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Pakur (Jaydev Kumar) : रविवार की सुबह पाकुड़ के जिला मुख्यालय से निकलती बसों में सिर्फ प्रतिनिधि नहीं बैठे थे, बल्कि गांवों के बेहतर भविष्य की उम्मीदें भी साथ थीं। पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से 70 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को उपायुक्त मनीष कुमार ने सात दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण के लिए राजगीर बिहार रवाना किया। यह यात्रा रिवेंप्ड राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत आयोजित की गई है, लेकिन इसके मायने कागजों से कहीं आगे हैं।
सीखने की इच्छा, बदलने का इरादा
रवानगी से पहले डीसी मनीष कुमार ने प्रतिनिधियों से कहा कि यह यात्रा सिर्फ देखने की नहीं, समझने और अपने गांवों में उतारने की है। उन्होंने भरोसा जताया कि राजगीर की पंचायतों में हो रहे सफल प्रयोग प्रतिनिधियों को नई दिशा देंगे। उनके शब्दों में विश्वास था और प्रतिनिधियों की आंखों में जिम्मेदारी का भाव साफ झलक रहा था।
गांव की आवाज साथ ले जाता प्रतिनिधिमंडल
इस दल में मुखिया, उप मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत सहायक और जेएसएलपीएस से जुड़ी सखी दीदियां शामिल हैं। हर किसी के साथ उसका अनुभव और उसकी पंचायत की कहानी है। किसी के गांव में पानी की समस्या है, तो किसी को रोजगार के अवसर बढ़ाने की चिंता सता रही है। यही सवाल और यही उम्मीदें इस यात्रा को खास बनाती हैं।
सखी दीदियों की अलग उम्मीदें
दल में शामिल सखी दीदियां खास तौर पर उत्साहित हैं। वे राजगीर में महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे छोटे उद्यम, स्वयं सहायता समूहों की भूमिका और महिला नेतृत्व के मॉडल को नजदीक से देखना चाहती हैं। उनका मानना है कि अगर महिलाएं मजबूत होंगी, तो गांव अपने आप आगे बढ़ेगा।

राजगीर से मिलने वाले सबक
राजगीर की पंचायतें जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, डिजिटल सेवाओं और पर्यटन आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए जानी जाती हैं। प्रतिनिधि वहां यह समझने की कोशिश करेंगे कि गरीबी मुक्त और स्वस्थ गांव की सोच को जमीन पर कैसे उतारा जाए। ग्राम सभा को मजबूत करने और पंचायत की आय बढ़ाने के तरीकों पर भी उनका फोकस रहेगा।
सीख के साथ लौटेगा अनुभव
विशेष कार्य पदाधिकारी त्रिभुवन कुमार सिंह का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि खुद सफल मॉडल देखते हैं, तो बदलाव का डर खत्म हो जाता है। जिला परियोजना प्रबंधक आनंद प्रकाश के अनुसार, इस यात्रा का मकसद पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना है और इसके लिए प्रशासन और समाज दोनों का साथ जरूरी है।
यात्रा के बाद गांवों में दिखेगा असर
सात दिनों की इस यात्रा के बाद हर प्रतिनिधि अपनी सीख को रिपोर्ट के रूप में साझा करेगा। उम्मीद है कि ये अनुभव सिर्फ फाइलों में नहीं, बल्कि गांव की गलियों, स्कूलों, आंगनबाड़ियों और पंचायत भवनों में दिखाई देंगे। बस में बैठे इन प्रतिनिधियों के साथ लौटेगा एक सवाल और एक संकल्प कि अगर कहीं संभव है, तो हमारे गांव में भी क्यों नहीं।
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