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Patna : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने इंटरमीडिएट और मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 2026 के लिए सेंट-अप परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि इन परीक्षाओं में शामिल होना सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है और जो विद्यार्थी इसमें असफल होंगे या अनुपस्थित रहेंगे, उन्हें मुख्य परीक्षा में शामिल होने का एडमिट कार्ड नहीं मिलेगा।
इंटरमीडिएट की सैद्धांतिक सेंट-अप परीक्षा 19 से 26 नवंबर 2025 के बीच दो पालियों में आयोजित की जाएगी। पहली पाली सुबह 9:30 बजे से 12:45 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक होगी। प्रत्येक पाली में विद्यार्थियों को पहले 15 मिनट प्रश्नपत्र पढ़ने और समझने के लिए दिए जाएंगे। इंटर की प्रायोगिक परीक्षा 27 से 29 नवंबर 2025 के बीच संबंधित विद्यालयों में आयोजित होगी और सभी विद्यार्थियों के लिए इसमें उपस्थित होना अनिवार्य है।
मैट्रिक स्तर की सेंट-अप परीक्षा 19 से 22 नवंबर 2025 के बीच लिखित रूप में आयोजित होगी और प्रायोगिक परीक्षा 24 नवंबर 2025 को होगी। परीक्षा का समय इंटर की तरह दो पालियों में रहेगा। बोर्ड ने कहा है कि जो विद्यार्थी सेंट-अप परीक्षा में शामिल नहीं होंगे, उन्हें वार्षिक परीक्षा में बैठने का अधिकार नहीं मिलेगा।
बोर्ड ने यह भी निर्देश दिया है कि दोनों वर्गों के लिए विद्यालय में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी है। इससे कम उपस्थिति वाले विद्यार्थी सेंट-अप और वार्षिक परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे। इसके अलावा, दृष्टिबाधित और अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सहायक लेखक की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है ताकि वे आसानी से परीक्षा दे सकें।
सेंट-अप परीक्षा के परिणाम इंटर के लिए 5 दिसंबर और मैट्रिक के लिए 2 दिसंबर तक जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय या संबंधित विद्यालयों में जमा किए जाएंगे। बोर्ड ने सभी विद्यालयों को समयसीमा का पालन सख्ती से करने के निर्देश दिए हैं।
बोर्ड ने साफ किया है कि सेंट-अप परीक्षा नियमित, स्वतंत्र और क्वालिफाइंग विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है, जबकि पिछले साल असफल या सुधार (इम्प्रूवमेंट) श्रेणी के छात्र इसमें शामिल नहीं होंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह परीक्षा सिर्फ औपचारिकता नहीं है, बल्कि वार्षिक परीक्षा में बैठने योग्य विद्यार्थियों की पहचान करने और उनकी तैयारी का पहला महत्वपूर्ण मूल्यांकन है। इस बार बोर्ड ने सेंट-अप परीक्षा को वार्षिक परीक्षा की सबसे अहम और शुरुआती सीढ़ी बताया है, जिसे सभी विद्यार्थियों और विद्यालयों को गंभीरता से लेना होगा।

