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Garhwa (Nityanand Dubey) : गढ़वा समाहरणालय सभागार में आज सिर्फ एक सरकारी बैठक नहीं हुई। वहां बैठे हर अधिकारी की मेज पर रखी फाइलें उन परिवारों की उम्मीदों से भरी थीं जिन्हें इलाज के लिए हर दिन पैसे की चिंता सताती है। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सहायता योजना पर हुई यह जिला स्तरीय बैठक उन लोगों के लिए राहत लेकर आई जो अस्पतालों के चक्कर लगाते हैं, पर जेब में दवा खरीदने तक के पैसे नहीं होते।
इलाज के बढ़ते खर्च में एक उम्मीद
डीसी दिनेश यादव ने बैठक की शुरुआत करते हुए कहा कि इलाज का खर्च अब गरीब परिवारों के लिए सबसे बड़ा बोझ बन गया है। मजदूरी करने वाले, छोटे किसान, दैनिक आय पर चलने वाले परिवार कब, कैसे और कहां इलाज कराएं, यह उनके लिए बड़ा सवाल है। ऐसे में यह योजना उन लोगों का सहारा है जो आर्थिक कमजोरी के कारण दवाओं और जांचों को छोड़ देते थे।
डीसी के मुताबिक यह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के ऐसे परिवारों को राहत देती है जिनकी आर्थिक स्थिति इलाज की अनुमति नहीं देती। 1,000 रुपये से 10,000 रुपये तक की मदद कई बार किसी की जान बचाने लायक भी साबित हो जाती है।
“बस मदद मिल जाए, इलाज मैं करा लूंगा”
बैठक के बाहर बैठे एक बुजुर्ग अपनी फाइल सीने से लगाकर कह रहे थे, “दवा का बिल ही मेरी कमाई खा जाता है। बस थोड़ी मदद मिल जाए, इलाज मैं किसी तरह करा लूंगा।” यही दर्द उन सैकड़ों लाभार्थियों का है जिनकी फाइलें आज जांच के लिए रखी गई थीं।
प्रक्रिया में साफ-सुथरापन की कोशिश
बैठक में तय हुआ कि अब हर आवेदन पहले कम्युनिटी हेल्थ सेंटर तक जाएगा, जहां डॉक्टर उसे जांचेंगे और अनुशंसा करेंगे। इससे न सिर्फ आवेदक का चक्कर कम होगा, बल्कि किसी भी अनियमितता की गुंजाइश भी नहीं बचेगी। सिविल सर्जन कार्यालय और फिर जिला कल्याण कार्यालय दस्तावेजों की पूरी जांच करेगा ताकि असली जरूरतमंद ही सहायता पाए।
267 परिवारों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
कोविड के बाद इलाज पर खर्च अचानक बढ़ा है। लोगों की जेबें खाली हो रही हैं और अस्पताल के बिल बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे समय में जब बैठक में 267 लाभार्थियों के आवेदन मंजूर हुए, तो यह संख्या सिर्फ एक आंकड़ा नहीं थी। यह 267 घरों में लौटती उम्मीद, राहत और खुशी थी। इनमें कोई वह मां है जिसे अपने बच्चे की दवा खरीदने के लिए उधार लेना पड़ रहा था। कोई वह मजदूर है जिसने अपनी कमाई का हर नोट जांचों में लगा दिया। और कोई वह बुजुर्ग है जो कई हफ्तों से मेडिकल स्टोर के बाहर सस्ती दवा ढूंढ रहा था।
आवेदन प्रक्रिया को और आसान बनाने की पहल
उपायुक्त ने साफ कहा कि कोई भी गरीब व्यक्ति केवल प्रक्रिया की वजह से योजना से वंचित न रह जाए। इसलिए आवेदन पत्र, चेकलिस्ट और दस्तावेजों की जमा प्रक्रिया को सरल किया जा रहा है। अब सिर्फ स्व-भिप्रमाणित प्रतियां ही काफी होंगी।
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