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Ranchi : दिवाली की रात। आसमान में रंग बिखेरते पटाखे, बच्चों की हंसी और रोशनी से जगमग शहर। लेकिन इसी चमक के बीच कहीं किसी घर में एक चीख गूंज जाती है… किसी बच्चे की आंख में चिंगारी पड़ जाती है, और पलभर में रोशनी अंधेरे में बदल जाती है। हर साल दिवाली पर ऐसी न जाने कितनी मासूम आंखें जलती चिंगारियों की कीमत चुकाती हैं। इसी दर्द को महसूस करते हुए एएसजी आई हॉस्पिटल ने इस बार एक मानवीय पहल की है… “दिवाली में रोशनी बांटें, अंधेरा नहीं।”
15 से 24 अक्टूबर 2025 तक, देशभर के सभी एएसजी आई हॉस्पिटल केंद्रों पर 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए पटाखों से हुई आंख की चोटों पर निःशुल्क परामर्श और सर्जरी की सुविधा दी जा रही है। अस्पताल सिर्फ फार्मेसी, एनेस्थीसिया और ऑप्टिकल सेवाओं की लागत लेगा… बाकी सब कुछ निःशुल्क।
“हर बच्चे की आंखों में रोशनी बचाना हमारा फर्ज़”
एएसजी आई हॉस्पिटल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ कहते हैं, “दिवाली खुशी का पर्व है, लेकिन बहुतों के लिए यह दुख लेकर आती है। पटाखों की लापरवाही से हर साल सैकड़ों बच्चे अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं। अगर हमारी पहल से किसी एक बच्चे की दृष्टि भी बचती है, तो वही हमारी असली दिवाली है।”
आंकड़ों में सच्चाई, दर्द की झलक
2023 में भारतभर में पटाखों से जुड़ी आंख की चोटों के 2000 से अधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें से 60% बच्चे थे और हर दस में से एक ने स्थायी दृष्टि खो दी। डॉक्टरों के अनुसार, दिवाली के दौरान आने वाले हर पांच में से एक नेत्र आघात का कारण पटाखे होते हैं।
एएसजी की यह पहल क्यों खास है
भारत का दूसरा सबसे बड़ा सुपरस्पेशलिटी आई हॉस्पिटल नेटवर्क होने के बावजूद एएसजी की यह पहल सिर्फ इलाज नहीं, जागरूकता का अभियान भी है। अस्पताल की टीम देशभर में लोगों को पटाखे चलाने के सुरक्षित तरीके सिखा रही है…
सुरक्षात्मक चश्मा पहनना, बच्चों को निगरानी में रखना, जल चुके पटाखों से दूरी बनाना और आंखों में चोट लगने पर तुरंत डॉक्टर की मदद लेना।
सुरक्षा की छोटी बातें, जो बचा सकती हैं आंखों की बड़ी दुनिया
सुरक्षात्मक चश्मा पहनें – पटाखों को जलाते समय या उनके पास रहते हुए हमेशा सुरक्षा चश्मा या गॉगल्स का उपयोग करें।
सुरक्षित दूरी बनाए रखें – पटाखे जलाते समय कम से कम 5-6 मीटर की दूरी रखें और खुले स्थानों में ही जलाएं।
बच्चों पर निगरानी रखें – बच्चों को कभी भी बिना बड़ों की देखरेख के पटाखे नहीं जलाने दें।
अवैध पटाखों से बचें – केवल प्रमाणित और पर्यावरण अनुकूल पटाखों का ही प्रयोग करें।
हाथों में पटाखा न जलाएं – हमेशा लंबी अगरबत्ती या पंक का प्रयोग करें और जले हुए पटाखों के पास न जाएं।
हाथ धोएं – पटाखे चलाने के बाद अपने हाथों को साबुन से धोएं ताकि रसायन आंखों में न जाएं।
फूटे पटाखों को न छुएं – जो पटाखे नहीं फूटे हों, उन्हें उठाने की कोशिश न करें; उन्हें पानी में डाल दें।
पानी या रेत पास रखें – किसी भी आकस्मिक आग या चोट की स्थिति में तुरंत उपयोग के लिए बाल्टी में पानी या रेत रखें।
शराब से दूर रहें – पटाखे चलाने से पहले या दौरान शराब या नशे का सेवन न करें।
चोट लगने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें – आंख में चोट लगने पर उसे रगड़ें या धोएं नहीं, बल्कि तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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