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Latehar : लातेहार का एक छोटा ठेकेदार, जिसने पुल निर्माण का काम पूरा कर लिया था, पिछले कई महीनों से अपने मेहनताने का इंतजार कर रहा था। बिल पास करवाने के लिए उसने दर्जनों बार जिला परिषद कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार उसे एक ही जवाब मिला… “कुछ करना पड़ेगा, तभी फाइल आगे बढ़ेगी।” यह “कुछ करना” दरअसल 65 हजार रुपये की रिश्वत थी।
सिस्टम की दीवार से टकराती उम्मीद
संवेदक ने उम्मीद की थी कि सरकारी दफ्तर में उसके काम की कद्र होगी, पर उसे बार-बार निराशा हाथ लगी। जिस पैसे से वह मजदूरों का बकाया चुकाना चाहता था, वही पैसे अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने वाले थे। आखिरकार, जब सहन नहीं हुआ, तो उसने पलामू स्थित एसीबी कार्यालय में जाकर शिकायत दर्ज कराई।
एसीबी की रणनीति और ऑपरेशन
एसीबी की टीम ने मामले की जांच की और योजना बनाई। तय हुआ कि संवेदक गुरुवार को प्रधान सहायक संतोष सिंह को रिश्वत देगा। जैसे ही उसने 65 हजार रुपये थमाए, बाहर तैयार खड़ी एसीबी का घर में दाखिल हो गई और संतोष सिंह को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। क्षणभर में पूरा दृश्य बदल गया। जिस पैसे से “काम निकलवाने” की कोशिश की जा रही थी, वही सबूत बन गया। एसीबी ने मौके पर ही संतोष सिंह को पकड़ लिया।
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