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Ranchi : पुलिस की वर्दी अक्सर लोगों को सिर्फ कानून, सख्ती और कार्रवाई की याद दिलाती है। लेकिन उसी वर्दी के पीछे ऐसे लोग भी होते हैं जो हर दिन जिम्मेदारी निभाते हुए खुद को लगातार बेहतर बनाने में लगे रहते हैं। नागपुर (महाराष्ट्र) में आयोजित 69वीं अखिल भारतीय पुलिस ड्यूटी मीट 2026 में झारखंड पुलिस के दो अधिकारियों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया, जिसने पूरे राज्य को गर्व से भर दिया। देशभर की पुलिस इकाइयों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा में झारखंड पुलिस ने अपनी तकनीकी दक्षता और पेशेवर क्षमता का दमदार प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि Crime Scene Photography जैसे महत्वपूर्ण इवेंट में झारखंड के दो पुलिसकर्मियों ने पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि अपराध की सच्चाई पकड़ने के लिए सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि तेज नजर और सही प्रशिक्षण भी जरूरी है।
अपराध की कहानी कैमरे से पकड़ने की चुनौती
Crime Scene Photography सुनने में भले ही आसान लगे, लेकिन असल में यह पुलिसिंग का सबसे संवेदनशील और जिम्मेदारी वाला हिस्सा है। अपराध स्थल पर एक छोटी सी गलती जांच की दिशा बदल सकती है। वहां मौजूद हर निशान, हर चीज का सही एंगल से फोटो लेना, सबूतों को सुरक्षित रखना और पूरी घटना को कैमरे में इस तरह दर्ज करना कि कोर्ट में भी वह मजबूत सबूत बने, यही इस प्रतियोगिता की असली कसौटी होती है। नागपुर में आयोजित इस ड्यूटी मीट में देश के कई अनुभवी पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया, लेकिन झारखंड पुलिस के जवानों ने अपनी मेहनत और तकनीकी समझ से अलग पहचान बनाई।
अनुपम प्रकाश का सिल्वर, राकेश कुमार का ब्रॉन्ज
इस प्रतियोगिता में झारखंड पुलिस की ओर से भाग लेते हुए सब इंस्पेक्टर अनुपम प्रकाश (हजारीबाग जिलाबल) ने सिल्वर मेडल जीतकर राज्य का मान बढ़ाया। वहीं राकेश कुमार (रांची जिलाबल) ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। इन दोनों पदक विजेताओं की यह उपलब्धि सिर्फ मेडल तक सीमित नहीं है। यह उस जिद और मेहनत का नतीजा है जो पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी के साथ-साथ खुद को बेहतर बनाने के लिए करते हैं।

ड्यूटी के बीच तैयारी, रातों की मेहनत
पुलिस की नौकरी में समय का कोई भरोसा नहीं होता। कभी रात में पेट्रोलिंग, कभी अचानक रेड, कभी वीआईपी ड्यूटी, कभी थाने में केस की भागदौड़। ऐसे माहौल में किसी प्रतियोगिता की तैयारी करना आसान नहीं होता। लेकिन अनुपम प्रकाश और राकेश कुमार ने अपनी जिम्मेदारियों के बीच समय निकालकर लगातार अभ्यास किया। कैमरा पकड़ना उनके लिए सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि अपराध के पीछे छिपी सच्चाई को सामने लाने का माध्यम बन गया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इन दोनों ने अभ्यास के दौरान बार-बार अपराध स्थल की परिस्थितियों को समझा, फोटो के सही एंगल, लाइटिंग, फोकस और सबूतों की स्पष्टता पर खास ध्यान दिया।
यह जीत सिर्फ दो लोगों की नहीं, पूरे झारखंड पुलिस की है
झारखंड पुलिस ने इस उपलब्धि को पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय बताया है। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि यह सफलता केवल दो अधिकारियों की नहीं, बल्कि पूरे पुलिस विभाग के प्रशिक्षण और टीमवर्क की जीत है। क्योंकि Crime Scene Photography का काम सिर्फ तस्वीर खींचना नहीं है, बल्कि अपराध जांच को मजबूत बनाना है। सही तस्वीरें केस को मजबूत करती हैं और कई बार अपराधी को सजा दिलाने में सबसे अहम भूमिका निभाती हैं।
पुलिस मुख्यालय में हुआ सम्मान, बढ़ा हौसला
इस उपलब्धि के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय में दोनों पदक विजेताओं को सम्मानित किया गया। सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक ने दोनों अधिकारियों को सम्मान देकर उनका हौसला बढ़ाया। एडीजी मनोज कौशिक ने कहा कि इस तरह की उपलब्धियां पुलिस बल के लिए प्रेरणा हैं। इससे बाकी जवानों में भी आगे बढ़ने और बेहतर काम करने की भावना पैदा होती है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड पुलिस अब आधुनिक तकनीकों को अपनाकर जांच प्रक्रिया को मजबूत बना रही है, और इस प्रतियोगिता में मिली सफलता उसी का प्रमाण है।

कैमरा सिर्फ तस्वीर नहीं, सच का सबूत है
आज के दौर में अपराधी भी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस को भी तकनीकी रूप से मजबूत होना जरूरी है। Crime Scene Photography जांच का वह हिस्सा है जो कोर्ट में सबसे ज्यादा मदद करता है। एक सही फोटो कई बार गवाहों की गवाही से ज्यादा मजबूत साबित होती है। यही वजह है कि इस प्रतियोगिता में पदक जीतना झारखंड पुलिस की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
झारखंड पुलिस ने जताई उम्मीद, आगे भी बेहतर प्रदर्शन का भरोसा
सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक ने कहा कि यह सफलता राज्य के लिए गर्व की बात है और आने वाले समय में पुलिस बल इसी तरह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करता रहेगा।
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