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Patna : अगर आप छुट्टी बिताने के लिए हर बार पड़ोसी राज्यों के पहाड़ों या जंगलों का रुख करते हैं, तो आने वाले दिनों में अपनी योजना बदलनी पड़ सकती है। बिहार के शांत जलाशयों, घने जंगलों और पथरीली पहाड़ियों के बीच अब एक बिल्कुल नया माहौल तैयार करने की तैयारी है। जहां कल तक सिर्फ सन्नाटा और पानी का फैलाव दिखता था, वहां अब सैलानियों के ठहरने के लिए पारदर्शी ग्लास रूम, झूलते हुए रोप-वे और शाम ढलते ही जगमगाने वाली सौर ऊर्जा की रोशनी दिखेगी। सीएम सम्राट चौधरी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक में साफ कर दिया है कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों को बिना नुकसान पहुंचाए बेहतरीन ईको टूरिज्म हब बनाया जाए।
लोक सेवक आवास के संकल्प सभागार में हुई बैठक में इस पूरी योजना का खाका खींचा गया। विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने प्रजेंटेशन के जरिए बताया कि बिहार के अलग-अलग जिलों में मौजूद बांध और जलक्षेत्र किस तरह सैलानियों की पहली पसंद बन सकते हैं। सरकार का सीधा इरादा है कि निजी क्षेत्र की मदद लेकर इन जगहों को इस तरह निखारा जाए कि स्थानीय युवाओं को घर के पास ही रोजी-रोटी मिल सके और लोगों को घूमने के लिए एक खूबसूरत ठिकाना।
कंक्रीट के जंगल नहीं, बांस और लकड़ी से सजेगी प्रकृति
अक्सर विकास के नाम पर जंगलों में कंक्रीट की बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी कर दी जाती हैं, लेकिन इस बार सरकार ने अपनी सोच बिल्कुल अलग रखी है। सीएम ने सख्त हिदायत दी है कि पहाड़ी और जंगली इलाकों में जो भी निर्माण होगा, उसमें सिर्फ बांस, लकड़ी और टिकाऊ प्राकृतिक सामग्री का ही इस्तेमाल किया जाएगा। इससे जंगल का मूल स्वरूप नहीं बिगड़ेगा और वहां आने वाले सैलानियों को पूरी तरह कुदरत के करीब होने का अहसास मिलेगा। जिन ऊंची पहाड़ियों पर चढ़ना बुजुर्गों या बच्चों के लिए मुश्किल होता है, वहां सुहाने सफर के लिए रोप-वे लगाए जाएंगे। इसके अलावा इन सुदूर इलाकों को जगमग रखने के लिए सौर ऊर्जा पर जोर दिया जा रहा है, ताकि पहाड़ों की हरियाली के बीच प्रदूषण का कोई नामोनिशान न रहे।
ओढ़नी से खड़गपुर तक… बांधों के किनारे का नया अंदाज
इस पूरी योजना के केंद्र में राज्य के प्रमुख जलस्रोत हैं। बांका के मशहूर ओढ़नी डैम, मुंगेर के ऐतिहासिक खड़गपुर व जालकुंड डैम और नवादा के ताराकोल डैम को नए सिरे से संवारने की तैयारी है। खड़गपुर डैम के पास तो पर्यटकों को प्रकृति का 360 डिग्री नजारा देने के लिए खास ग्लास रूम बनाने की योजना पर काम चल रहा है, जहां बैठकर लोग झील और वादियों की खूबसूरती निहार सकेंगे। वहीं खगड़िया के कसरैया धार को भी एक प्रमुख ईको टूरिज्म केंद्र के तौर पर उभारा जाएगा। जहां भी जमीन की कमी आड़े आ रही है, वहां सरकार खुद जमीन अधिग्रहित करेगी या खरीदेगी, ताकि पीपीपी मॉडल के जरिए निजी कंपनियां तेजी से यहां बेहतरीन रिसॉर्ट और सुविधाएं तैयार कर सकें।
किनारों पर हरियाली का पहरा और बदलती स्थानीय अर्थव्यवस्था
पानी के विशाल स्रोतों को सुरक्षित और सुंदर बनाए रखने के लिए बड़े तालाबों और बांधों के चारों तरफ बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। सीएम ने अधिकारियों को दो टूक कहा है कि राज्य में ग्रीन कवर बढ़ाने का जो लक्ष्य तय किया गया है, उसे बिना किसी देरी के पूरा किया जाए। इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय ग्रामीणों, नाविकों और छोटे दुकानदारों को होगा। जब लोग इन खूबसूरत वादियों में वक्त बिताने पहुंचेंगे, तो बिहार की अपनी एक नई पहचान बनेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। बैठक में पर्यावरण मंत्री डॉ. रामचन्द्र प्रसाद और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत समेत तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें सभी संबंधित विभागों के साथ मिलकर इस योजना को जल्द जमीन पर उतारने का जिम्मा सौंपा गया है।
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