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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ जिले के कुजू क्षेत्र में सामने आया अवैध गोद लेने का मामला सिर्फ एक कानूनी उल्लंघन नहीं, बल्कि एक मासूम जिंदगी से जुड़ी गंभीर कहानी है। तीन माह का एक बच्चा, जिसे बोलने की ताकत भी नहीं, अपने भविष्य का फैसला दूसरों के हाथों में होते देख रहा था। लेकिन समय रहते ग्रामीणों की सतर्कता और प्रशासन की तत्परता ने इस नन्हीं जान को सुरक्षित बचा लिया। यह मामला कुजू ओपी क्षेत्र के पूर्वी न्यू कॉलोनी का है, जहां अचानक एक दंपति के पास एक छोटे बच्चे को देखकर लोगों को संदेह हुआ। यह वही संदेह था, जिसने आगे चलकर एक बड़ी सच्चाई को उजागर कर दिया।
एक मासूम की चुप्पी और गांव की बेचैनी
पूर्वी न्यू कॉलोनी में रोजमर्रा की जिंदगी सामान्य चल रही थी। लोग अपने काम में व्यस्त थे। तभी मोहल्ले में कुछ लोगों ने देखा कि एक घर में अचानक एक छोटा बच्चा दिखाई दे रहा है। बच्चे की उम्र मुश्किल से तीन माह के आसपास बताई जा रही है। लोगों को हैरानी हुई, क्योंकि आसपास के लोगों को इस दंपति के घर किसी बच्चे के जन्म की जानकारी नहीं थी। कुछ महिलाओं ने जब बच्चे की हालत देखी तो उनका मन बेचैन हो उठा। बच्चा बार-बार रो रहा था और उसके आसपास माहौल भी कुछ अलग लग रहा था। यहीं से गांव में कानाफूसी शुरू हुई। सवाल उठने लगे कि यह बच्चा आया कहां से? क्या इसे किसी ने छोड़ा है? या फिर कोई सौदा हुआ है?
लोगों ने डर के बावजूद उठाया सही कदम
ग्रामीणों के लिए यह फैसला आसान नहीं था। किसी के घर में जाकर सवाल करना या प्रशासन को सूचना देना अक्सर लोग टाल देते हैं। लेकिन इस बार लोगों ने चुप रहना ठीक नहीं समझा। आसपास के कुछ लोगों ने सीधे जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी शांति बागे को सूचना दी। सूचना मिलते ही बाल संरक्षण विभाग ने मामले को हल्के में नहीं लिया और तुरंत जांच की तैयारी शुरू कर दी।
प्रशासन की तेज कार्रवाई, मौके पर पहुंची टीम
जिला प्रशासन के निर्देश पर बाल संरक्षण टीम कुजू पुलिस के सहयोग से मौके पर पहुंची। टीम में विधि सह प्रवेक्षा पदाधिकारी रंजीत कुमार, चाइल्ड लाइन समन्वयक पुष्पा कुमारी और सामाजिक कार्यकर्ता रेमन पंकज भी मौजूद रहे। टीम ने घर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। बच्चा वहां मौजूद था और उसकी हालत देखकर यह साफ हो गया कि मामला सामान्य नहीं है। अधिकारियों ने बिना देर किए बच्चे को सुरक्षित अपने संरक्षण में ले लिया। जब बच्चे को टीम ने गोद में उठाया तो वहां मौजूद कई लोगों की आंखें भर आईं। तीन माह का यह मासूम शायद यह भी नहीं समझ पा रहा था कि उसे कौन ले जा रहा है और क्यों, लेकिन यह तय था कि अब वह खतरे से बाहर था।
सादे कागज पर तय हुआ था मासूम का सौदा
जांच के दौरान जो बातें सामने आईं, उन्होंने हर किसी को चौंका दिया। प्राथमिक जांच में पता चला कि यह बच्चा धनबाद के एक दंपति द्वारा सादे कागज पर लिखित सहमति के आधार पर दूसरे दंपति को सौंप दिया गया था। यानी कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेज, कोर्ट की अनुमति या बाल कल्याण समिति की भूमिका, कुछ भी नहीं अपनाया गया। बस सादे कागज पर सहमति लिखकर बच्चे को दे दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक यह पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी है और इसे अपराध की श्रेणी में माना जाता है।
अब जिला बाल संरक्षण इकाई में सुरक्षित है बच्चा
रेस्क्यू के बाद बच्चे को जिला बाल संरक्षण इकाई में सुरक्षित रखा गया है। वहां उसकी देखभाल की जा रही है। जरूरत के अनुसार मेडिकल जांच भी कराई जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बच्चा स्वस्थ है और उसे किसी तरह की परेशानी नहीं है। बाल संरक्षण विभाग ने बताया कि अब पूरे मामले की विस्तृत जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
गोद लेना पुण्य है, लेकिन नियम तोड़कर नहीं
अक्सर समाज में लोग सोचते हैं कि किसी बच्चे को गोद लेना सिर्फ इंसानियत का काम है। लेकिन कानून के मुताबिक यह एक पूरी प्रक्रिया है, जिसमें बच्चे की सुरक्षा सबसे ऊपर होती है। अगर किसी भी बच्चे को बिना कानूनी प्रक्रिया के गोद लिया जाता है तो उसके पीछे तस्करी, गलत मंशा या शोषण की आशंका भी बढ़ जाती है। यही वजह है कि प्रशासन ऐसे मामलों में सख्ती दिखाता है।
प्रशासन की चेतावनी और लोगों से अपील
प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी बच्चे को गोद लेना अपराध है। यदि कोई ऐसा करता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। साथ ही लोगों से यह भी अपील की गई है कि अगर कहीं भी इस तरह की संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत पुलिस या बाल संरक्षण विभाग को सूचना दें।
एक शक जिसने बचा ली एक जिंदगी
इस घटना ने यह दिखा दिया कि गांव और मोहल्ले की जागरूकता कितनी जरूरी है। अगर लोग उस दिन चुप रहते, तो शायद यह मासूम किसी ऐसे रास्ते पर चला जाता, जहां उसका भविष्य अंधेरे में खो सकता था। तीन माह का यह बच्चा आज सुरक्षित है। उसके लिए अभी जिंदगी की शुरुआत ही हुई है। लेकिन यह शुरुआत सुरक्षित हाथों में रहे, यही समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।
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