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Patna : बिहार में आई भीषण बाढ़ और उससे मचे हाहाकार के बाद अब सरकार नुकसान की भरपाई और राहत कार्यों में पूरी ताकत झोंक रही है। राजधानी पटना के लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में इसे लेकर एक बड़ी बैठक हुई। इस बैठक की कमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक साथ संभाली। बैठक में सीएम सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया कि दुर्गा पूजा से पहले राज्य में बाढ़ से हुए कुल नुकसान का सटीक आकलन पूरा कर लिया जाएगा। इसके तुरंत बाद एक विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी, ताकि राज्य को जल्द से जल्द बड़ी मदद मिल सके।
सीएम ने बैठक में इस बात पर भी जोर दिया कि बिहार को हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है। अब वक्त आ गया है कि सिर्फ तात्कालिक राहत देने के बजाय इस गंभीर समस्या का कोई पक्का और स्थायी समाधान निकाला जाए।


15 जिलों में भारी तबाही, 50 लाख आबादी झेल रही परेशानी
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे हालात की जानकारी रखी। उन्होंने कहा कि बिहार की बनावट ही कुछ ऐसी है कि प्रदेश को हर बरसात में बाढ़ के संकट का सामना करना पड़ता है। इस बार भी मॉनसून में नदियों के उफान ने जमकर तबाही मचाई है। सूबे के 15 जिलों के करीब 88 प्रखंड सीधे तौर पर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इस वजह से लगभग 50 लाख लोगों की जिंदगी पूरी तरह पटरी से उतर गई है। चारों तरफ पानी भर जाने से गांव के गांव अलग-थलग पड़ गए हैं। सीएम ने कहा कि इस भारी आफत के बीच राज्य प्रशासन हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा रहा। सरकार और स्थानीय प्रशासन के अफसर पहले दिन से ही मैदान में डटे रहे और जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने का काम शुरू किया गया।
राहत शिविरों में मिल रही मदद, 1.62 करोड़ लोगों को कराया गया भोजन
बाढ़ पीड़ितों की मदद का लेखा-जोखा पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार की पहली प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित निकालने और उनका पेट भरने की थी। इसके लिए प्रभावित इलाकों में एक हजार से ज्यादा सामुदायिक रसोई केंद्र शुरू किए गए। इन रसोई केंद्रों के जरिए अब तक करीब 1 करोड़ 62 लाख लोगों को भरपेट और ताजा भोजन कराया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि शिविरों में रह रहे परिवारों के लिए साफ पीने के पानी, जरूरी दवाइयों और डॉक्टर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा मवेशियों के चारे और देखभाल पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। सीएम ने कहा कि जैसे ही सर्वे का काम पूरा होगा, केंद्र सरकार से पिछले वर्षों की तरह इस बार भी एक बड़े राहत पैकेज की पूरी उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री ने की तारीफ, बोले हर कदम पर साथ खड़ी है केंद्र सरकार
बैठक में मौजूद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार सरकार और मैदानी अमले की जमकर पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी बड़ी विपदा में बिहार सरकार ने जिस तेजी और संवेदनशीलता के साथ काम किया है, वह वाकई काबिले तारीफ है। केंद्रीय मंत्री ने खुद हवाई सर्वे और जमीन पर जाकर नुकसान का मुआयना किया। उन्होंने माना कि पानी के तेज बहाव से सड़कें कट गई हैं, पुल-पुलियों को नुकसान हुआ है और बिजली के खंभे बह गए हैं। शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार जो भी मांग पत्र तैयार करेगी, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सामने मजबूती से रखा जाएगा। केंद्र सरकार संकट के इस समय में बिहार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और फंड की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी
किसानों को मिलेंगे बढ़िया बीज, उजड़े मकानों को दोबारा बनाएगी सरकार
बाढ़ की सबसे गहरी चोट किसानों पर पड़ी है। खेतों में पानी भर जाने से धान, मक्का और केले की तैयार फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। इस नुकसान पर चिंता जताते हुए केंद्रीय मंत्री ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बिहार के किसानों को मक्का, केला और लीची के उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने का काम तेजी से करेगी। उच्च गुणवत्ता वाले बीज मिलने से अगली फसलों की पैदावार अच्छी होगी और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जिन गरीब परिवारों के घर बाढ़ में पूरी तरह ढह गए हैं, उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऐसे सभी परिवारों को दोबारा पक्के मकान बनाकर दिए जाएंगे। साथ ही ग्रामीण इलाकों में जीविका दीदियों और कमजोर वर्ग के लोगों को फिर से कामकाज शुरू करने के लिए विशेष आर्थिक सहायता दी जाएगी।
अधिकारियों ने पेश किया नुकसान का खाका
बैठक की शुरुआत में राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने वर्ष 2026 की इस बाढ़ के पूरे हालात की जानकारी दी। इसके बाद कृषि, ग्रामीण कार्य, ऊर्जा, स्वास्थ्य, पीएचईडी, जल संसाधन और पशुपालन विभाग के प्रधान सचिवों और सचिवों ने अपने-अपने विभागों के नुकसान का पूरा ब्योरा पेश किया।
अधिकारियों ने बताया कि कहां-कहां तटबंध टूटे हैं, कितनी ग्रामीण सड़कें बही हैं और अब तक मरम्मत का कितना काम पूरा हो चुका है। इस अहम बैठक में दोनों उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के अलावा कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा और ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार भी शामिल रहे। सबने एक सुर में यही कहा कि प्रभावित जनता को जल्द से जल्द राहत पहुंचाना ही पहली प्राथमिकता है।
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