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Giridih : 25 जनवरी की रात हरलाडीह ओपी क्षेत्र की सड़कें सामान्य थीं, गांव में मेला लगा था, रौशनी थी, हंसी थी। लेकिन इसी रौशनी के पीछे एक ऐसा अंधेरा पल रहा था, जिसने दो मासूम जिंदगियों को हमेशा के लिए बदल दिया। दो आदिवासी नाबालिग बच्चियां, जिनकी दुनिया अभी सपनों और भरोसे से भरी होनी चाहिए थी, उसी रात हैवानियत का शिकार बना दी गईं। एक इनकार और चुप्पी ने आठ लोगों को इस हद तक दरिंदा बना दिया कि सभी ने मिलकर दोनों बच्चियों के साथ महापाप किया। दोनों को नोंचा-खरोंचा, आबरू तार-तार कर दी।
अंधेरे में डूबी चीखें, कोई सुनने वाला नहीं
घटना इतनी अचानक और भयावह थी कि बच्चियां कुछ समझ ही नहीं पाईं। चारों ओर अंधेरा था। चेहरे धुंधले थे। डर इतना गहरा था कि आवाज गले में ही अटक गई। जब सब कुछ खत्म हुआ, तो बचा सिर्फ सन्नाटा। ऐसा सन्नाटा, जो गांव की हर गली में फैल गया।
पुलिस के सामने खड़ी सबसे बड़ी दीवार
घटना के बाद जब पुलिस तक बात पहुंची, तो केस पूरी तरह ब्लाइंड था। पीड़िताएं सदमे में थीं। उन्होंने साफ कहा कि अंधेरा होने की वजह से पहचान मुश्किल है, लेकिन सामने आने पर पहचान लेंगी। कोई नाम नहीं। कोई चेहरा नहीं। कोई सीधा सुराग नहीं। यह वह स्थिति थी, जहां अक्सर केस ठंडे बस्ते में चले जाते हैं।
एसपी की बेचैनी और रात-दिन चलती जांच
गिरिडीह के एसपी डॉ. बिमल कुमार ने इस केस को सिर्फ एक फाइल नहीं माना। उन्होंने खुद निगरानी शुरू की। डुमरी एसडीपीओ सुमित कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। दिन में पूछताछ, रात में रणनीति। घटनास्थल से लेकर जतरा स्थल तक, हर कदम को दोबारा खंगाला गया। पुलिस हर दिन देर रात तक काम करती रही, लेकिन हाथ खाली ही रहता।
जब चुप्पी ने खोला सबसे खौफनाक राज
महिला पुलिसकर्मियों ने धैर्य और संवेदना के साथ पीड़िताओं से बात करनी शुरू की। धीरे-धीरे डर की परतें खुलीं। इसी बातचीत में एक नाम पहली बार सामने आया… एक एक्स बॉयफ्रेंड। घटना से पहले मेला में उसकी मौजूदगी। पीड़िता का उसे पहचानने से इनकार और उसी पल जन्म लेती बदले की आग।
बदले की आग में जलाई गई मासूमियत
पुलिस जांच में सामने आया कि एक्स बॉयफ्रेंड खुद नाबालिग था। उसने अपने अपमान का बदला लेने के लिए साथियों को उकसाया। एक किशोर की नाराजगी ने आठ लोगों को अपराधी बना दिया। यह कोई अचानक हुआ अपराध नहीं था, बल्कि रची गई साजिश थी। यही सच इस केस को और ज्यादा डरावना बना देता है।
जब कड़ी मेहनत रंग लाई
तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल और लगातार पूछताछ के बाद पुलिस साजिश तक पहुंची। राजेश मुर्मू, रविलाल टुडू, संजय टुडू और सोहन टुडू को गिरफ्तार किया गया। चार किशोरों को बाल संरक्षण कानून के तहत निरुद्ध किया गया। एक आरोपी अब भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
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