | SZC | 5 लाख | 18 |
| 4 | सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल | SZC | 5 लाख | 123 |
| 5 | करण तियू | AC | 2 लाख | 29 |
| 6 | दर्शन उर्फ बिंज हांसदा | SZC | 5 लाख | 14 |
| 7 | सुलेमान हांसदा उर्फ सुनी | SZC | 5 लाख | 13 |
| 8 | बासुमती जेराई उर्फ बासू | AC | 1 लाख | 14 |
| 9 | बैजनाथ मुंडा | AC | 0 | 4 |
| 10 | रघु कायम उर्फ गुणा | AC | 0 | 19 |
| 11 | किशोर सिरका उर्फ दुर्गा सिरका | AC | 0 | 11 |
| 12 | राम दयाल मुंडा | AC | 0 | 4 |
| 13 | वंदना उर्फ शांति | कैडर | 0 | 2 |
| 14 | सुनिता सरदार | कैडर | 0 | 6 |
| 15 | डांगुर बोइपाई उर्फ मुकेश | कैडर | 0 | 13 |
| 16 | बसंती देवगम | कैडर | 0 | 5 |
| 17 | मुन्नीराम मुंडा | कैडर | 0 | 3 |
| 18 | अनिशा कोड़ा उर्फ रानी | कैडर | 0 | 8 |
| 19 | सपना उर्फ सुरू कालुंडिया | कैडर | 0 | 21 |
| 20 | सुसारी उर्फ दसमा कालुंडिया | कैडर | 0 | 2 |
| 21 | बिरसा कोड़ा उर्फ हरिसिंह | कैडर | 0 | 6 |
| 22 | नुअस | कैडर | 0 | 5 |
| 23 | बुमली तियू उर्फ दामू चरण | कैडर | 0 | 9 |
| 24 | निति माई उर्फ निति हेंब्रम | कैडर | 0 | 4 |
| 25 | लादू तिरिया | कैडर | 0 | 5 |
| 26 | सचिन बैक (JJMP) | सक्रिय सदस्य | 5 लाख | 6 |
| 27 | श्रवण गोप (JJMP) | सक्रिय सदस्य | 0 | 8 |
पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी
डीजीपी तदाशा मिश्रा का मानना है कि यह सरेंडर सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि नक्सली संगठन की कमजोर होती पकड़ का संकेत है। जिन इलाकों में कभी नक्सलियों का दबदबा माना जाता था, वहां अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी मजबूत हुई है। डीजीपी का कहना है कि आने वाले दिनों में और नक्सली भी आत्मसमर्पण कर सकते हैं। वहीं पुलिस अब सारंडा और कोल्हान के बाकी इलाकों में अभियान तेज करने की तैयारी में हैं।
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