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Pakur (Jaydev Kumar) : सुबह का समय था। जिला समाहरणालय परिसर में रोज की तरह फाइलें, कामकाज और भागदौड़ थी। लेकिन इस दिन माहौल कुछ अलग था। चेहरों पर गंभीरता थी, आंखों में संकल्प और शब्दों में जिम्मेदारी। मौका था राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत आयोजित छठे दिन के कार्यक्रम का, जहां सड़क सुरक्षा केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की निजी जिम्मेदारी बनकर सामने आई।
एक शपथ, कई जिंदगियों की उम्मीद
पुलिस कप्तान निधि द्विवेदी और अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन के नेतृत्व में समाहरणालय परिसर में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाई गई। शपथ के शब्द साधारण थे, लेकिन उनका अर्थ गहरा था। वाहन चलाते समय नियमों का पालन करना, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करना, तेज रफ्तार से बचना और जरूरतमंद दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की मदद करना।
हादसों के पीछे छुपी लापरवाही की सच्चाई
कार्यक्रम के दौरान जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक रितेश कुमार सिंह ने एक सच्चाई सामने रखी। उन्होंने बताया कि अधिकतर सड़क दुर्घटनाएं किसी तकनीकी खराबी से नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही से होती हैं। बिना हेलमेट बाइक चलाना, सीट बेल्ट न लगाना, गुस्से में वाहन चलाना और जरूरी दस्तावेज साथ न रखना, यही छोटी गलतियां बड़े हादसों में बदल जाती हैं।
फाइलों से निकलकर जमीन से जुड़ा संदेश
एसपी निधि द्विवेदी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि सड़क सुरक्षा माह को केवल फाइलों की खानापूर्ति न समझा जाए। यह अभियान तभी सफल होगा, जब हर व्यक्ति इसे अपनी जिंदगी से जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि एक छोटी सी सावधानी किसी परिवार को उजड़ने से बचा सकती है।
नियम नहीं, जीवन की सुरक्षा का सवाल
कार्यक्रम में मौजूद कर्मियों ने महसूस किया कि ट्रैफिक नियम किसी पर बोझ नहीं हैं, बल्कि ये जीवन की सुरक्षा की ढाल हैं। हेलमेट सिर की हिफाजत करता है, सीट बेल्ट जान बचाती है और गति सीमा हमें अपनों तक सुरक्षित पहुंचाने का जरिया बनती है।
पूरे जिले में फैल रहा जागरूकता का संदेश
सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत पाकुड़ जिले में लगातार अलग अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उद्देश्य साफ है। सड़क पर निकलने वाला हर व्यक्ति सुरक्षित घर लौटे। यह केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक की साझी भूमिका है।
सामूहिक सहभागिता से ही बदलेगा हाल
इस कार्यक्रम में श्रम अधीक्षक, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला जन सूचना पदाधिकारी सहित कई वरीय अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में यही कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन केवल आज नहीं, बल्कि हर दिन होना चाहिए। सड़क सुरक्षा की यह शपथ शायद कुछ मिनटों की थी, लेकिन अगर यह आदत बन जाए, तो अनगिनत जिंदगियां सुरक्षित हो सकती हैं।
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