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Patna : बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच भाजपा को जहानाबाद से एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी से तीन दशक से जुड़े रहे और सबसे कम उम्र में जिला अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल करने वाले शशि रंजन ने अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। महराजगंज लोकसभा के प्रभारी और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रहे शशि रंजन ने न सिर्फ संगठन के सभी पदों को छोड़ा, बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी त्याग दी।
28 वर्षों की निष्ठा, पर सम्मान की कमी
शशि रंजन का राजनीतिक सफर 1995 से शुरू हुआ था, जब वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े। युवा भाजपा में वे मंत्री से लेकर जिला अध्यक्ष और फिर भाजपा मजदूर महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष तक बने। धीरे-धीरे संगठन में उनकी पहचान बढ़ी और 2011 से 2015 तक जहानाबाद के भाजपा जिलाध्यक्ष रहे। लेकिन इतने लंबे सफर के बाद भी उन्हें लगता है कि पार्टी में अब उनका सम्मान कम हो रहा है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने साफ कहा… “मैंने भाजपा के लिए 28 साल काम किया, लेकिन हाल के दिनों में मुझे लगातार अपमानित किया जा रहा था। स्वाभिमान से बड़ा कुछ नहीं है।”
अमित शाह के दौरे से पहले इस्तीफा
संयोग देखिए, शशि रंजन का इस्तीफा उस वक्त आया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार दौरे पर हैं। शाहाबाद और मगध के 10 जिलों के नेताओं की बैठक में जहानाबाद भी शामिल है। लेकिन अब वहां से एक अहम चेहरा पार्टी से बाहर हो चुका है। यह भाजपा के लिए चुनावी रणनीति के बीच असहज करने वाली स्थिति है।
NDA का विरोध करेंगे शशि रंजन
शशि रंजन ने साफ कहा है कि वह अब अपने समर्थकों से बातचीत कर आगे की दिशा तय करेंगे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि वह NDA का विरोध करेंगे और चुनाव में पार्टी के विपक्ष में खड़े रहेंगे। यानी उनका अगला कदम बिहार की राजनीति में नई हलचल ला सकता है।
राजनीतिक गलियारों में गहमागहमी
जहानाबाद की गलियों से लेकर पटना के राजनीतिक गलियारों तक, शशि रंजन के इस्तीफे की चर्चा जोरों पर है। भाजपा जहां नुकसान से बचने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्षी दल इस मौके को भुनाने में देर नहीं करेंगे। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि शशि रंजन किस राजनीतिक रास्ते का चुनाव करते हैं… नया दल, पुराना सहयोग या स्वतंत्र सफर।
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