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Garhwa (Nityanand Dubey) : रविवार की सुबह मंडल कारा जेल में एक अलग ही माहौल देखने को मिला। जेल के ठोस दीवारों और कड़ी सुरक्षा के बीच, बंदियों के लिए एक विशेष ‘जेल अदालत’ और स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि बंदियों के लिए न्याय और स्वास्थ्य के दरवाजे खोलने का एक प्रयास था।
जेल अदालत- न्याय की उम्मीद जगाती पहल
जेल अदालत का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शाह के आदेश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गढ़वा के तत्वावधान में किया गया। बंदियों के चेहरे पर जिज्ञासा और उम्मीद साफ देखी जा सकती थी। एलएडीसी के सदस्यों की मौजूदगी में बंदियों को उनके वादों की स्थिति और कानूनी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेष रूप से उन बंदियों के लिए, जो मामूली अपराधों में लंबे समय से बंद थे, उनके मामलों पर विचार किया गया। साथ ही उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता और उनके मौलिक अधिकारों के बारे में भी बताया गया। जेल की दीवारों के भीतर सुनाई देने वाली यह पहल, न्याय की किरण बनकर पहुंची।
स्वास्थ्य शिविर- रोगमुक्त जीवन की पहल
न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ बंदियों की सेहत का भी ध्यान रखा गया। सदर अस्पताल की विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने शिविर में बंदियों की ब्लड प्रेशर, शुगर और सामान्य बीमारियों की जांच की। जांच के बाद जरूरतमंदों को मुफ्त दवाएं वितरित की गई। डॉक्टरों ने बंदियों को जेल परिसर में स्वच्छता बनाए रखने, मौसमी बीमारियों से बचाव और सही खान-पान के बारे में भी समझाया। कई बंदियों ने कहा कि यह पहल उनके लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है।
मानवीय दृष्टिकोण- सुधार की राह
एलएडीसी के सदस्यों ने इस अवसर पर कहा कि जेल का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि सुधार की भावना पैदा करना है। ऐसे कार्यक्रम बंदियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और उन्हें यह अहसास कराते हैं कि समाज और कानून उनकी परवाह करता है। इस मौके पर प्रवीन्द कुमार साहू, नित्यानंद दुबे, अनीता रंजन, जेलर मेहसाद आलम, चिकित्सक और पैरा लीगल वॉलंटियर्स भी मौजूद थे।
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